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लखनऊ विश्वविद्यालय के करीब 100 सुरक्षाकर्मी बर्खास्त, NSUI समर्थन से गेट नंबर-1 पर धरना

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लखनऊ विश्वविद्यालय के करीब 100 सुरक्षाकर्मी बर्खास्त, NSUI समर्थन से गेट नंबर-1 पर धरना

सारांश

लखनऊ विश्वविद्यालय में 12 साल तक सेवा देने वाले करीब 100 गार्डों को एजेंसी ने अचानक हटा दिया। NSUI के साथ गेट नंबर-1 पर बैठे प्रदर्शनकारियों का कहना है — न कोई शिकायत, न कुलसचिव की अनुमति, फिर भी नौकरी गई। परिवारों पर आर्थिक संकट, और प्रशासन अब तक चुप।

मुख्य बातें

लखनऊ विश्वविद्यालय में करीब 100 सुरक्षाकर्मियों को 14 सितंबर 2026 को अचानक हटाए जाने की खबर सामने आई।
हटाए गए गार्डों में कुछ 2018 से, और कुलसचिव को दिए पत्र के अनुसार करीब 12 वर्षों से सेवारत थे।
कर्मचारियों का दावा — करीब 60 प्रतिशत सुरक्षाकर्मियों को हटाने की तैयारी, कुलसचिव की अनुमति के बिना।
NSUI कार्यकर्ताओं ने समर्थन दिया; गेट नंबर-1 पर धरना जारी, नौकरी बहाली और रिक्त पदों पर समायोजन की माँग।
एजेंसी का तर्क — मानक पूरे न करने वाले गार्डों को हटाया; कर्मचारियों ने इसे खारिज किया।

लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्षों से सेवारत करीब 100 सुरक्षाकर्मियों को अचानक हटाए जाने का मामला 14 सितंबर 2026 को सामने आया, जब नाराज गार्डों ने राष्ट्रीय छात्र संघ भारत (NSUI) के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 के पास धरना प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शनकारियों ने तत्काल नौकरी बहाली की माँग करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की।

मुख्य घटनाक्रम

बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी गेट नंबर-1 के समीप एकत्र हुए और नारेबाजी के साथ रोजगार बहाली की माँग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि एजेंसी की ओर से बिना कुलसचिव की अनुमति के उन्हें हटाया गया, जबकि नियमानुसार किसी भी कर्मचारी को हटाने के लिए कुलसचिव की स्वीकृति आवश्यक है।

कर्मचारियों का दावा है कि अब तक करीब 60 प्रतिशत सुरक्षाकर्मियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

कर्मचारियों की स्थिति

हटाए गए सुरक्षाकर्मियों में कुछ ऐसे भी हैं जो वर्ष 2018 से लगातार विश्वविद्यालय में सेवाएँ दे रहे थे। कुलसचिव को सौंपे गए पत्र में करीब 12 वर्षों की सेवा का उल्लेख किया गया है। कर्मचारियों का तर्क है कि इतने लंबे कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई।

गार्डों ने बताया कि अचानक रोजगार छिनने से परिवारों के सामने गहरा आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है — बच्चों की शिक्षा और घरेलू खर्च पूरी तरह इसी नौकरी पर निर्भर था। यह ऐसे समय में आया है जब रोजगार की अनिश्चितता वैसे भी बड़ा सामाजिक मुद्दा बनी हुई है।

एजेंसी का पक्ष

एजेंसी की ओर से कहा जा रहा है कि तय मानकों को पूरा न करने वाले गार्डों को हटाया गया है। हालाँकि, कर्मचारियों का प्रतिदावा है कि वे निर्धारित सभी मानकों पर खरे उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस विरोधाभास के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।

NSUI का समर्थन और माँगें

NSUI कार्यकर्ताओं ने सुरक्षाकर्मियों की माँग का पुरजोर समर्थन किया और विश्वविद्यालय प्रशासन से सभी हटाए गए गार्डों को तत्काल बहाल करने का आग्रह किया। इसके अलावा, कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय में रिक्त पड़े चौकीदार और अन्य पदों पर उनकी योग्यता के अनुसार समायोजन की भी माँग रखी है।

आगे क्या होगा

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक अपनी आवाज बुलंद रखेंगे जब तक कुलसचिव उनकी माँगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेते। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर इस विवाद का असर पड़ सकता है। प्रशासन की प्रतिक्रिया और एजेंसी के साथ संभावित वार्ता ही इस गतिरोध का भावी रुख तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली मुद्दा यह है कि क्या दीर्घकालिक सेवा देने वाले कर्मचारियों को न्यूनतम प्रक्रियागत सुरक्षा मिलनी चाहिए।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ विश्वविद्यालय में सुरक्षाकर्मियों को क्यों हटाया गया?
एजेंसी का कहना है कि तय मानकों को पूरा न करने वाले गार्डों को हटाया गया है। हालाँकि, कर्मचारियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि वे सभी निर्धारित मानकों पर खरे उतरने के लिए तैयार हैं और उनके खिलाफ कभी कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई।
धरने में कितने सुरक्षाकर्मी शामिल हैं और उनकी क्या माँगें हैं?
करीब 100 सुरक्षाकर्मी गेट नंबर-1 पर प्रदर्शन में शामिल हुए। उनकी मुख्य माँगें हैं — तत्काल नौकरी बहाली, कुलसचिव की अनुमति के बिना किसी को न हटाने का आदेश, और विश्वविद्यालय के रिक्त चौकीदार व अन्य पदों पर उनका समायोजन।
NSUI का इस विवाद में क्या रोल है?
राष्ट्रीय छात्र संघ भारत (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने सुरक्षाकर्मियों की माँग का समर्थन किया और विश्वविद्यालय प्रशासन से सभी बर्खास्त गार्डों को दोबारा काम पर रखने की अपील की। प्रदर्शन में NSUI और गार्ड संयुक्त रूप से शामिल रहे।
क्या कुलसचिव की अनुमति के बिना गार्डों को हटाया जा सकता है?
कर्मचारियों के अनुसार, नियमों के तहत किसी भी कर्मचारी को हटाने के लिए कुलसचिव की स्वीकृति आवश्यक है। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया का पालन किए बिना ही एजेंसी ने उन्हें हटाया, जो नियमों का उल्लंघन है।
इस विवाद का आगे क्या हो सकता है?
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक माँगें नहीं मानी जातीं, धरना जारी रहेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और एजेंसी के साथ संभावित वार्ता ही इस गतिरोध की दिशा तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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