लता मंगेशकर और PM मोदी का वह भाई-बहन जैसा रिश्ता, और 2014 में लिखी चिट्ठी जिसके साथ आई मंगल-मूर्ति
सारांश
मुख्य बातें
'स्वर साम्राज्ञी' लता मंगेशकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच का रिश्ता महज़ एक नेता और एक कलाकार का औपचारिक संबंध नहीं था — यह एक ऐसा पारिवारिक बंधन था जो 2013 में पुणे के एक अस्पताल-उद्घाटन से शुरू होकर लता दीदी की अंतिम साँस तक बना रहा। 6 फरवरी 2022 को दुनिया से विदा लेने तक लता मंगेशकर मोदी को 'नरेंद्र भाई' पुकारती रहीं, और उन्हें हर रक्षाबंधन पर राखी भेजती रहीं।
मुलाकात जिसने रिश्ते की नींव रखी
2013 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्हें पुणे में दीनानाथ मंगेशकर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया। लता मंगेशकर ने उस मुलाकात को 'मंगल-मूर्ति' पुस्तक 'मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी' की प्रस्तावना में विस्तार से याद किया है।
उन्होंने लिखा था: 'बहुत सहजता से हमारे बीच भाई-बहन का सच्चा रिश्ता बन गया और यह हमारे रिश्ते के हर पल में झलकता है। मैं हमारे इस रिश्ते को बहुत महत्व देती हूं और हमेशा देती रहूंगी।' उसी कार्यक्रम में उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की थी कि वे नरेंद्र भाई को प्रधानमंत्री के रूप में देखें।
वह ऐतिहासिक चिट्ठी और मंगल-मूर्ति का उपहार
2014 में जब नरेंद्र मोदी भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले थे, तब लता मंगेशकर स्वास्थ्य कारणों से शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हो सकीं। उन्होंने एक हस्तलिखित पत्र भेजा, जिसके साथ 'श्री मंगलमूर्ति' की एक मूर्ति उपहार के रूप में भेजी।
उस पत्र में उन्होंने लिखा था: 'आदरणीय नरेंद्रभाई, सस्नेह नमस्कार। आपका निमंत्रण मिलने के बाद भी मेरी तबीयत ठीक नहीं होने के कारण आपको न कहते हुए बहुत दुख हो रहा है। पूरे देश ने आपका जो भव्य स्वागत किया है, वो अवर्णनीय है। हमारी मातृभूमि की बागडोर, आप जैसे महान व्यक्ति के पवित्र हाथों में जनता ने सौंपी है। इस मंगल अवसर पर श्री मंगलमूर्ती आपको भेंट कर रही हूं।'
बाद में उसी कार्यक्रम के दौरान मोदी ने उस चिट्ठी का ज़िक्र करते हुए उसे 'अपने जीवन के सबसे बड़े उपहारों में से एक' बताया।
लता दीदी की नज़र में 'नरेंद्र भाई'
पुस्तक 'मोदी@20' की प्रस्तावना में लता मंगेशकर ने लिखा कि उन्होंने मोदी को एक परंपरागत राजनेता के रूप में नहीं देखा। उनके शब्दों में: 'स्वभाव से, नरेंद्र भाई ऐसे राजनेता नहीं हैं जिनकी हम आम तौर पर कल्पना करते हैं। उनसे हुई कई बातचीत से मुझे यह एहसास हुआ कि उनके मकसद अलग हैं। उन्हें सत्ता का कोई मोह नहीं है। उनका लक्ष्य बड़ा है — भारत के लोगों के लिए कुछ कर पाना।'
उन्होंने यह भी कहा था: 'नीयत और काम में ऐसा भरोसा ही एक नेता को दूसरों से अलग बनाता है। देश के हर हिस्से में लोग उन्हें परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं।'
राजनीतिक सफर और पारिवारिक जुड़ाव
28 सितंबर 1929 को इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर ने 1940 के दशक में अपना करियर शुरू किया और 36 से अधिक भाषाओं में हज़ारों गाने गाए। 2001 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के समर्थन से वे नवंबर 1999 में राज्यसभा के लिए चुनी गईं और 2005 तक वहाँ रहीं।
जनवरी 2014 में मोदी ने उनके सुप्रसिद्ध गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की 51वीं वर्षगांठ पर उन्हें सम्मानित किया और बताया कि इस गीत ने 1962 के शहीदों के बलिदान को भारतीयों के दिलों में अमर रखा।
गौरतलब है कि 2019 में एक विदेश यात्रा पर रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने लता मंगेशकर को फोन कर जन्मदिन की बधाई दी। उस भावुक बातचीत में लता दीदी ने कहा था: 'आप खुद नहीं जानते कि आप क्या हैं। मुझे पता है कि आपके आने के बाद भारत की तस्वीर बदलने लगी है, जिससे मुझे बहुत खुशी होती है।' उसी बातचीत में उन्होंने पारिवारिक अंदाज़ में पूछा था कि मोदी विदेश यात्रा से कब लौटेंगे।
जीवन के अंतिम वर्षों में भी बनी रही सक्रियता
लता मंगेशकर सक्रिय राजनीति से दूर रहीं, लेकिन अपने जीवन के अंतिम वर्षों में कई मौकों पर उन्होंने खुलकर अपनी राय रखी। अगस्त 2020 में राम मंदिर के भूमि पूजन के अवसर पर उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसन्नता व्यक्त की। 2021 में किसान आंदोलन के दौरान जब विदेशी गायिका रिहाना ने भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी की, तब लता दीदी ने उसका जवाब दिया।
6 फरवरी 2022 को भारत की कोकिला ने इस दुनिया को अलविदा कहा। उनकी आवाज़ और उनके रिश्ते — दोनों — आज भी अमर हैं।