8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

लद्दाख उप-समिति बैठक में बड़ा ब्रेकथ्रू, आर्टिकल 371 आधारित लद्दाख-स्पेसिफिक प्रावधान का प्रस्ताव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
लद्दाख उप-समिति बैठक में बड़ा ब्रेकथ्रू, आर्टिकल 371 आधारित लद्दाख-स्पेसिफिक प्रावधान का प्रस्ताव

सारांश

लद्दाख के मुद्दों पर वर्षों की गतिरोध के बाद उप-समिति की बैठक में पहली बार सभी पक्षों के बीच मूलभूत सिद्धांतों पर सहमति बनी। आर्टिकल 371 को लद्दाख के अनुकूल बनाने का प्रस्ताव सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू रहा। जल्द एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार होगा।

मुख्य बातें

BJP नेता ताशी ग्यालसन ने 22 मई 2026 को हुई लद्दाख उप-समिति बैठक को 'सार्थक और परिणाम-उन्मुख' बताया।
बैठक में पहली बार सभी पक्षों के बीच कुछ मूलभूत सिद्धांतों पर सहमति बनी।
संविधान के अनुच्छेद 371 को लद्दाख के संदर्भ में अनुकूलित कर लद्दाख-स्पेसिफिक प्रावधान देने का प्रस्ताव रखा गया।
बैठक में वित्तीय व्यवहार्यता और सस्टेनेबल विकास मॉडल पर विस्तृत मंथन हुआ।
आने वाले दिनों में सहमति बिंदुओं के आधार पर एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।

लद्दाख के विभिन्न मुद्दों पर बुलाई गई उप-समिति की बैठक को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता ताशी ग्यालसन ने 'अत्यंत सार्थक और परिणाम-उन्मुख' बताया। नई दिल्ली में 22 मई 2026 को आयोजित इस बैठक में पहली बार सभी पक्षों के बीच कुछ मूलभूत सिद्धांतों पर सहमति बनी, जो पिछले कई वर्षों की गतिरोध की स्थिति के बाद एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बैठक में क्या हुआ

ताशी ग्यालसन ने शनिवार को एक विशेष बातचीत में बताया कि बैठक का केंद्रीय प्रश्न यह था कि लद्दाख को किस प्रकार का संरक्षण और समाधान दिया जाए, जो वहाँ की परिस्थितियों और जनता के हितों के पूरी तरह अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार के समक्ष कई प्रस्ताव रखे गए और प्रत्येक पहलू पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि कुछ प्रस्ताव लद्दाख के हित में व्यावहारिक नहीं हो सकते। इसी कारण सभी प्रस्तावों के पक्ष और विपक्ष पर गंभीर मंथन किया गया।

सस्टेनेबल मॉडल पर जोर

बैठक में वित्तीय व्यवहार्यता, सीमावर्ती क्षेत्र होने के नाते लद्दाख को स्थिर बनाए रखने और वहाँ के लिए एक सस्टेनेबल विकास मॉडल तैयार करने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। ग्यालसन ने कहा कि प्राथमिकता यह रही कि लद्दाख की जनता पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और वे अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कर सकें।

आर्टिकल 371 का लद्दाख-अनुकूल प्रावधान

बैठक में सबसे उल्लेखनीय प्रस्ताव यह रखा गया कि संविधान के अनुच्छेद 371 को लद्दाख के संदर्भ में अनुकूलित कर एक लद्दाख-स्पेसिफिक प्रावधान तैयार किया जाए। यह प्रावधान क्षेत्र की भौगोलिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए स्थानीय जनता की आवश्यकताओं के अनुसार समाधान सुनिश्चित करेगा।

गौरतलब है कि अनुच्छेद 371 पहले से ही कई पूर्वोत्तर राज्यों और अन्य विशेष क्षेत्रों को विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। लद्दाख के संदर्भ में इसे अनुकूलित करने का प्रस्ताव नया और महत्त्वपूर्ण है।

आगे की राह

ग्यालसन ने बताया कि आने वाले दिनों में सहमति बिंदुओं के आधार पर एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, विधानसभा और संवैधानिक सुरक्षा की माँग लगातार उठती रही है। इस ब्रेकथ्रू को क्षेत्र की दीर्घकालीन राजनीतिक माँगों की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह विधानसभा और पूर्ण राज्य की माँग का विकल्प नहीं है। जब तक ड्राफ्ट सार्वजनिक नहीं होता और संसद में पेश नहीं होता, 'ब्रेकथ्रू' शब्द समयपूर्व है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लद्दाख उप-समिति की बैठक में क्या निर्णय हुआ?
बैठक में सभी पक्षों के बीच कुछ मूलभूत सिद्धांतों पर सहमति बनी और आर्टिकल 371 को लद्दाख के संदर्भ में अनुकूलित कर लद्दाख-स्पेसिफिक प्रावधान देने का प्रस्ताव रखा गया। आने वाले दिनों में एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।
आर्टिकल 371 को लद्दाख पर क्यों लागू करने की बात हो रही है?
अनुच्छेद 371 पहले से ही कई पूर्वोत्तर राज्यों को विशेष संवैधानिक सुरक्षा देता है। लद्दाख की भौगोलिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक विशेषताओं को देखते हुए इसे वहाँ के अनुकूल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि स्थानीय जनता के हितों की रक्षा हो सके।
ताशी ग्यालसन कौन हैं और लद्दाख मुद्दे पर उनकी भूमिका क्या है?
ताशी ग्यालसन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लद्दाख से जुड़े नेता हैं। वे लद्दाख के मुद्दों पर केंद्र सरकार और स्थानीय हितधारकों के बीच संवाद में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
लद्दाख के लिए सस्टेनेबल मॉडल का क्या अर्थ है?
बैठक में सस्टेनेबल मॉडल से तात्पर्य एक ऐसी विकास व्यवस्था से था जो लद्दाख की वित्तीय व्यवहार्यता, सीमावर्ती क्षेत्र की स्थिरता और स्थानीय जनता पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना विकास सुनिश्चित करे।
2019 के बाद से लद्दाख की मुख्य माँगें क्या रही हैं?
2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद से लद्दाख पूर्ण राज्य का दर्जा, अपनी विधानसभा और संवैधानिक सुरक्षा की माँग करता आया है। इन माँगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले