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कर्नाटक स्टिंग ऑपरेशन: कुमारस्वामी ने ₹15 करोड़ के लेन-देन में ईडी जांच की मांग की

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कर्नाटक स्टिंग ऑपरेशन: कुमारस्वामी ने ₹15 करोड़ के लेन-देन में ईडी जांच की मांग की

सारांश

कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन को लेकर सियासत गरम है — केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने ₹15 करोड़ से अधिक के कथित लेन-देन में ईडी जांच की मांग की। साथ ही, केपीएससी में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उन्होंने बेरोज़गारी से निपटने के लिए सरकारी नौकरी का कार्यकाल घटाने का अनूठा प्रस्ताव भी रखा।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने 16 अक्टूबर 2026 को ईडी और आयकर विभाग से स्टिंग ऑपरेशन में कथित ₹15 करोड़ से अधिक के लेन-देन की जांच की मांग की।
अशोक के अनुसार, स्टिंग ऑपरेशन पर ₹10 से ₹15 करोड़ खर्च हुए हैं।
कुमारस्वामी ने केपीएससी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए — दावा किया कि नौकरियाँ पैसों के बदले बेची जा रही थीं।
बेरोज़गारी से निपटने के लिए सरकारी कर्मचारियों का कार्यकाल 35 वर्ष से घटाकर 10-20 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कम कार्यकाल के बाद भी कर्मचारियों को पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ मिलते रहने चाहिए।

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को मांग की कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को निशाना बनाकर किए गए स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग से कराई जाए। रामनगर जिले के बिदादी में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने यह मांग तब उठाई, जब विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया था कि इस ऑपरेशन पर ₹10 से ₹15 करोड़ खर्च हुए हैं।

स्टिंग ऑपरेशन और कथित रकम का विवाद

कुमारस्वामी ने कहा, 'आप सिर्फ इसमें शामिल पैसों का हिसाब क्यों लगा रहे हैं? अगर सब कुछ सामने आ गया तो हमारे राज्य की गरिमा और प्रतिष्ठा पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इसमें ₹15 करोड़ से ज्यादा का लेन-देन हुआ है। अगर ईडी इसमें दखल देती है, तो सच सामने आ जाएगा और यह भी पता चल जाएगा कि पैसों का लेन-देन कैसे हुआ।' यह बयान कर्नाटक की सियासत में नया तूफान लेकर आया है, क्योंकि यह स्टिंग ऑपरेशन पहले से ही एक बड़ा राजनीतिक विवाद बना हुआ है।

केपीएससी भर्ती और भ्रष्टाचार के आरोप

इसी कार्यक्रम में कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा की गई भर्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर आवेदकों के साथ चर्चा के दौरान कुमारस्वामी ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि केपीएससी, जो पारदर्शी एवं निष्पक्ष प्रक्रिया के ज़रिए सरकारी नौकरियों के लिए योग्य अभ्यर्थियों का चयन करने के लिए ज़िम्मेदार संस्था है, अब भ्रष्टाचार का केंद्र बन गई है। उनके अनुसार, नौकरियाँ पैसों के बदले बेची जा रही थीं और आयोग के अध्यक्ष, सदस्य तथा अधिकारी इसमें संलिप्त थे।

सरकारी नौकरी का कार्यकाल घटाने का प्रस्ताव

कुमारस्वामी ने बेरोज़गारी से निपटने के लिए एक नया विचार सामने रखा — सरकारी कर्मचारियों के मौजूदा 35 वर्ष के कार्यकाल को घटाकर 10, 15 या 20 वर्ष करने का प्रस्ताव। उनका तर्क है कि इससे रिक्तियाँ तेज़ी से खुलेंगी और अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी का अवसर मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नए छोटे कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ पहले की तरह मिलते रहने चाहिए।

युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता

नवरात्रि पर्व का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, 'अगर आने वाले दिनों में मुझे मौका मिलता है तो मैं इस योजना को लागू करना चाहूंगा। मेरी नज़र में, हर परिवार में कम से कम एक सरकारी नौकरी होनी चाहिए। मैंने अपना यह विचार जनता के सामने रखा है और इस पर चर्चा होनी चाहिए।' उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस प्रस्ताव पर अपनी राय साझा करें।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव है। कुमारस्वामी के ईडी जांच की मांग को राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। यदि ईडी या आयकर विभाग इस मामले में जांच शुरू करते हैं, तो कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु यह मांग ऐसे समय में आई है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) का गठबंधन कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस को घेरने की हर कोशिश कर रहा है — इसलिए इसे केवल कानूनी पारदर्शिता की मांग के रूप में पढ़ना अधूरा होगा। केपीएससी पर भ्रष्टाचार के आरोप नए नहीं हैं, लेकिन इन्हें स्टिंग ऑपरेशन के विवाद के साथ जोड़कर उठाना स्पष्ट रूप से एक संगठित राजनीतिक आक्रमण की रणनीति दर्शाता है। सरकारी नौकरी का कार्यकाल घटाने का प्रस्ताव रचनात्मक है, किंतु इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन — विशेषकर पेंशन देनदारियों के बोझ — पर कोई विस्तृत वित्तीय खाका सामने नहीं आया है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक स्टिंग ऑपरेशन विवाद क्या है?
यह एक स्टिंग ऑपरेशन है जो कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को निशाना बनाकर किया गया बताया जा रहा है। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने दावा किया है कि इस ऑपरेशन पर ₹10 से ₹15 करोड़ खर्च हुए, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने ईडी जांच की मांग की।
कुमारस्वामी ने ईडी जांच की मांग क्यों की?
कुमारस्वामी का कहना है कि स्टिंग ऑपरेशन में ₹15 करोड़ से अधिक का वित्तीय लेन-देन हुआ है और इस पैसे के स्रोत तथा लेन-देन की प्रकृति की गहन जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि ईडी हस्तक्षेप करे तो सच्चाई सामने आ सकती है।
केपीएससी पर कुमारस्वामी ने क्या आरोप लगाए?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है, जहाँ नौकरियाँ पैसों के बदले बेची जा रही थीं। उन्होंने कहा कि आयोग के अध्यक्ष, सदस्य और अधिकारी बड़े पैमाने पर इसमें संलिप्त थे।
कुमारस्वामी ने सरकारी नौकरी के कार्यकाल को लेकर क्या प्रस्ताव रखा?
उन्होंने प्रस्ताव दिया कि सरकारी कर्मचारियों का मौजूदा 35 वर्ष का कार्यकाल घटाकर 10, 15 या 20 वर्ष किया जाए, ताकि रिक्तियाँ जल्दी खुलें और अधिक युवाओं को रोज़गार मिले। उन्होंने यह भी कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को पेंशन और अन्य लाभ मिलते रहने चाहिए।
क्या यह ईडी जांच वास्तव में होगी?
अभी तक ईडी या आयकर विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। कुमारस्वामी ने यह मांग बिदादी में मीडिया से बातचीत के दौरान उठाई, जो फिलहाल एक राजनीतिक मांग के रूप में ही दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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