3 अगस्त 2026
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MSME विकास संशोधन विधेयक 2026 राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित, विपक्ष के हंगामे के बीच मांझी ने पेश किया

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MSME विकास संशोधन विधेयक 2026 राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित, विपक्ष के हंगामे के बीच मांझी ने पेश किया

सारांश

विपक्ष के शोर और नारेबाजी के बीच राज्यसभा ने MSME विकास संशोधन विधेयक 2026 ध्वनि मत से पारित किया। मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा पेश इस विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद अजय माकन और नेता सदन जेपी नड्डा के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

मुख्य बातें

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक 2026 राज्यसभा में 3 अगस्त 2026 को ध्वनि मत से पारित हुआ।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने यह विधेयक सदन में पेश किया।
विपक्ष ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग के मुद्दे पर जोरदार नारेबाजी की; सदन सुबह दोपहर 2 बजे तक स्थगित रहा।
कांग्रेस सांसद अजय माकन ने विपक्ष के नेता को बोलने का अवसर न दिए जाने पर आपत्ति जताई।
नेता सदन जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने माकन के असंबंधित वक्तव्यों पर आपत्ति दर्ज कराई।
विधेयक पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित की गई।

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा पेश किया गया सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक 2026 सोमवार, 3 अगस्त 2026 को राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया। संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के जोरदार हंगामे और नारेबाजी के बीच यह विधेयक पारित हुआ, जिसके तुरंत बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

सदन में हंगामे का माहौल

सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही सुबह से ही अशांत रही। विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग के मुद्दे को लेकर जोरदार नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोपहर में सदन की बैठक दोबारा शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा, फिर भी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 में संशोधन पर चर्चा प्रारंभ हुई।

शोर-शराबे के बीच कई सांसदों ने विधेयक पर अपने विचार रखे, जबकि विपक्षी सांसद इस दौरान भी नारेबाजी करते रहे। चर्चा के उपरांत विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

अजय माकन की आपत्ति और संसदीय विवाद

विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद अजय माकन ने विपक्ष के नेता को बोलने का अवसर न दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। माकन ने कहा कि वे दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष, 10 वर्षों तक लोकसभा सदस्य और राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी जहाँ विपक्ष के नेता को सदन में अपनी बात रखने की अनुमति न मिले।

माकन ने यह भी आरोप लगाया कि देश में दो अलग-अलग व्यवस्थाएँ चल रही हैं — एक बड़े कॉरपोरेट घरानों के लिए और दूसरी एमएसएमई के लिए। उन्होंने तर्क दिया कि विधेयक पर चर्चा का सीधा संबंध देश के युवाओं और छात्रों से है, इसलिए विपक्ष के नेता को छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाने का अवसर मिलना चाहिए।

उपसभापति और नेता सदन की प्रतिक्रिया

उपसभापति हरिवंश ने कई बार माकन से केवल विधेयक से संबंधित विषय पर बोलने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार यदि कोई सदस्य विधेयक के विषय पर नहीं बोलता, तो अगले सदस्य को अवसर देना अनिवार्य हो जाता है।

नेता सदन जेपी नड्डा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि माकन ने विधेयक पर एक भी वाक्य नहीं बोला और उनके असंबंधित वक्तव्यों को सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सदन में विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन विधेयक पर बोलने की अनुमति लेकर माइक पर आकर नियमों की अनदेखी करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। रिजिजू ने आरोप लगाया कि माकन ने अपने आचरण से सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाई।

विधेयक का महत्व

यह संशोधन विधेयक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 में बदलाव लाता है, जो भारत के करोड़ों एमएसएमई उद्यमियों के लिए नीतिगत ढाँचे को अद्यतन करने की दिशा में एक कदम है। गौरतलब है कि भारत में एमएसएमई क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है और लाखों लोगों को रोज़गार प्रदान करता है।

विधेयक के राज्यसभा में पारित होने के बाद अब यह संसद की दोनों सभाओं की मंज़ूरी की प्रक्रिया की ओर अग्रसर होगा। आगामी दिनों में इस विधेयक के क्रियान्वयन पर उद्योग जगत की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह प्रक्रिया संसदीय विमर्श की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाती है। जब विपक्ष के नेता को विधेयक पर बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता, तो पारित कानून की लोकतांत्रिक वैधता कमज़ोर होती है — चाहे सरकार की प्रक्रियागत दलीलें सही ही क्यों न हों। एमएसएमई क्षेत्र, जो भारत के रोज़गार और निर्यात की रीढ़ है, ऐसे संशोधनों का हकदार है जिन पर खुली और गहरी बहस हो। हंगामे में पारित विधेयक अक्सर क्रियान्वयन में उन खामियों को साथ लाते हैं जो सदन में बहस से दूर हो सकती थीं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MSME विकास संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 में संशोधन करने वाला विधेयक है, जिसे केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने 3 अगस्त 2026 को राज्यसभा में पेश किया और ध्वनि मत से पारित कराया। यह विधेयक एमएसएमई क्षेत्र के नीतिगत ढाँचे को अद्यतन करने के उद्देश्य से लाया गया है।
राज्यसभा में यह विधेयक किन परिस्थितियों में पारित हुआ?
विधेयक विपक्ष के जोरदार हंगामे और नारेबाजी के बीच पारित हुआ। विपक्ष प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग का मुद्दा उठा रहा था, जिसके चलते सदन सुबह दोपहर 2 बजे तक स्थगित रहा और बाद में भी शोर-शराबे के बीच चर्चा हुई।
कांग्रेस सांसद अजय माकन ने किस बात पर आपत्ति जताई?
अजय माकन ने आपत्ति जताई कि विपक्ष के नेता को सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अपने लंबे संसदीय अनुभव में उन्होंने कभी ऐसा नहीं देखा, और यह भी आरोप लगाया कि बड़े कॉरपोरेट घरानों और एमएसएमई के लिए देश में दो अलग व्यवस्थाएँ चल रही हैं।
नेता सदन जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने क्या कहा?
जेपी नड्डा ने कहा कि अजय माकन ने विधेयक पर एक भी वाक्य नहीं बोला और उनके असंबंधित वक्तव्यों को कार्यवाही से हटाया जाए। किरेन रिजिजू ने कहा कि विधेयक पर बोलने की अनुमति लेकर असंबंधित विषय उठाना संसदीय परंपराओं के विरुद्ध है।
विधेयक पारित होने के बाद आगे क्या होगा?
राज्यसभा में पारित होने के बाद यह विधेयक संसद की दोनों सभाओं की मंज़ूरी की प्रक्रिया की ओर अग्रसर होगा। सदन की कार्यवाही विधेयक पारित होने के तुरंत बाद मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राष्ट्र प्रेस
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