सीएम योगी का विपक्ष पर निशाना: नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर बढ़ा आक्रोश
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लखनऊ, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में रविवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
सीएम योगी ने कहा कि जब पीएम मोदी ने वर्ष 2014 में देश की बागडोर संभाली थी, तब उन्होंने स्पष्ट किया था कि देश में केवल चार जातियाँ हैं: नारी, गरीब, युवा और किसान। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने जातिवाद का सहारा लेकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए देश को लूटा है। उनके लिए यह (नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक) एक चुनौती थी।
सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में उठाए गए प्रोग्रेसिव कदमों का हमेशा कांग्रेस और उनके सहयोगियों द्वारा विरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि आधी आबादी में विपक्ष के नारी विरोधी आचरण के प्रति गहरा आक्रोश है। यह आक्रोश समाजवादी पार्टी, राजद, टीएमसी, डीएमके और अन्य दलों के खिलाफ है, जो इस पाप में भागीदार हैं।
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने समाज और देश के हित में जो कदम उठाए हैं, उन्हें रोकने के लिए इंडी गठबंधन किस हद तक षड्यंत्र कर रहा है, यह महत्वपूर्ण है। सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ था, लेकिन जब महिला संगठनों ने इसे 2029 में लागू करने की मांग की, तो पीएम मोदी ने सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श के बाद इसके आवश्यक संशोधन किए।
सीएम योगी ने बताया कि कुछ राज्यों ने चिंता जताई थी कि इससे उनके अधिकारों में कटौती न हो। पीएम मोदी ने इस अधिनियम को पारित करते वक्त यह सुनिश्चित किया था कि किसी का हक नहीं छीना जाएगा। 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए लोकसभा और विधानसभा में अतिरिक्त सीटें बढ़ाए जाने का आश्वासन दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे किसी का हक नहीं घटता, बल्कि केवल यही इच्छा थी कि सदन मिलकर भारत की नारी को सम्मान और स्वावलंबन प्रदान करे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में विपक्ष ने किस प्रकार की गैर-जिम्मेदार टिप्पणियां की, यह किसी से छिपा नहीं है। यदि यह सर्वसम्मति से पास होता, तो पूरे सदन को इसका श्रेय मिलता। सीएम योगी ने कहा कि सपा ने मुद्दा उठाया कि मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं मिला? ये संविधान की बात करते हैं, लेकिन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की भावनाओं के खिलाफ इनका आचरण दिखता है।
सीएम ने कहा कि जब भारत का संविधान बनाया जा रहा था, उस समय भी धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग उठी थी, जिसका सभी ने विरोध किया था। बाबासाहेब ने इस पर तीखी टिप्पणी की थी कि विभाजन हो चुका है, भारत दूसरे विभाजन के लिए तैयार नहीं हो सकता। सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी इसका विरोध किया था। आज जब वे मुस्लिम महिलाओं की बात करते हैं, तब वे कहां थे? शाह बानोकांग्रेस सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया।