18 अगस्त 2026
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सोनिया गांधी पर कुमारस्वामी की 'इटैलियन खून' वाली टिप्पणी, विपक्ष ने BJP-RSS पर लगाया 'फूट डालो राज करो' का आरोप

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सोनिया गांधी पर कुमारस्वामी की 'इटैलियन खून' वाली टिप्पणी, विपक्ष ने BJP-RSS पर लगाया 'फूट डालो राज करो' का आरोप

सारांश

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी की 'इटैलियन खून' वाली टिप्पणी ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। CPI-M, CPI, DMK और कांग्रेस ने एकजुट होकर इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और BJP-RSS पर 'बांटो और राज करो' की नीति अपनाने का आरोप लगाया — यह विवाद वंदे मातरम की बहस के बीच और गहरा हो गया।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने हासन में कहा कि सोनिया गांधी की 'रगों में इटैलियन खून दौड़ता है।' CPI-M महासचिव एम.ए.
बेबी ने टिप्पणी को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा कि 2004 में सोनिया ने स्वयं PM पद ठुकराकर मनमोहन सिंह को चुना था।
राजा ने बयान की निंदा की और कहा कि राष्ट्रीयता के आधार पर ऐसी आलोचना अनुचित है।
DMK प्रवक्ता टी.के.एस.
एलंगोवन ने वंदे मातरम पर कहा कि 1947 में ही पूरा गाना न गाने का निर्णय हो चुका था।
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने BJP-RSS को 'अंग्रेजों का असली उत्तराधिकारी' बताते हुए 'बांटो और राज करो' की नीति का आरोप लगाया।

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने सोमवार, 18 अगस्त को हासन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के इटली मूल को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की, जिसके बाद विपक्षी दलों ने मंगलवार को एकजुट होकर तीखी प्रतिक्रिया दी। विपक्ष ने इस बयान को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर 'फूट डालो और राज करो' की राजनीति करने का आरोप लगाया।

कुमारस्वामी ने क्या कहा था

जनता दल-सेक्युलर (JD-S) के नेता और केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने हासन में कहा था, 'क्या सोनिया गांधी हमारे देश की हैं? शादी के बाद वह भारत आईं। जाहिर है उनकी रगों में इटैलियन खून दौड़ता है।' यह बयान 'वंदे मातरम' विवाद के बीच आया, जो उस समय एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका था।

गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर संसद में बहस हो चुकी है और कई राज्यों — विशेषकर तमिलनाडु — में इस मुद्दे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में कुमारस्वामी की टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M) के महासचिव एम.ए. बेबी ने इस टिप्पणी की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुमारस्वामी ने विपक्ष की अहम नेताओं में से एक पर व्यक्तिगत हमला किया है। जब सरकार सत्ता में थी, तब वह यूपीए की चेयरपर्सन थीं।'

बेबी ने यह भी याद दिलाया कि 2004 में जब कांग्रेस के पास सरकार बनाने का अवसर था, तब सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बन सकती थीं क्योंकि वह पार्टी की निर्विवाद नेता थीं — लेकिन उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से इनकार कर दिया और डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में चुनने की अनुशंसा की।

CPI और DMK की आवाज़

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि इस विवाद में दो अलग-अलग मुद्दे हैं — वंदे मातरम और सोनिया गांधी के खिलाफ कुमारस्वामी की टिप्पणियाँ। राजा ने कहा, 'मैं ऐसे बयान की निंदा करता हूँ। आखिरकार, सोनिया भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की नेता हैं। वह सांसद हैं और देश की वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं।'

राजा ने आगे कहा, 'लोग अलग-अलग जातियों और राष्ट्रीयताओं में शादी करते हैं। वे उस देश के माहौल में ढल जाते हैं जहाँ वे अपने जीवनसाथी के साथ बसते हैं। सोनिया गांधी के मामले में ऐसा मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है? कुमारस्वामी जैसे नेता का इस आधार पर उन पर हमला करना सही नहीं है।'

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने कहा, 'वह इटली से हैं — यह बात सभी जानते हैं, लेकिन वह भारतीयों के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने एक भारतीय नेता से शादी की और उनके बच्चे भी राजनीति में सक्रिय हैं।' एलंगोवन ने वंदे मातरम पर भी कहा कि 1947 में ही यह तय हो गया था कि पूरा गाना नहीं गाया जाएगा।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने इस विवाद को BJP और RSS की मानसिकता का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा, 'देखिए, उनकी सोच हमेशा से ऐसी ही रही है। असल में अंग्रेजों के असली उत्तराधिकारी यही लोग हैं। भाजपा-आरएसएस 'बांटो और राज करो' की नीति अपनाते हैं।'

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब 'वंदे मातरम' को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। आलोचकों का कहना है कि सत्तारूढ़ गठबंधन इस मुद्दे का उपयोग विपक्ष को कमज़ोर करने के लिए कर रहा है। संसद के अगले सत्र में यह मामला फिर गूँजने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह एकता केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रहेगी या संसद में ठोस विपक्षी मोर्चे में तब्दील होगी।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुमारस्वामी ने सोनिया गांधी पर क्या टिप्पणी की थी?
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने हासन में कहा कि सोनिया गांधी 'हमारे देश की नहीं हैं' और 'उनकी रगों में इटैलियन खून दौड़ता है।' यह बयान वंदे मातरम विवाद के बीच आया और इसने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया।
विपक्ष ने कुमारस्वामी की टिप्पणी पर क्या कहा?
CPI-M, CPI, DMK और कांग्रेस ने एकजुट होकर इस टिप्पणी को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। विपक्षी नेताओं ने BJP और RSS पर 'फूट डालो और राज करो' की राजनीति करने का आरोप लगाया।
वंदे मातरम विवाद का इस मामले से क्या संबंध है?
CPI महासचिव डी. राजा के अनुसार इस विवाद में दो अलग मुद्दे हैं — वंदे मातरम और सोनिया गांधी पर टिप्पणी। DMK प्रवक्ता एलंगोवन ने कहा कि 1947 में ही तय हो गया था कि वंदे मातरम का पूरा गाना नहीं गाया जाएगा, इसलिए यह विवाद अनावश्यक है।
CPI-M ने सोनिया गांधी के 2004 के फैसले का ज़िक्र क्यों किया?
CPI-M महासचिव एम.ए. बेबी ने याद दिलाया कि 2004 में सोनिया गांधी के पास प्रधानमंत्री बनने का अवसर था, लेकिन उन्होंने स्वयं इसे ठुकराकर डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री चुनने की अनुशंसा की — यह तर्क उनकी भारत के प्रति निष्ठा को रेखांकित करने के लिए दिया गया।
क्या इस विवाद का संसद पर कोई असर पड़ेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा संसद के अगले सत्र में फिर उठ सकता है। विपक्षी दलों की एकजुट प्रतिक्रिया को देखते हुए INDIA गठबंधन इसे सरकार को घेरने के एक अवसर के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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