MSME विकास संशोधन विधेयक 2026 राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित, विपक्ष के हंगामे के बीच मांझी ने पेश किया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा पेश किया गया सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक 2026 सोमवार, 3 अगस्त 2026 को राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया। संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के जोरदार हंगामे और नारेबाजी के बीच यह विधेयक पारित हुआ, जिसके तुरंत बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सदन में हंगामे का माहौल
सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही सुबह से ही अशांत रही। विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग के मुद्दे को लेकर जोरदार नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोपहर में सदन की बैठक दोबारा शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा, फिर भी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 में संशोधन पर चर्चा प्रारंभ हुई।
शोर-शराबे के बीच कई सांसदों ने विधेयक पर अपने विचार रखे, जबकि विपक्षी सांसद इस दौरान भी नारेबाजी करते रहे। चर्चा के उपरांत विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
अजय माकन की आपत्ति और संसदीय विवाद
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद अजय माकन ने विपक्ष के नेता को बोलने का अवसर न दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। माकन ने कहा कि वे दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष, 10 वर्षों तक लोकसभा सदस्य और राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी जहाँ विपक्ष के नेता को सदन में अपनी बात रखने की अनुमति न मिले।
माकन ने यह भी आरोप लगाया कि देश में दो अलग-अलग व्यवस्थाएँ चल रही हैं — एक बड़े कॉरपोरेट घरानों के लिए और दूसरी एमएसएमई के लिए। उन्होंने तर्क दिया कि विधेयक पर चर्चा का सीधा संबंध देश के युवाओं और छात्रों से है, इसलिए विपक्ष के नेता को छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाने का अवसर मिलना चाहिए।
उपसभापति और नेता सदन की प्रतिक्रिया
उपसभापति हरिवंश ने कई बार माकन से केवल विधेयक से संबंधित विषय पर बोलने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार यदि कोई सदस्य विधेयक के विषय पर नहीं बोलता, तो अगले सदस्य को अवसर देना अनिवार्य हो जाता है।
नेता सदन जेपी नड्डा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि माकन ने विधेयक पर एक भी वाक्य नहीं बोला और उनके असंबंधित वक्तव्यों को सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सदन में विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन विधेयक पर बोलने की अनुमति लेकर माइक पर आकर नियमों की अनदेखी करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। रिजिजू ने आरोप लगाया कि माकन ने अपने आचरण से सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाई।
विधेयक का महत्व
यह संशोधन विधेयक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 में बदलाव लाता है, जो भारत के करोड़ों एमएसएमई उद्यमियों के लिए नीतिगत ढाँचे को अद्यतन करने की दिशा में एक कदम है। गौरतलब है कि भारत में एमएसएमई क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है और लाखों लोगों को रोज़गार प्रदान करता है।
विधेयक के राज्यसभा में पारित होने के बाद अब यह संसद की दोनों सभाओं की मंज़ूरी की प्रक्रिया की ओर अग्रसर होगा। आगामी दिनों में इस विधेयक के क्रियान्वयन पर उद्योग जगत की नज़रें टिकी रहेंगी।