लद्दाख उप-समिति बैठक में बड़ा ब्रेकथ्रू, आर्टिकल 371 आधारित लद्दाख-स्पेसिफिक प्रावधान का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
लद्दाख के विभिन्न मुद्दों पर बुलाई गई उप-समिति की बैठक को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता ताशी ग्यालसन ने 'अत्यंत सार्थक और परिणाम-उन्मुख' बताया। नई दिल्ली में 22 मई 2026 को आयोजित इस बैठक में पहली बार सभी पक्षों के बीच कुछ मूलभूत सिद्धांतों पर सहमति बनी, जो पिछले कई वर्षों की गतिरोध की स्थिति के बाद एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बैठक में क्या हुआ
ताशी ग्यालसन ने शनिवार को एक विशेष बातचीत में बताया कि बैठक का केंद्रीय प्रश्न यह था कि लद्दाख को किस प्रकार का संरक्षण और समाधान दिया जाए, जो वहाँ की परिस्थितियों और जनता के हितों के पूरी तरह अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार के समक्ष कई प्रस्ताव रखे गए और प्रत्येक पहलू पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि कुछ प्रस्ताव लद्दाख के हित में व्यावहारिक नहीं हो सकते। इसी कारण सभी प्रस्तावों के पक्ष और विपक्ष पर गंभीर मंथन किया गया।
सस्टेनेबल मॉडल पर जोर
बैठक में वित्तीय व्यवहार्यता, सीमावर्ती क्षेत्र होने के नाते लद्दाख को स्थिर बनाए रखने और वहाँ के लिए एक सस्टेनेबल विकास मॉडल तैयार करने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। ग्यालसन ने कहा कि प्राथमिकता यह रही कि लद्दाख की जनता पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और वे अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कर सकें।
आर्टिकल 371 का लद्दाख-अनुकूल प्रावधान
बैठक में सबसे उल्लेखनीय प्रस्ताव यह रखा गया कि संविधान के अनुच्छेद 371 को लद्दाख के संदर्भ में अनुकूलित कर एक लद्दाख-स्पेसिफिक प्रावधान तैयार किया जाए। यह प्रावधान क्षेत्र की भौगोलिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए स्थानीय जनता की आवश्यकताओं के अनुसार समाधान सुनिश्चित करेगा।
गौरतलब है कि अनुच्छेद 371 पहले से ही कई पूर्वोत्तर राज्यों और अन्य विशेष क्षेत्रों को विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। लद्दाख के संदर्भ में इसे अनुकूलित करने का प्रस्ताव नया और महत्त्वपूर्ण है।
आगे की राह
ग्यालसन ने बताया कि आने वाले दिनों में सहमति बिंदुओं के आधार पर एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, विधानसभा और संवैधानिक सुरक्षा की माँग लगातार उठती रही है। इस ब्रेकथ्रू को क्षेत्र की दीर्घकालीन राजनीतिक माँगों की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।