क्या बांग्लादेशी रोहिंग्या नेटवर्क की कट्टरपंथी हिंसा में बढ़ोतरी हो रही है? किरीट सोमैया
सारांश
Key Takeaways
- किरीट सोमैया ने कट्टरपंथी हिंसा में बढ़ोतरी का आरोप लगाया।
- बांग्लादेशी रोहिंग्या मुसलमानों की भूमिका सामने आई है।
- अवैध निर्माण को लैंड जिहाद करार दिया गया है।
- कोल्हापुर में धार्मिक स्थलों का मुद्दा उठाया गया।
- पुलिस अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप हैं।
मुंबई, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया ने कट्टरपंथी गतिविधियों, अवैध घुसपैठ और पुलिस-गठजोड़ के संबंध में गंभीर आरोप लगाए हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मंगलवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि देश में कट्टरपंथी हिंसा लगातार बढ़ रही है, जिसमें विशेष रूप से बांग्लादेशी रोहिंग्या मुसलमानों की भूमिका सामने आ रही है।
किरीट सोमैया ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में मुसलमानों द्वारा मंदिरों के भीतर पूजा करने की घटनाएं चिंताजनक हैं, जो सामाजिक और धार्मिक सौहार्द के लिए एक चिंता का विषय है। उन्होंने उल्लेख किया कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित ऐतिहासिक पन्हालागढ़ किला में भी इसी तरह की घटना सामने आई है। इस मामले को गंभीर बताते हुए उन्होंने कोल्हापुर के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है।
भाजपा के नेता ने आगे कहा कि यह केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी गिरोहों और कुछ स्थानीय तत्वों के बीच गठजोड़ उजागर हो रहा है। किरीट सोमैया के अनुसार, बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किए जा रहे हैं और इसे उन्होंने लैंड जिहाद कहा।
मुंबई के चेंबूर इलाके का उल्लेख करते हुए, किरीट सोमैया ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि आरसीएफ पुलिस स्टेशन के चार पुलिस अधिकारियों ने एक बांग्लादेशी गैंग के साथ मिलीभगत कर लाखों रुपए का सोना और नकदी लेकर आरोपियों को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में एक गहरी साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जो कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सोमैया ने बताया कि वह स्वयं इस मामले को लेकर सख्त रुख अपनाने जा रहे हैं और आरसीएफ पुलिस स्टेशन पहुंचेंगे।
भाजपा नेता ने आगे कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए।