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कुशीनगर बाढ़: बड़ी गंडक 96.48 मीटर पर, 32 गाँव प्रभावित; NDRF-SDRF तैनात

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कुशीनगर बाढ़: बड़ी गंडक 96.48 मीटर पर, 32 गाँव प्रभावित; NDRF-SDRF तैनात

सारांश

कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी खतरे के निशान से 0.48 मीटर ऊपर — 32 गाँव जलमग्न, NDRF-SDRF और 66 गोताखोर मैदान में। 13,030 लंच पैकेट और 2,100 राशन किट बाँटे जा चुके हैं। योगी सरकार ने युद्धस्तर पर राहत तंत्र सक्रिय किया है।

मुख्य बातें

बड़ी गंडक नदी का जलस्तर 29 सितंबर को 96.48 मीटर — खतरे के निशान 96 मीटर से 0.48 मीटर ऊपर।
खड्डा तहसील के 18 और तमकुहीराज तहसील के 14 गाँव — कुल 32 गाँव बाढ़ प्रभावित।
NDRF , SDRF , पीएसी बाढ़ राहत दल और 66 स्थानीय गोताखोरों की टीम तैनात।
10 बाढ़ चौकियाँ और 16 राहत शिविर स्थापित; 16 सामुदायिक रसोई संचालित।
अब तक 13,030 लंच पैकेट और 2,100 राशन किट वितरित; 2 मेडिकल टीमें सक्रिय।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी का जलस्तर 29 सितंबर को सुबह 8 बजे 96.48 मीटर दर्ज किया गया — जो खतरे के निर्धारित बिंदु 96 मीटर से 0.48 मीटर ऊपर है। बाढ़ की इस गंभीर स्थिति के मद्देनज़र राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने जिला प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य तत्काल तेज़ करने के निर्देश दिए हैं।

बाढ़ का दायरा और प्रभावित क्षेत्र

वाल्मीकि नगर बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण स्थिति और विकट हुई है। इसके परिणामस्वरूप खड्डा तहसील के 18 गाँव और तमकुहीराज तहसील के 14 गाँव — कुल 32 गाँव — बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर जारी है।

राहत एवं बचाव की तैयारी

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन ने 10 बाढ़ चौकियाँ और 16 राहत शिविर स्थापित किए हैं। बचाव अभियान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और पीएसी बाढ़ राहत दल की टीमें तैनात की गई हैं। स्थानीय स्तर पर नावों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त स्थानीय गोताखोरों की 66 सदस्यीय टीम भी राहत अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रही है।

भोजन, राशन और चिकित्सा व्यवस्था

प्रभावित लोगों को भोजन की निर्बाध आपूर्ति के लिए खड्डा तहसील में 13 और तमकुहीराज तहसील में 3 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। अब तक 13,030 लंच पैकेट और 2,100 राशन किट वितरित किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के लिए 2 मेडिकल टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं। पुलिस, स्वास्थ्य, पशुपालन और विद्युत आपूर्ति विभागों को भी राहत कार्य में सक्रिय रखा गया है।

योगी सरकार की आपदा प्रबंधन रणनीति

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी मानसूनी बाढ़ का दबाव बना हुआ है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने राहत आयुक्त कार्यालय के माध्यम से जिला प्रशासन की निगरानी को केंद्रीकृत किया है, ताकि राहत सामग्री के वितरण में देरी न हो। राहत सामग्री की उपलब्धता और वितरण की लगातार निगरानी की जा रही है।

आगे की स्थिति

गौरतलब है कि बड़ी गंडक नदी का जलस्तर मानसून के अंतिम चरण में भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है, जो आने वाले दिनों में स्थिति के और जटिल होने की आशंका को बनाए रखता है। प्रशासन के अनुसार बाढ़ की स्थिति पर निरंतर नज़र रखी जा रही है और आवश्यकतानुसार बचाव एवं राहत कार्यों को विस्तार दिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

66 गोताखोर, 13,030 लंच पैकेट — लेकिन असली परीक्षा यह है कि ये संसाधन उन 32 गाँवों के हर परिवार तक समय पर पहुँच रहे हैं या नहीं। उत्तर प्रदेश में हर मानसून बाढ़ राहत के बड़े दावे होते हैं, फिर भी गंडक और घाघरा के किनारे के जिले बार-बार इसी संकट में फँसते हैं। वाल्मीकि नगर बैराज से पानी छोड़े जाने की सूचना और निचले इलाकों की तैयारी के बीच का अंतर ही असली जवाबदेही का सवाल है — जिस पर मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ध्यान नहीं देती।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुशीनगर में बाढ़ की वर्तमान स्थिति क्या है?
29 सितंबर को बड़ी गंडक नदी का जलस्तर 96.48 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरे के निशान 96 मीटर से 0.48 मीटर ऊपर है। खड्डा और तमकुहीराज तहसील के कुल 32 गाँव बाढ़ से प्रभावित हैं।
कुशीनगर बाढ़ में कौन-कौन सी राहत टीमें तैनात हैं?
NDRF, SDRF और पीएसी बाढ़ राहत दल की टीमें तैनात हैं। इसके अलावा 66 स्थानीय गोताखोरों की टीम और नावों की व्यवस्था भी की गई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन और राशन कैसे मिल रहा है?
खड्डा तहसील में 13 और तमकुहीराज तहसील में 3 सामुदायिक रसोई संचालित हैं। अब तक 13,030 लंच पैकेट और 2,100 राशन किट वितरित किए जा चुके हैं।
वाल्मीकि नगर बैराज से पानी छोड़े जाने का क्या असर हुआ?
बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण खड्डा तहसील के 18 और तमकुहीराज तहसील के 14 गाँव बाढ़ की चपेट में आए। इससे नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुँच गया।
कुशीनगर बाढ़ में चिकित्सा सुविधाएँ कैसे उपलब्ध कराई जा रही हैं?
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 2 मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। पुलिस, स्वास्थ्य, पशुपालन और विद्युत आपूर्ति विभागों को भी राहत कार्य में सक्रिय रखा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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