7 अगस्त 2026
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MSME विकास संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पारित, भुगतान विलंब और विवाद निपटारे पर बड़े बदलाव

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MSME विकास संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पारित, भुगतान विलंब और विवाद निपटारे पर बड़े बदलाव

सारांश

लोकसभा ने 7 अगस्त 2026 को MSME विकास संशोधन विधेयक 2026 पारित किया — जो छोटे कारोबारियों के लिए दशकों पुरानी भुगतान-विलंब की समस्या पर सीधा प्रहार है। CPSEs के लिए TReDS भुगतान अनिवार्य, 6 माह से लंबित विवादों में 50% अंतरिम राशि और आर्बिट्रेशन की सख्त समय-सीमा — ये प्रावधान एमएसएमई क्षेत्र की नकदी संकट की जड़ पर वार करते हैं।

मुख्य बातें

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को 7 अगस्त 2026 को लोकसभा ने पारित किया; राज्यसभा पहले ही मंजूरी दे चुकी है।
सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के लिए एमएसएमई बिलों का भुगतान TReDS के माध्यम से करना अनिवार्य होगा।
मध्यस्थता विफल होने पर 30 दिनों में आर्बिट्रेशन रेफरेंस और दलीलें पूरी होने के 90 दिनों में फैसला अनिवार्य।
6 महीने से अधिक लंबित विवादों में एमएसएमई को विवादित राशि का 50% तुरंत देना होगा।
ZED प्रमाणन योजना में अब तक 9.49 लाख एमएसएमई पंजीकृत; महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई को 100% सब्सिडी ।
'कराधान और अन्य विधियाँ (संशोधन) विधेयक, 2026' भी गुरुवार को लोकसभा में ध्वनि मत से पारित।

लोकसभा ने 7 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया, जो देश के करोड़ों छोटे कारोबारियों को भुगतान में होने वाली देरी से राहत दिलाने और विवाद निपटारे की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से लाया गया है। राज्यसभा पहले ही इस विधेयक को अपनी मंजूरी दे चुकी है, जिससे यह संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है।

मुख्य प्रावधान

विधेयक का सबसे अहम प्रावधान यह है कि अब सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) को एमएसएमई से की गई खरीद के समस्त बिलों का भुगतान व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली (Trade Receivables Discounting System — TReDS) के माध्यम से करना अनिवार्य होगा। यह कदम छोटे उद्यमों की नकदी प्रवाह की दीर्घकालिक समस्या को सीधे संबोधित करता है।

विवाद निपटारे के मोर्चे पर भी विधेयक में स्पष्ट समय-सीमाएँ तय की गई हैं। यदि मध्यस्थता विफल हो जाती है, तो मध्यस्थता समाप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आर्बिट्रेशन के लिए रेफरेंस देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के 90 दिनों के भीतर फैसला सुनाना जरूरी होगा।

6 महीने से लंबित मामलों में अंतरिम भुगतान

विधेयक में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच यह भी जोड़ा गया है कि यदि कोई विवाद 6 महीने से अधिक समय तक अनसुलझा रहता है, तो आपूर्तिकर्ता एमएसएमई को विवादित राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान तुरंत करना होगा। यह प्रावधान छोटे उद्यमियों को लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान आर्थिक संकट से बचाने के लिए बनाया गया है।

संसद का व्यापक विधायी सप्ताह

इससे एक दिन पूर्व, गुरुवार को लोकसभा ने विपक्ष के विरोध के बावजूद ध्वनि मत से 'कराधान और अन्य विधियाँ (संशोधन) विधेयक, 2026' भी पारित किया। इस कानून का उद्देश्य भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करना है। यह विधेयक 'आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026' की जगह लेगा और इसमें निवेश को प्रोत्साहन, मैन्युफैक्चरिंग को समर्थन और कर-संबंधी निश्चितता प्रदान करने के प्रावधान हैं।

ZED प्रमाणन और महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन

इसी सप्ताह सरकार ने जानकारी दी कि एमएसएमई मंत्रालय की सस्टेनेबल जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट (ZED) प्रमाणन योजना के तहत अब तक करीब 9.49 लाख एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई को ZED प्रमाणन पर 100 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की व्यापक नीतिगत दिशा का हिस्सा है।

आगे क्या

दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक अब राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। एमएसएमई क्षेत्र, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है और करोड़ों लोगों को रोजगार देता है, इस कानून के लागू होने के बाद TReDS मंच पर अनिवार्य भुगतान के ठोस क्रियान्वयन पर नज़र रखेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — यह मंच पहले से मौजूद है, फिर भी बड़े खरीदार स्वेच्छा से इसका उपयोग नहीं कर रहे थे। 6 माह लंबित विवादों में 50% अंतरिम भुगतान का प्रावधान प्रगतिशील है, परंतु इसकी निगरानी और प्रवर्तन तंत्र अभी स्पष्ट नहीं है। भारत में एमएसएमई क्षेत्र को औसतन 60-90 दिनों की भुगतान देरी झेलनी पड़ती है — कानून की भाषा बदलना और व्यावहारिक अनुपालन सुनिश्चित करना दो अलग चुनौतियाँ हैं, जिनका जवाब अगले कुछ महीनों में मिलेगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MSME विकास संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भुगतान में होने वाली देरी से राहत देने और विवाद निपटारे को तेज करने के लिए लाया गया है। इसे 7 अगस्त 2026 को लोकसभा ने पारित किया और राज्यसभा पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी है।
TReDS के माध्यम से भुगतान अनिवार्य करने से एमएसएमई को क्या फायदा होगा?
व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली (TReDS) के जरिये भुगतान अनिवार्य होने से केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम एमएसएमई के बिलों का निपटान एक पारदर्शी डिजिटल मंच पर करेंगे, जिससे नकदी प्रवाह में सुधार होगा और मनमानी देरी पर रोक लगेगी।
6 महीने से लंबित विवादों में 50% भुगतान का नियम कैसे काम करेगा?
यदि कोई भुगतान विवाद 6 महीने से अधिक समय तक अनसुलझा रहता है, तो खरीदार को एमएसएमई आपूर्तिकर्ता को विवादित राशि का कम से कम 50% तुरंत अदा करना होगा। यह प्रावधान छोटे उद्यमियों को लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान आर्थिक संकट से बचाने के लिए है।
विवाद निपटारे के लिए नई समय-सीमाएँ क्या हैं?
मध्यस्थता विफल होने की स्थिति में 30 दिनों के भीतर आर्बिट्रेशन रेफरेंस देना अनिवार्य है। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद 90 दिनों के भीतर फैसला सुनाना जरूरी होगा।
ZED प्रमाणन योजना में महिला उद्यमियों को क्या विशेष लाभ मिल रहा है?
एमएसएमई मंत्रालय की ZED (जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट) प्रमाणन योजना के तहत महिलाओं के स्वामित्व वाले एमएसएमई को 100% सब्सिडी दी जा रही है। अब तक करीब 9.49 लाख एमएसएमई इस योजना में पंजीकृत हो चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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