मध्य प्रदेश बाढ़: रीवा में ४,००० से अधिक लोगों का रेस्क्यू, पाँच जिलों में अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के पूर्वी जिलों में 21 अगस्त 2026 को भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। नर्मदा और मंदाकिनी समेत कई प्रमुख नदियाँ खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं, जिससे रीवा, डिंडोरी, पन्ना, सतना और छतरपुर जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर तेज कर दिया है।
रीवा में सबसे गंभीर स्थिति
रीवा जिले में हालात सबसे चिंताजनक हैं। आंकड़ों के अनुसार, अब तक बाढ़ में फँसे ४,००० से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है। २७ राहत शिविरों में करीब ३,००० लोगों को आश्रय दिया गया है। राजस्व अधिकारी, पुलिस और रेस्क्यू टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं और स्थिति पर निरंतर नज़र रख रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मऊगंज में अष्टभुजा नदी के उफान पर आने से नदी का पानी नैगढ़ी गाँव तक पहुँच गया। अमृत योजना के तहत निर्माण कार्य में लगे चार मजदूर बाढ़ के पानी में फँस गए, जिनमें से एक मजदूर तेज बहाव में बह गया। डिंडोरी में खेरमेर नदी का जलस्तर बढ़ने से डिंडोरी-मंडला स्टेट हाईवे बंद करना पड़ा — पुल के ऊपर से पानी बह रहा है। एहतियात के तौर पर मैहर और डिंडोरी में कक्षा १२ तक के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं; डिंडोरी में आँगनवाड़ी केंद्र भी बंद हैं।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी वहाँ के बाज़ार तक पहुँच गया है। गोदावरी गुफाओं को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। पन्ना में भी इसी तरह के एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मध्य प्रदेश में २५ अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहेगा। पूर्वी हिस्से में भारी बारिश की संभावना अधिक बताई गई है, जिसके बाद बारिश धीरे-धीरे मध्य और पश्चिम-मध्य क्षेत्रों में भी सक्रिय होगी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और आसपास बना कम दबाव का क्षेत्र तथा मॉनसून ट्रफ इस स्थिति के लिए ज़िम्मेदार हैं।
वर्षा के आँकड़े
आँकड़ों के अनुसार, इस मौसम में मध्य प्रदेश में अब तक ५९९ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत ६७५.१ मिलीमीटर है — यानी कुल ११ प्रतिशत की कमी है। पूर्वी मध्य प्रदेश में ११ प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में १२ प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वी जिलों में स्थानीय तीव्र वर्षा ने औसत में कमी के बावजूद बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है।
आगे की स्थिति
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पूर्वी जिले हर मॉनसून सीज़न में बाढ़ की चपेट में आते हैं, और नर्मदा व मंदाकिनी नदियों का जलग्रहण क्षेत्र व्यापक होने से स्थिति तेज़ी से बिगड़ सकती है। २५ अगस्त तक भारी बारिश का पूर्वानुमान देखते हुए प्रशासन ने सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है।