लालू-राबड़ी की सुरक्षा कटौती पर राजद का अल्टीमेटम: 48 घंटे में बहाल करो, वरना कार्यकर्ता डटे रहेंगे
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की सरकारी सुरक्षा में की गई कटौती को लेकर पटना में राजनीतिक तनाव तेज़ हो गया है। विरोध के तौर पर शनिवार, 7 जून को राबड़ी देवी और उनके पुत्र तेजस्वी यादव ने अपने सरकारी आवास पर तैनात सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेज दिया। इस कदम के बाद राजद कार्यकर्ता बड़ी संख्या में राबड़ी देवी के आवास के बाहर जमा हो गए और सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया।
मुख्य घटनाक्रम
राजद कार्यकर्ताओं ने साफ़ कहा है कि जब तक बिहार सरकार लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था पूर्ववत बहाल नहीं करती, वे स्वयं अपने नेताओं का सुरक्षा कवच बने रहेंगे। कार्यकर्ताओं का दावा है कि वे पिछले दिन से लगातार आवास के बाहर मौजूद हैं और 24 घंटे पहरा देने के लिए तैयार हैं।
राजद कार्यकर्ता नरेंद्र कुमार ने कहा, 'जब तक यह सरकार हमारे नेता को पहले की तरह सुरक्षा नहीं दे देती, तब तक हम उनके सुरक्षा कवच के रूप में यहाँ मौजूद रहेंगे। हम कल से यहाँ हैं और 24 घंटे सुरक्षा देने के लिए तैयार हैं।'
कार्यकर्ताओं की माँग और चेतावनी
राजद समर्थक धनंजय कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि जब तक नेता को वापस सुरक्षा देने पर फ़ैसला नहीं होता, वे आवास के बाहर डटे रहेंगे और पहले जो सुरक्षा व्यवस्था लागू थी, उसे बहाल किया जाना चाहिए।
राजद कार्यकर्ता राजेश कुमार यादव ने सरकार के फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, 'यह पहली बार है कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है। राजद का कोई भी कार्यकर्ता इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।' उन्होंने आगाह किया कि यदि 48 घंटे में सुरक्षा बहाल नहीं हुई तो राज्य के विभिन्न हिस्सों से कार्यकर्ता पहुँचकर नेताओं की सुरक्षा सँभालेंगे। एक अन्य समर्थक नीतीश कुमार ने भी कहा कि सुरक्षा बहाल होनी ही चाहिए।
राजनीतिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप
सुरक्षा कटौती के फ़ैसले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राजद इस मुद्दे को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देख रही है। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं और सत्तारूढ़ गठबंधन तथा राजद के बीच तनाव पहले से ही बना हुआ है।
आम जनता और विपक्ष पर असर
आलोचकों का कहना है कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा में कटौती एक असामान्य कदम है, जो राज्य में विपक्षी नेताओं के प्रति सरकार के रवैये पर सवाल खड़े करता है। राजद ने इस मुद्दे पर राज्यव्यापी विरोध की रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है।
आगे क्या होगा
राजद कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद अब सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़रें टिकी हैं। यदि इस अवधि में सुरक्षा बहाल नहीं हुई तो राज्य भर से राजद कार्यकर्ताओं के पटना पहुँचने और विरोध तेज़ होने की संभावना है।