एलपीयू बवाल: सुखबीर बादल का बड़ा दावा — वॉकी-टॉकी और हथियारों के साथ पकड़े गए बाहरी लोग, AAP पर साजिश का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 29 सितंबर 2026 को लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हुई हिंसा को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधा हमला बोला है। बादल ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी परिसर में वॉकी-टॉकी और हथियार लेकर घुसे बाहरी लोगों को छात्रों ने पकड़ा, जो कथित तौर पर एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है।
सुखबीर बादल का एक्स पोस्ट और मुख्य आरोप
बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'यह हैरान करने वाली बात है कि एलपीयू के अंदर वॉकी-टॉकी और हथियार लिए हुए गुंडे पाए गए और बहादुर छात्रों ने ही उन्हें पकड़ा और गिरफ्तारी करवाई। पकड़े गए लोग बाहरी हैं, जिससे यह साबित होता है कि यह एक बड़ी साजिश है।' उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि गिरफ्तारी के बाद एफआईआर कहाँ दर्ज की गई है।
बादल के इस बयान के बाद पंजाब की सियासत में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष सरकार से जवाब माँग रहा है, जबकि पुलिस की चुप्पी नए सवाल खड़े कर रही है।
मलेरकोटला घटना से जोड़ा पैटर्न
शिअद अध्यक्ष ने एलपीयू की घटना को मलेरकोटला की एक पुरानी घटना से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि मलेरकोटला में भी इसी तरह का पैटर्न देखा गया था, जहाँ AAP नेता नरेश यादव को पवित्र कुरान शरीफ के अपमान के मामले में जेल हुई थी। बादल के अनुसार यह सिलसिला प्रदेश में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिशों का हिस्सा है।
केजरीवाल और 'ध्यान भटकाने' का आरोप
बादल ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के AAP नेता जानबूझकर पंजाब में ऐसी घटनाओं को हवा दे रहे हैं ताकि ईडी की जाँच में कथित तौर पर उजागर हुए ₹10,000 करोड़ के घोटाले से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि AAP नेता चंडीगढ़ में सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जा जमाए हुए हैं और पंजाब को 'प्रॉक्सी' के जरिए चलाने की कोशिश कर रहे हैं।
गौरतलब है कि ये आरोप AAP ने अभी तक सार्वजनिक रूप से खारिज नहीं किए हैं और राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भगवंत मान पर निशाना
बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरुद्रोही' बताते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी बुनियादी जिम्मेदारी पूरी तरह नजरअंदाज की है। उनके शब्दों में, 'छात्रों की सुरक्षा करने के बजाय वह राजनीतिक फायदे के लिए सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।'
आगे क्या होगा
एलपीयू बवाल मामले में पुलिस की जाँच की दिशा और एफआईआर दर्ज होने या न होने का विवरण अभी स्पष्ट नहीं है। विपक्षी दलों की माँग है कि पकड़े गए बाहरी लोगों की पहचान और उनके कथित नेटवर्क की सार्वजनिक जाँच हो। यह मामला आगामी दिनों में पंजाब विधानसभा सत्र और सड़क की राजनीति दोनों मोर्चों पर गर्माने की संभावना है।