चित्रकूट बाढ़: मंदाकिनी 128 मीटर पर, 688 लोग सुरक्षित, 36 गाँवों में राहत अभियान जारी
सारांश
मुख्य बातें
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर 29 अगस्त को 135.20 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुँचने के बाद अब घटकर 128.00 मीटर पर आ गया है। उत्तर प्रदेश के जिला प्रशासन ने अब तक 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया है और राहत-बचाव अभियान पूरी सतर्कता के साथ जारी है। जिले में बाढ़ से किसी प्रकार की जनहानि या पशुहानि की पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, जलस्तर में गिरावट के बावजूद प्रशासन ने निगरानी में कोई ढिलाई नहीं बरती है। मंदाकिनी के बढ़े जलस्तर से कर्वी के रामघाट सहित 19 गाँव, राजापुर के 7 गाँव और मानिकपुर के 10 गाँव — कुल 36 गाँव — प्रभावित हुए। इन क्षेत्रों में 13,906 लोगों तक सहायता पहुँचाई गई है।
बचाव अभियान में एनडीआरएफ के 30 सदस्य और एसडीआरएफ की दो टीमों के 27 सदस्य तैनात हैं। स्थानीय प्रशासन की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय हैं।
राहत वितरण का विवरण
बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े पैमाने पर व्यवस्था की गई है। तहसील कर्वी में 24,530, राजापुर में 4,043 और मानिकपुर में 230 — यानी कुल 28,803 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त राहत किट वितरण में कर्वी में 1,073, राजापुर में 796 और मानिकपुर में 196 — कुल 2,065 राहत किट — बाँटी जा चुकी हैं।
जिले में 18 बाढ़ शरणालय क्रियाशील हैं। बाढ़ से 653 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें से 188 मामलों में ₹7.52 लाख की सहायता राशि लाभार्थियों के खातों में भेजी जा चुकी है। पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त एक मकान के मामले में ₹1.20 लाख की सहायता दी गई है।
स्वास्थ्य सेवाएँ और फसल सर्वेक्षण
बाढ़ प्रभावित और संभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए 28 मेडिकल टीमें एंबुलेंस और आवश्यक दवाओं के साथ स्वास्थ्य परीक्षण एवं दवा वितरण कर रही हैं। किसानों को राहत देने के लिए फसल क्षति का सर्वेक्षण भी कराया जा रहा है।
गाजीपुर में भी सफल रेस्क्यू
गाजीपुर में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से डूहिया सरैया के पास नदी के एक टापू पर फँसे 12 चरवाहों और 2,000 से अधिक भेड़ों को पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षित निकाला। करीब छह घंटे चले इस जोखिमपूर्ण अभियान में नाइट विजन ड्रोन से फँसे लोगों और भेड़ों की लोकेशन चिन्हित की गई।
इसके बाद फ्लड कंपनी पीएसी, पुलिस, प्रशासनिक टीम और स्थानीय नाविकों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान को अंजाम दिया। अभियान में कोई जनहानि नहीं हुई और स्थानीय ग्रामीणों ने त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस-प्रशासन की सराहना की।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के कई जिले मानसून की अत्यधिक वर्षा से जूझ रहे हैं। आने वाले दिनों में जलस्तर की निगरानी और राहत वितरण की गति पर प्रशासन की नज़र बनी रहेगी।