30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मेहसाणा के माढी गांव में सालाना 70 करोड़ से अधिक पौधे, प्लग नर्सरी से ₹100 करोड़ का कारोबार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मेहसाणा के माढी गांव में सालाना 70 करोड़ से अधिक पौधे, प्लग नर्सरी से ₹100 करोड़ का कारोबार

सारांश

मेहसाणा का माढी गांव अब सिर्फ एक गांव नहीं — यह एक कृषि उद्यम केंद्र है। 200 से अधिक हाई-टेक नर्सरी, सालाना 70 करोड़ पौधे, ₹100 करोड़ का कारोबार और 800 महिलाओं को रोज़गार — यह है गुजरात की प्लग नर्सरी क्रांति की असली तस्वीर।

मुख्य बातें

मेहसाणा जिले के माढी गांव में 200 से अधिक हाई-टेक नर्सरी यूनिट लगभग 300 बीघा भूमि पर कार्यरत हैं।
सालाना 70 करोड़ से अधिक पौधे तैयार होते हैं और कुल वार्षिक कारोबार ₹100 करोड़ से अधिक है; किसानों का अनुमानित मुनाफा ₹50 करोड़ ।
पौधे गुजरात के 15 जिलों के साथ राजस्थान और महाराष्ट्र तक पहुँचते हैं, लगभग 6 लाख एकड़ की खेती का आधार बनते हैं।
150 से अधिक परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हैं और 800 से अधिक महिलाओं को सीधा रोज़गार मिल रहा है।
गुजरात बागवानी विभाग की हाई-टेक प्लग नर्सरी योजना के तहत 65% सब्सिडी उपलब्ध; अब तक किसानों को ₹9 करोड़ से अधिक की सहायता दी जा चुकी है।
साबरकांठा के वदराड़ CoE ने प्रशिक्षण व तकनीकी मार्गदर्शन से माढी को अग्रणी नर्सरी हब बनाने में अहम भूमिका निभाई।

गुजरात के मेहसाणा जिले की विजापुर तहसील के माढी गांव ने देश के प्लग नर्सरी मानचित्र पर एक अनूठी पहचान बना ली है। यहाँ 200 से अधिक हाई-टेक नर्सरी यूनिट सालाना 70 करोड़ से अधिक पौधे तैयार करती हैं और इस व्यवसाय का कुल वार्षिक कारोबार ₹100 करोड़ से अधिक का है। राज्य के बागवानी विभाग की हाई-टेक प्लग नर्सरी योजना और आधुनिक तकनीक के संयोजन ने इस छोटे से गांव को एक समृद्ध कृषि-उद्यम केंद्र में बदल दिया है।

माढी गांव: एक नज़र में

माढी गांव में लगभग 300 बीघा भूमि पर फैली नर्सरी इकाइयाँ सब्जियों, फलों और फूलों के पौधे उगाने में माहिर हैं। यहाँ मुख्य रूप से मिर्च और टमाटर के पौधों के अलावा पपीता, शिमला मिर्च, बंदगोभी, फूलगोभी, बैंगन, करेला, ककड़ी, तरबूच, खरबूजा और गेंदे के पौधे तैयार किए जाते हैं। 150 से अधिक परिवार इस व्यवसाय से जुड़े हैं और आसपास के क्षेत्रों की 800 से अधिक महिलाओं को इससे सीधा रोज़गार मिल रहा है।

यहाँ तैयार होने वाले पौधे गुजरात के 15 जिलों के अलावा राजस्थान के सिरोही व जालोर और महाराष्ट्र के नंदुरबार तक पहुँचते हैं, जो लगभग 6 लाख एकड़ में सब्जियों की खेती का आधार बनते हैं। किसान सालाना ₹50 करोड़ का अनुमानित शुद्ध मुनाफा कमाते हैं।

प्लग नर्सरी पद्धति क्या है और यह क्यों कारगर है

प्लग नर्सरी पद्धति में प्लास्टिक की खांचेदार ट्रे का उपयोग किया जाता है, जिसमें मृदा रहित माध्यम में पौधे उगाए जाते हैं। इस तकनीक की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

80% से अधिक अंकुरण दर सुनिश्चित होती है और पौधे लगभग 25 दिनों में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। मृदाजनित रोगों से सुरक्षा मिलती है, जड़ें मजबूत होती हैं और फसल की उत्पादकता बढ़ती है। स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के ज़रिए सभी पौधों को एकसमान पानी मिलता है, जिससे समान व स्वस्थ विकास सुनिश्चित होता है। इसके अलावा, प्लग ट्रे में पौधों को सुरक्षित तरीके से लंबी दूरी तक पहुँचाया जा सकता है।

सरकारी योजना और वित्तीय सहायता

गुजरात बागवानी विभाग की हाई-टेक प्लग नर्सरी योजना के तहत 500 से 4,000 वर्ग मीटर क्षेत्र की संरक्षित नर्सरी — जिसमें नेट हाउस, ग्रीन हाउस और फेन एंड पेड ग्रीन हाउस शामिल हैं — स्थापित करने के लिए 65% वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। अब तक इस योजना के अंतर्गत किसानों को ₹9 करोड़ से अधिक की सहायता दी जा चुकी है।

गौरतलब है कि गुजरात में बागवानी की मज़बूत नींव तब रखी गई थी जब नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे। उस दौर में कृषि महोत्सव, सूक्ष्म सिंचाई, नर्मदा कैनाल नेटवर्क का विस्तार और संरक्षित खेती जैसी पहलों ने बागवानी क्षेत्र को एक नई दिशा दी। वर्तमान में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात देश के शीर्ष बागवानी राज्यों में शामिल हो चुका है।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका

साबरकांठा जिले के वदराड़ स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) ने माढी गांव को एक अग्रणी प्लग नर्सरी हब के रूप में विकसित करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। यह केंद्र नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम, एक्सपोज़र विज़िट और ऑन-फील्ड तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करता है।

केंद्र द्वारा संरक्षित खेती, प्रिसिजन इरिगेशन, फर्टिगेशन और जलवायु-नियंत्रित नर्सरी प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाती है। इसी के परिणामस्वरूप माढी के नर्सरी संचालक उच्च गुणवत्ता युक्त और रोगमुक्त पौधों के उत्पादन में सफल रहे हैं।

आगे की राह

माढी गांव की यह सफलता गुजरात के अन्य जिलों के लिए एक प्रेरक मॉडल बन रही है। आधुनिक तकनीक, सरकारी सहयोग और किसानों की उद्यमशीलता के इस त्रिकोण ने दिखाया है कि ग्रामीण भारत में भी कृषि-आधारित उद्योग किस तरह बड़े पैमाने पर रोज़गार और समृद्धि ला सकते हैं। आने वाले वर्षों में इस मॉडल के और विस्तार की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे एकमात्र मॉडल मानने से पहले कुछ सवाल ज़रूरी हैं — क्या यह सफलता उस 65% सब्सिडी पर टिकी है जो दीर्घकाल में टिकाऊ है, या बाज़ार की माँग इसे स्वावलंबी बना चुकी है? 800 महिलाओं को रोज़गार देने का दावा सराहनीय है, लेकिन इनकी मज़दूरी, सामाजिक सुरक्षा और मौसमी स्थिरता पर कोई आँकड़ा सार्वजनिक नहीं है। गुजरात के 15 जिलों पर निर्भरता एक केंद्रीकृत आपूर्ति श्रृंखला का संकेत देती है, जो किसी एक मौसम या बीमारी के प्रकोप में भंगुर साबित हो सकती है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह मॉडल सरकारी सहायता के बिना भी उतना ही फलता-फूलता रहेगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माढी गांव की प्लग नर्सरी क्या है और यह कैसे काम करती है?
माढी गांव में प्लास्टिक की खांचेदार ट्रे में मृदा रहित माध्यम से पौधे उगाए जाते हैं। इस पद्धति में 80% से अधिक अंकुरण दर होती है और पौधे लगभग 25 दिनों में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं, साथ ही मृदाजनित रोगों से भी सुरक्षा मिलती है।
माढी गांव से कितने पौधे और कहाँ-कहाँ भेजे जाते हैं?
माढी गांव से सालाना 70 करोड़ से अधिक पौधे तैयार होते हैं। ये पौधे गुजरात के 15 जिलों के अलावा राजस्थान के सिरोही व जालोर और महाराष्ट्र के नंदुरबार तक पहुँचते हैं, जो लगभग 6 लाख एकड़ में सब्जियों की खेती का आधार बनते हैं।
गुजरात बागवानी विभाग की हाई-टेक प्लग नर्सरी योजना में किसानों को क्या सहायता मिलती है?
इस योजना के तहत 500 से 4,000 वर्ग मीटर क्षेत्र की संरक्षित नर्सरी स्थापित करने के लिए 65% वित्तीय सहायता दी जाती है। अब तक किसानों को ₹9 करोड़ से अधिक की सहायता प्रदान की जा चुकी है।
माढी गांव के नर्सरी व्यवसाय से कितने लोगों को रोज़गार मिल रहा है?
माढी गांव में 150 से अधिक परिवार इस नर्सरी व्यवसाय से जुड़े हैं। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों की 800 से अधिक महिलाओं को इस व्यवसाय से सीधा रोज़गार मिल रहा है।
वदराड़ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने माढी गांव के विकास में क्या भूमिका निभाई?
साबरकांठा जिले के वदराड़ स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) ने नियमित प्रशिक्षण, एक्सपोज़र विज़िट और ऑन-फील्ड तकनीकी मार्गदर्शन के ज़रिए माढी को एक अग्रणी नर्सरी हब के रूप में विकसित किया। यह केंद्र प्रिसिजन इरिगेशन, फर्टिगेशन और जलवायु-नियंत्रित नर्सरी प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी देता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले