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एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को ₹153.58 करोड़ का कस्टम ड्यूटी नोटिस, DRI जांच के बाद कार्रवाई

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एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को ₹153.58 करोड़ का कस्टम ड्यूटी नोटिस, DRI जांच के बाद कार्रवाई

सारांश

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को DRI जांच के बाद ₹153.58 करोड़ का कस्टम ड्यूटी नोटिस मिला है — आयातित सामान की मूल्यांकन में रॉयल्टी न जोड़ने का आरोप है। इसके साथ ही OLED स्क्रीन पर रियायती ड्यूटी के गलत दावों की जांच भी जारी है, जिसमें सैमसंग भी शामिल है।

मुख्य बातें

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड को 22 सितंबर 2026 को ₹153.58 करोड़ की कस्टम ड्यूटी वसूली का 'कारण बताओ नोटिस' जारी हुआ, जो कंपनी को 24 सितंबर को प्राप्त हुआ।
नोटिस न्हावा शेवा पोर्ट के कस्टम्स कमिश्नर कार्यालय से जारी हुआ; आरोप — आयात मूल्यांकन में रॉयल्टी पेमेंट न जोड़ना।
DRI की अलग जांच में एलजी और सैमसंग दोनों पर OLED ग्लास स्क्रीन पर 5% की जगह 15% ड्यूटी लागू होने का कथित आरोप।
एलजी ने OLED मामले में अधिकारियों के सवालों का जवाब दिया और अनुमानित ड्यूटी अंतर स्वेच्छा से जमा किया।
कंपनी ने Q1 FY2027 में 27.2% की वृद्धि के साथ ₹653 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया; आय ₹7,233 करोड़ रही।

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड को डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की जांच के बाद कस्टम अधिकारियों की ओर से ₹153.58 करोड़ की कस्टम ड्यूटी वसूली के लिए 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया गया है। 22 सितंबर 2026 की तारीख वाला यह नोटिस नवी मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट स्थित कस्टम्स कमिश्नर कार्यालय से भेजा गया, जो कंपनी को 24 सितंबर 2026 को प्राप्त हुआ। यह जानकारी कंपनी की ओर से स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से सार्वजनिक की गई है।

नोटिस का मुख्य आरोप

अधिकारियों के अनुसार, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया पर आरोप है कि कंपनी ने कुछ आयातित सामानों की मूल्यांकन योग्य मूल्य — जिसमें मूल कीमत, बीमा और भाड़ा शामिल होता है — की गणना करते समय रॉयल्टी पेमेंट को सम्मिलित नहीं किया। कस्टम मूल्यांकन नियमों के तहत आयात की वास्तविक लागत में ऐसे भुगतानों को जोड़ना अनिवार्य माना जाता है। DRI की जांच में यही चूक पकड़े जाने के बाद यह नोटिस जारी किया गया है।

OLED स्क्रीन आयात पर अलग जांच

इसके अतिरिक्त, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स और उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी सैमसंग पर आयातित OLED ग्लास स्क्रीन पर 5 प्रतिशत की रियायती कस्टम ड्यूटी के कथित गलत दावों को लेकर एक अलग जांच भी जारी है। DRI का कथित तौर पर मानना है कि यह रियायती दर केवल पुराने LCD और LED पैनल के लिए है, न कि प्रीमियम OLED पार्ट्स के लिए।

रिपोर्टों के अनुसार, DRI का मत है कि OLED आयात पर सैमसंग और एलजी दोनों को 15 प्रतिशत की दर से कस्टम ड्यूटी अदा करनी चाहिए थी। हालांकि, एलजी ने इस मामले में अधिकारियों के लिखित सवालों के जवाब पहले ही भेज दिए हैं और अधिकारियों के अनुमान के अनुसार कस्टम ड्यूटी के अंतर की राशि स्वेच्छा से जमा कर दी है — जो कि सहयोगात्मक रुख का संकेत है।

कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन

नोटिस मिलने के बावजूद एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का वित्तीय प्रदर्शन मज़बूत बना हुआ है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर 27.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹653 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो वित्त वर्ष 2025-26 की इसी तिमाही में ₹513 करोड़ था। गर्मियों में मजबूत उपभोक्ता माँग और प्रीमियम उत्पादों की बिक्री में उछाल को इस बढ़त का श्रेय दिया गया है।

तिमाही आय भी 15.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹7,233 करोड़ रही, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह ₹6,262 करोड़ थी। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि नियामकीय दबाव के बीच भी कंपनी का परिचालन मोर्चा मज़बूत है।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार आयात मूल्यांकन और कस्टम वर्गीकरण के मामलों में बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की जांच बढ़ा रही है। गौरतलब है कि कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में OLED पैनल आयात की बढ़ती मात्रा के साथ ड्यूटी वर्गीकरण विवाद नए नहीं हैं, लेकिन DRI की सक्रिय जांच इस क्षेत्र पर बढ़ती निगरानी को दर्शाती है। कंपनी को अब नोटिस का जवाब देना होगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कानूनी लड़ाई से बचने की रणनीति दर्शाता है — लेकिन इससे सैमसंग सहित अन्य कंपनियों पर दबाव और बढ़ेगा। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है, वह यह है कि यह मामला 'मेक इन इंडिया' नीति और आयात निर्भरता के बीच की उस खाई को उजागर करता है जहाँ प्रीमियम कंपोनेंट अभी भी बड़े पैमाने पर विदेश से आते हैं।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को कस्टम ड्यूटी नोटिस क्यों मिला?
डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की जांच में पाया गया कि एलजी ने कुछ आयातित सामानों की मूल्यांकन योग्य कीमत में रॉयल्टी पेमेंट को शामिल नहीं किया था, जिससे कस्टम ड्यूटी कम बनती थी। इस आधार पर न्हावा शेवा पोर्ट के कस्टम्स कमिश्नर ने ₹153.58 करोड़ की वसूली के लिए 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया।
OLED स्क्रीन आयात पर एलजी और सैमसंग की जांच किस बात को लेकर है?
DRI का कथित मत है कि OLED ग्लास स्क्रीन पर 5% की रियायती कस्टम ड्यूटी लागू नहीं होती — यह दर केवल पुराने LCD और LED पैनल के लिए है। अधिकारियों के अनुसार एलजी और सैमसंग दोनों को OLED आयात पर 15% की दर से ड्यूटी देनी चाहिए थी।
क्या एलजी ने DRI के सामने सहयोग किया है?
हाँ, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने OLED आयात मामले में अधिकारियों के लिखित सवालों का जवाब दे दिया है और अनुमानित कस्टम ड्यूटी के अंतर की राशि स्वेच्छा से जमा कर दी है। यह सहयोगात्मक रुख कंपनी की कानूनी जोखिम को सीमित करने की कोशिश दर्शाता है।
₹153.58 करोड़ के नोटिस का एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के कारोबार पर कितना असर पड़ेगा?
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹653 करोड़ और आय ₹7,233 करोड़ रही, इसलिए नोटिस की राशि तत्काल कारोबार के लिए बड़ा झटका नहीं है। हालाँकि, अगर कानूनी प्रक्रिया लंबी चली या OLED मामले में बड़ी देनदारी तय हुई, तो भविष्य में वित्तीय असर संभव है।
यह मामला भारत में उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
OLED पैनल पर ड्यूटी वर्गीकरण का यह मामला पूरे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए एक नज़ीर बन सकता है। अगर DRI का रुख कायम रहता है, तो प्रीमियम डिस्प्ले तकनीक आयात करने वाली अन्य कंपनियों को भी पुनर्मूल्यांकन और बढ़ी हुई ड्यूटी देनदारी का सामना करना पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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