मधुबनी में गड्ढे में डूबने से एक ही परिवार के 5 बच्चों की मौत, CM सम्राट चौधरी ने ₹4-4 लाख मुआवज़े का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मधुबनी ज़िले के पतौना थाना क्षेत्र स्थित केरवार गांव में बुधवार को एक तालाबनुमा गड्ढे में नहाने के दौरान डूब जाने से एक ही परिवार के पाँच बच्चों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने का निर्देश दिया है।
कैसे हुआ हादसा
पुलिस के अनुसार, गांव के कई बच्चे पास के एक खेत में JCB से खोदे गए बड़े गड्ढे में जमा पानी में स्नान करने गए थे। नहाने में मशगूल बच्चे आगे बढ़ते चले गए और गहराई का अंदाज़ा न होने के कारण एक-एक कर गहरे पानी में डूब गए। सूचना मिलने पर ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुँचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
मुख्यमंत्री की संवेदना
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “मधुबनी जिला के पतौना थाना क्षेत्र के केरवार गांव में नहाने के दौरान डूबने से 5 बच्चों की असामयिक मृत्यु अत्यंत दुःखद एवं हृदय विदारक है। शोक संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें एवं परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति दें।” उन्होंने जोड़ा कि आपदा प्रबंधन विभाग को मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने का निर्देश दिया गया है।
गांव में पसरा मातम
एक ही परिवार के पाँच बच्चों की एक साथ मौत की खबर फैलते ही पूरे केरवार गांव में मातम छा गया है। मृत बच्चों के माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे और सभी शवों को गड्ढे से बाहर निकाल लिया गया।
सुरक्षा इंतज़ाम पर सवाल
स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि JCB से खुदा यह गड्ढा अब तालाब का रूप ले चुका है, लेकिन यहाँ न तो सुरक्षा का कोई इंतज़ाम है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। गौरतलब है कि बिहार के ग्रामीण इलाक़ों में खुले खनन-गड्ढों और बरसाती जलाशयों में डूबने से बच्चों की मौत की घटनाएँ लगातार सामने आती रही हैं, फिर भी ज़मीनी स्तर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू नहीं हो पाया है।
आगे क्या
स्थानीय प्रशासन ने मामले की जाँच के संकेत दिए हैं और मुआवज़े की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है। ग्रामीणों ने माँग की है कि गड्ढे को या तो भरा जाए या उसके चारों ओर सुरक्षा घेरा और चेतावनी बोर्ड लगाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न दोहराई जाए।