31 जुलाई 2026
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लोकसभा में जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पास, विपक्ष के हंगामे के बाद सदन सोमवार तक स्थगित

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लोकसभा में जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पास, विपक्ष के हंगामे के बाद सदन सोमवार तक स्थगित

सारांश

विपक्ष के शोर-शराबे के बीच लोकसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया। नए प्रावधान के तहत एक से दो साल की देरी से दर्ज जन्म-मृत्यु के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य होगी। हंगामा न थमने पर सदन सोमवार तक स्थगित।

मुख्य बातें

जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को लोकसभा ने 31 जुलाई 2026 को ध्वनि मत से पारित किया।
विधेयक गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा प्रस्तुत किया गया; बिना विस्तृत चर्चा के कुछ मिनटों में पास हुआ।
नए प्रावधान के अनुसार, घटना के एक वर्ष बाद और दो वर्ष के भीतर विलंबित पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट या एसडीएम की अनुमति अनिवार्य होगी।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष की निंदा की; पीठासीन दिलीप सैकिया ने सहयोग की अपील की।
हंगामा न रुकने पर लोकसभा की कार्यवाही सोमवार, 4 अगस्त की सुबह 11 बजे तक स्थगित।

लोकसभा ने 31 जुलाई 2026 को विपक्ष के लगातार शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा प्रस्तुत यह विधेयक बिना किसी विस्तृत चर्चा के कुछ ही मिनटों में पास हो गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही सोमवार, 4 अगस्त की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

विधेयक में क्या है

यह विधेयक जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करता है। नए प्रावधान के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या उनके द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति से ही संभव होगा।

सरकार का कहना है कि विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को सख्त बनाने और जन्म-मृत्यु की समय पर रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिए ये संशोधन आवश्यक थे। इससे देश में नागरिक डेटा की सटीकता और पारदर्शिता बढ़ेगी।

सदन में हंगामे का माहौल

दोपहर 12 बजे जब सदन की कार्यवाही पुनः आरंभ हुई, तो विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे। इसी बीच गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन की सहमति माँगी और विधेयक को पारित करा लिया गया — बिना किसी व्यापक विधायी बहस के।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष की कड़ी निंदा करते हुए कहा, 'लोगों ने आपको महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर चर्चा-विचार-विमर्श करने और कानून बनाने के लिए संसद भेजा है। आप कानून पर चर्चा में शामिल नहीं होते और फिर जनता के बीच जाकर दावा करते हैं कि सरकार सदन में जबरदस्ती विधेयक पारित करवा रही है।' उन्होंने जोड़ा, 'यह सही नहीं है, आपको चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।'

पीठासीन अधिकारी की अपील और स्थगन

पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने विपक्षी सदस्यों को याद दिलाया कि बैठक में उन्होंने इस विधेयक को समर्थन दिया था, लेकिन सदन में सहयोग न मिलने के कारण बिल बिना चर्चा के पारित करना पड़ा। उन्होंने सदस्यों से बार-बार अनुरोध किया कि सदन को सुचारु रूप से चलने दें।

हंगामा न थमने पर दिलीप सैकिया ने लोकसभा की कार्यवाही सोमवार, 4 अगस्त की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।

आम जनता पर असर

नए संशोधन से उन लाखों नागरिकों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा जो ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में रहते हैं और अक्सर जन्म-मृत्यु का पंजीकरण देरी से करवाते हैं। अब इस प्रक्रिया में अतिरिक्त प्रशासनिक अनुमोदन अनिवार्य होगा, जिससे समय पर पंजीकरण की आदत को बल मिलेगा। सरकार का तर्क है कि इससे जनसंख्या डेटाबेस अधिक विश्वसनीय बनेगा।

आगे क्या होगा

लोकसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा। वहाँ से मंजूरी मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। विपक्ष के रुख को देखते हुए राज्यसभा में भी इस पर बहस तीखी हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सदन में हंगामा किया — यह विरोधाभास बताता है कि व्यवधान अब विधायी असहमति कम और राजनीतिक प्रदर्शन अधिक है। दूसरी ओर, 1969 के पुराने कानून में यह संशोधन वास्तव में ज़रूरी था — विलंबित पंजीकरण की खामियाँ अक्सर फर्जी दस्तावेज़ीकरण में इस्तेमाल होती रही हैं। असली सवाल यह है कि मजिस्ट्रेट-स्तरीय अनुमोदन की नई शर्त ग्रामीण और वंचित तबकों के लिए बाधा बनेगी या सुधार — और इस पर संसद में कोई चर्चा नहीं हुई।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करता है। इसके तहत घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर किए जाने वाले विलंबित पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट या एसडीएम की अनुमति अनिवार्य की गई है।
यह विधेयक लोकसभा में कब और कैसे पारित हुआ?
31 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजे के बाद गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पेश किया और विपक्ष के हंगामे के बीच इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। बिना किसी विस्तृत विधायी बहस के यह कुछ ही मिनटों में पास हो गया।
विधेयक का आम नागरिकों पर क्या असर होगा?
जो नागरिक किसी कारण से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण समय पर नहीं करवा पाते, उन्हें अब एक से दो साल की देरी होने पर मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी होगी। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लोगों को अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है।
लोकसभा की कार्यवाही क्यों स्थगित हुई?
विपक्षी सदस्यों का हंगामा और नारेबाजी न रुकने के बाद पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने सदन की कार्यवाही सोमवार, 4 अगस्त की सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से चर्चा में भाग लेने की अपील की थी, लेकिन हंगामा जारी रहा।
अब यह विधेयक कहाँ जाएगा?
लोकसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा। वहाँ से स्वीकृति मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून का रूप लेगा।
राष्ट्र प्रेस
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