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मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार के नाम पर जारी हुईं दो वोटर आईडी, एसआईआर प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

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मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार के नाम पर जारी हुईं दो वोटर आईडी, एसआईआर प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

सारांश

मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार के नाम पर चुनाव आयोग ने दो वोटर आईडी जारी कर दीं — दोनों में पता और नाम एक जैसे, सिर्फ नंबर अलग। एसआईआर पर करोड़ों खर्च के बाद यह चूक पूरी सत्यापन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार के नाम पर दो वोटर आईडी जारी हुईं — नाम, पिता का नाम, पता समान; केवल वोटर आईडी नंबर अलग।
पिछली एसआईआर प्रक्रिया में अहिरवार का नाम मतदाता सूची से हटाया गया था; सुधार के नाम पर दो नई आईडी बना दी गईं।
आधार कार्ड जैसे यूनिक पहचान दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद डुप्लीकेट आईडी जारी होना गंभीर प्रशासनिक चूक।
अहिरवार ने चेताया कि पुरानी वोटर आईडी और दो नई आईडी मिलाकर एक व्यक्ति को तीन वोट डालने की स्थिति बन सकती है।
एसआईआर पर करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी सूची में ऐसी खामियाँ मिलना पूरी प्रक्रिया के औचित्य पर सवाल।

मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मिथुन अहिरवार के नाम पर चुनाव आयोग की ओर से दो अलग-अलग वोटर आईडी जारी कर दी गई हैं — दोनों में नाम, पिता का नाम और पता एक समान है, केवल वोटर आईडी नंबर भिन्न हैं। भोपाल में 30 मई को यह मामला सामने आने के बाद अहिरवार ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर तीखे सवाल उठाए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

अहिरवार के अनुसार, पिछली एसआईआर प्रक्रिया में उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। बाद में चुनाव आयोग ने इस पर संज्ञान लिया, परंतु उनका नाम पुनः जोड़ने के बजाय उनके नाम से दो नई वोटर आईडी जारी कर दी गईं। उन्होंने कहा कि आयोग का दावा रहा है कि बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं — ऐसे में एक ही व्यक्ति के नाम पर दो वोटर आईडी जारी होना प्रक्रिया की गंभीर खामी को उजागर करता है।

आधार सत्यापन के बावजूद चूक

अहिरवार ने यह भी रेखांकित किया कि आधार कार्ड जैसे यूनिक पहचान दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बावजूद यह त्रुटि हुई। उनका सवाल है कि जब डिजिटल पहचान का मिलान संभव था, तो डुप्लीकेट आईडी कैसे बन गई? उन्होंने आयोग से स्पष्ट करने को कहा है कि जारी दोनों वोटर आईडी में से वैध कौन सी है और अवैध कौन सी

तीन वोट की आशंका

अहिरवार ने यह भी ध्यान दिलाया कि आयोग ने पहले कहा था कि जिन मतदाताओं के नाम पिछली सूची से हट गए हैं, वे अपने पुराने मतदाता पहचान पत्र के आधार पर मतदान कर सकेंगे। यदि ऐसा है, तो उनके पास पुरानी वोटर आईडी और नई जारी दोनों वोटर आईडी मिलाकर तीन-तीन वोट डालने की स्थिति बन सकती है — जो लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है।

आम नागरिकों पर असर

उन्होंने कहा कि यदि यह स्थिति एक राजनीतिक दल के प्रवक्ता के साथ हो सकती है, तो आम नागरिकों के साथ क्या हुआ होगा, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उनके अनुसार, एक ही घर में कई डुप्लीकेट मतदाता जोड़े गए होंगे और अनेक वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हुए होंगे — इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

एसआईआर की उपयोगिता पर प्रश्न

अहिरवार ने कहा कि इस पूरी एसआईआर प्रक्रिया पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए और लाखों लोगों का समय व संसाधन लगाया गया। यदि परिणामस्वरूप मतदाता सूची में ऐसी बुनियादी खामियाँ सामने आ रही हैं, तो पूरी प्रक्रिया का औचित्य ही संदेह के घेरे में आ जाता है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में शीघ्र और पारदर्शी जवाब माँगा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सोचना ज़रूरी है कि उन लाखों आम नागरिकों की सूची में क्या हुआ होगा जिनके पास इसे उजागर करने का मंच नहीं है। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता इसी बात पर टिकी है कि वह इस मामले में पारदर्शी जाँच करे और यह स्पष्ट करे कि डुप्लीकेट आईडी की संख्या कितनी है — न कि केवल एक प्रवक्ता के मामले को सुधारकर आगे बढ़ जाए।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिथुन अहिरवार के नाम पर दो वोटर आईडी कैसे जारी हुईं?
चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया में अहिरवार का नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद, सुधार के दौरान उनके नाम पर दो नई वोटर आईडी जारी कर दी गईं। दोनों आईडी में नाम, पिता का नाम और पता समान हैं, केवल वोटर आईडी नंबर अलग-अलग हैं।
एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया क्या होती है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग बूथ लेवल ऑफिसरों (बीएलओ) के ज़रिये घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन और अद्यतन करता है। इसका उद्देश्य फर्जी या डुप्लीकेट नामों को हटाना और वास्तविक मतदाताओं को सूची में शामिल करना है।
क्या एक व्यक्ति दो वोटर आईडी के आधार पर दो बार मतदान कर सकता है?
कानूनी रूप से एक व्यक्ति केवल एक बार मतदान कर सकता है। हालाँकि अहिरवार ने सवाल उठाया है कि यदि पुरानी वोटर आईडी भी मान्य रहती है और नई दो आईडी जारी हो गई हैं, तो तीन-तीन वोट डालने की स्थिति सैद्धांतिक रूप से बन सकती है — इसीलिए उन्होंने आयोग से यह स्पष्ट करने की माँग की है कि कौन सी आईडी वैध है।
इस मामले में चुनाव आयोग से क्या जवाब माँगा गया है?
अहिरवार ने आयोग से तीन सवालों के जवाब माँगे हैं: जारी दोनों वोटर आईडी में से वैध कौन सी है; आधार सत्यापन के बावजूद यह चूक कैसे हुई; और पूरी एसआईआर प्रक्रिया में ऐसे कितने डुप्लीकेट मामले हैं जिनकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
इस मामले का आम मतदाताओं पर क्या असर हो सकता है?
अहिरवार का तर्क है कि यदि एक प्रमुख राजनीतिक प्रवक्ता के मामले में यह गड़बड़ी हो सकती है, तो आम नागरिकों की सूची में डुप्लीकेट वोटर जोड़े जाने और वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की संभावना कहीं अधिक है। इससे मताधिकार और चुनावी पारदर्शिता दोनों प्रभावित होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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