कुशीनगर: झरही ड्रेन में डूबीं 3 बच्चियों के शव 11 घंटे बाद बरामद, दुबौली गांव में पसरा मातम
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में 1 अगस्त 2026 को एक दर्दनाक हादसे में दुबौली गांव की तीन मासूम बच्चियाँ झरही ड्रेन की तेज धारा में बह गईं। राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम ने रातभर सर्च अभियान चलाने के बाद लगभग 11 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तीनों के शव बरामद किए। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा
मृतक बच्चियाँ नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के दुबौली गांव की निवासी थीं। तीनों की उम्र क्रमशः 14 साल, 11 साल और 10 साल थी — इनमें दो सगी बहनें और एक चचेरी बहन शामिल थीं। जानकारी के अनुसार, तीनों बच्चियाँ घर के जानवरों के लिए चारा काटने निकली थीं।
पडरौना कोतवाली और नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के बीच बहने वाली झरही ड्रेन पर पुलिया पार करते समय संदिग्ध परिस्थितियों में तीनों का संतुलन बिगड़ गया और वे तेज बहाव वाली ड्रेन में जा गिरीं। देखते ही देखते तेज धारा उन्हें अपने साथ बहा ले गई।
बचाव अभियान और सर्च ऑपरेशन
घटना के समय वहाँ मौजूद सपना के 10 साल के छोटे भाई ने घबराकर गांव की ओर दौड़ लगाई और ग्रामीणों को सूचित किया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, मछुआरे और स्थानीय लोग मौके पर पहुँचे और बच्चियों को बचाने की कोशिश में जुट गए।
इसके बाद पुलिस और SDRF की टीम भी तत्काल घटनास्थल पर पहुँची। रातभर ड्रेन में सर्च अभियान चलाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद अगली सुबह तीनों बच्चियों के शव बरामद हुए। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरवाया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
गांव में शोक की लहर
तीनों बच्चियों के शव मिलने की खबर फैलते ही दुबौली गांव में चीख-पुकार मच गई। घरों में मातम का माहौल छा गया। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के कारण उत्तर प्रदेश की कई नदियाँ और नालियाँ उफान पर हैं, जिससे ऐसे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांव पहुँचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हरसंभव सहायता दिलाने का भरोसा दिया।
जांच जारी
पुलिस मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, पुलिया पर हुई घटना की परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है। गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रेन और नालों के किनारे सुरक्षा उपायों का अभाव इस तरह के हादसों को बार-बार जन्म देता है। पीड़ित परिवारों को न्याय और सहायता दिलाने की माँग स्थानीय स्तर पर उठने लगी है।