मानसून सत्र 2026: सरकार पेश करेगी 5 नए विधेयक, आयकर छूट और MSME सुधार होंगे केंद्र में
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र में पाँच नए विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिनमें आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 सबसे अहम माने जा रहे हैं। 18वीं लोकसभा के आठवें सत्र में पेश होने वाले ये विधेयक न्यायपालिका, व्यापार सुगमता और राष्ट्रीय प्रतीकों की सुरक्षा जैसे विविध क्षेत्रों को छूते हैं।
मानसून सत्र में पेश होने वाले पाँच विधेयक
आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 पिछले महीने जारी उस अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसके तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट दी गई थी। यह कदम पश्चिम एशिया संकट के बीच रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने और भारत के सॉवरेन डेट मार्केट में वैश्विक पूंजी आकर्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के ज़रिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है। इसका सीधा उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे में सहायता करना है।
MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा देने, भुगतान में देरी के मामलों के समाधान की व्यवस्था को सुदृढ़ करने और राज्यों को अधिक नियामकीय अधिकार देने पर केंद्रित है।
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत 1969 के मूल कानून — जिसमें 2023 में भी बदलाव किए गए थे — की धारा 13(3) में संशोधन कर विलंबित पंजीकरण के नियमों को अधिक सख्त और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा। पाँचवाँ विधेयक, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026, 1971 के कानून में संशोधन कर राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान के विरुद्ध कड़े दंड का प्रावधान करेगा।
पहले से लंबित विधेयकों पर भी होगी चर्चा
नए विधेयकों के अलावा सरकार संसद में पहले से लंबित दो विधेयकों पर भी चर्चा आगे बढ़ाएगी। इनमें विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 — जिसे 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था — और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 शामिल हैं। शिक्षा विधेयक को 15 दिसंबर 2025 को पेश किए जाने के बाद आगे विचार के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया था।
गौरतलब है कि सरकार वर्ष 2022-23 के अनुपूरक अनुदानों की माँग भी इस सत्र में चर्चा और मतदान के लिए सदन के पटल पर रखेगी।
सर्वदलीय बैठक और सत्र की पृष्ठभूमि
मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले, 19 जुलाई 2026 को, सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें सभी राजनीतिक दलों को विधायी एजेंडे और प्रमुख विधेयकों की जानकारी दी गई। यह बैठक सत्र की सुचारु शुरुआत के लिए सरकार की ओर से एक सामान्य प्रक्रिया है।
सत्र के पहले दिन दोनों सदनों में विपक्षी दलों के नेता संयुक्त रणनीति तय करने के लिए बैठक करेंगे, जिससे सत्र के दौरान तीखी बहस की संभावना है।
सरकार और विपक्ष की रणनीति
यह ऐसे समय में आया है जब संसद के पिछले कई सत्रों में हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित होती रही है। विपक्ष के लिए आयकर छूट का मुद्दा — जो विदेशी निवेशकों को लाभ देता है — और MSME भुगतान विवाद जैसे विषय बहस के केंद्र बन सकते हैं। सरकार का तर्क है कि ये सुधार दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और रोज़गार सृजन के लिए अनिवार्य हैं।
आगे क्या होगा
मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। विधेयकों की संख्या और विविधता को देखते हुए सत्र का विधायी एजेंडा भरा-पूरा है। न्यायपालिका सुधार से लेकर विदेशी पूंजी आकर्षण तक, इन विधेयकों का असर व्यापक वर्ग पर पड़ेगा — और इनके पारित होने की राह संसद में होने वाली बहस की दिशा पर निर्भर करेगी।