MSME संशोधन विधेयक 2026 पास: 90 दिन में भुगतान अनिवार्य, पीएचडीसीसीआई ने बताया गेमचेंजर
सारांश
मुख्य बातें
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 के लोकसभा में पारित होने के बाद पीएचडीसीसीआई के सीईओ और महासचिव रणजीत मेहता ने 10 अगस्त 2026 को कहा कि यह विधेयक एमएसएमई क्षेत्र की सबसे पुरानी और गहरी पीड़ा — भुगतान में देरी — का ठोस समाधान है। विधेयक में स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी एमएसएमई को उसके बिल के भुगतान के लिए 90 दिन से अधिक प्रतीक्षा नहीं करानी होगी।
विधेयक में क्या है खास
संशोधित कानून के तहत सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) को लघु एवं मध्यम उद्यमों से की गई खरीद के समस्त बिलों का भुगतान व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली (TReDS) के माध्यम से अनिवार्य रूप से करना होगा। इससे एमएसएमई को 6 महीने तक भुगतान का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और सभी बिल 90 दिनों के भीतर निपटाए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त, विधेयक में कई प्रावधानों का गैर-अपराधीकरण भी किया गया है, जिससे व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) को बल मिलेगा।
विवाद निपटारे की नई व्यवस्था
मेहता ने बताया कि भुगतान को लेकर विवाद उत्पन्न होने पर दोनों पक्ष मध्यस्थता (Mediation) या आर्बिट्रेशन का सहारा ले सकते हैं, और जो भी निर्णय आए उसका पालन अनिवार्य होगा।
यदि मध्यस्थता विफल हो जाती है, तो उसकी समाप्ति की तारीख से 30 दिनों के भीतर आर्बिट्रेशन के लिए रेफरेंस देना होगा। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के 90 दिनों के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा। यदि कोई मामला 6 महीने से अधिक लंबित रहता है, तो एमएसएमई आपूर्तिकर्ता को तय रकम का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान तत्काल करना होगा।
सरकारी कंपनियों पर अतिरिक्त जवाबदेही
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई सरकारी कंपनी आर्बिट्रेशन के फैसले को न्यायालय में चुनौती देना चाहती है, तो उसे पहले विवादित राशि का 75 प्रतिशत जमा करना होगा। यह प्रावधान सरकारी इकाइयों द्वारा मनमाने तरीके से अपील दायर कर भुगतान टालने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाएगा।
एमएसएमई क्षेत्र पर असर
भारत में एमएसएमई क्षेत्र देश के GDP में करीब 30 प्रतिशत का योगदान देता है और करोड़ों लोगों को रोजगार देता है। गौरतलब है कि भुगतान में देरी की समस्या दशकों से इस क्षेत्र की नकदी प्रवाह को बाधित करती आई है, जिससे छोटे उद्यमों को उच्च ब्याज दर पर कार्यशील पूंजी जुटानी पड़ती थी। यह विधेयक उस चक्र को तोड़ने का प्रयास है।
यह विधेयक शुक्रवार, 8 अगस्त 2026 को लोकसभा में पारित किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि TReDS को अनिवार्य बनाने और समयबद्ध आर्बिट्रेशन की व्यवस्था से एमएसएमई की वित्तीय सेहत में उल्लेखनीय सुधार आ सकता है।