एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया को ₹153.58 करोड़ का कस्टम ड्यूटी नोटिस, DRI जांच के बाद कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड को डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की जांच के बाद कस्टम अधिकारियों की ओर से ₹153.58 करोड़ की कस्टम ड्यूटी वसूली के लिए 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया गया है। 22 सितंबर 2026 की तारीख वाला यह नोटिस नवी मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट स्थित कस्टम्स कमिश्नर कार्यालय से भेजा गया, जो कंपनी को 24 सितंबर 2026 को प्राप्त हुआ। यह जानकारी कंपनी की ओर से स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से सार्वजनिक की गई है।
नोटिस का मुख्य आरोप
अधिकारियों के अनुसार, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया पर आरोप है कि कंपनी ने कुछ आयातित सामानों की मूल्यांकन योग्य मूल्य — जिसमें मूल कीमत, बीमा और भाड़ा शामिल होता है — की गणना करते समय रॉयल्टी पेमेंट को सम्मिलित नहीं किया। कस्टम मूल्यांकन नियमों के तहत आयात की वास्तविक लागत में ऐसे भुगतानों को जोड़ना अनिवार्य माना जाता है। DRI की जांच में यही चूक पकड़े जाने के बाद यह नोटिस जारी किया गया है।
OLED स्क्रीन आयात पर अलग जांच
इसके अतिरिक्त, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स और उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी सैमसंग पर आयातित OLED ग्लास स्क्रीन पर 5 प्रतिशत की रियायती कस्टम ड्यूटी के कथित गलत दावों को लेकर एक अलग जांच भी जारी है। DRI का कथित तौर पर मानना है कि यह रियायती दर केवल पुराने LCD और LED पैनल के लिए है, न कि प्रीमियम OLED पार्ट्स के लिए।
रिपोर्टों के अनुसार, DRI का मत है कि OLED आयात पर सैमसंग और एलजी दोनों को 15 प्रतिशत की दर से कस्टम ड्यूटी अदा करनी चाहिए थी। हालांकि, एलजी ने इस मामले में अधिकारियों के लिखित सवालों के जवाब पहले ही भेज दिए हैं और अधिकारियों के अनुमान के अनुसार कस्टम ड्यूटी के अंतर की राशि स्वेच्छा से जमा कर दी है — जो कि सहयोगात्मक रुख का संकेत है।
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन
नोटिस मिलने के बावजूद एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का वित्तीय प्रदर्शन मज़बूत बना हुआ है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर 27.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹653 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो वित्त वर्ष 2025-26 की इसी तिमाही में ₹513 करोड़ था। गर्मियों में मजबूत उपभोक्ता माँग और प्रीमियम उत्पादों की बिक्री में उछाल को इस बढ़त का श्रेय दिया गया है।
तिमाही आय भी 15.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹7,233 करोड़ रही, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह ₹6,262 करोड़ थी। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि नियामकीय दबाव के बीच भी कंपनी का परिचालन मोर्चा मज़बूत है।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार आयात मूल्यांकन और कस्टम वर्गीकरण के मामलों में बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की जांच बढ़ा रही है। गौरतलब है कि कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में OLED पैनल आयात की बढ़ती मात्रा के साथ ड्यूटी वर्गीकरण विवाद नए नहीं हैं, लेकिन DRI की सक्रिय जांच इस क्षेत्र पर बढ़ती निगरानी को दर्शाती है। कंपनी को अब नोटिस का जवाब देना होगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है।