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मध्य प्रदेश बनेगा देश का 'क्रिटिकल मिनरल हब': CM मोहन यादव का बड़ा दावा

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मध्य प्रदेश बनेगा देश का 'क्रिटिकल मिनरल हब': CM मोहन यादव का बड़ा दावा

सारांश

बैतूल में GSI द्वारा अनुमानित 1.1 करोड़ मीट्रिक टन ग्रेफाइट भंडार और कोल इंडिया की आलीराजपुर में एंट्री के साथ, मध्य प्रदेश देश के क्रिटिकल मिनरल मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है — EV, बैटरी और रक्षा उद्योगों के लिए यह भंडार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा दांव है।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने कहा कि खनिज संपदा और निवेश-अनुकूल नीतियों से मध्य प्रदेश देश की औद्योगिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है।
बैतूल से आलीराजपुर तक फैली खनिज बेल्ट में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के विशाल भंडार चिन्हित — EV, ऊर्जा भंडारण और रक्षा उद्योग के लिए उपयोगी।
GSI ने अकेले बैतूल जिले में लगभग 1.1 करोड़ मीट्रिक टन ग्रेफाइट संसाधनों का अनुमान लगाया है।
कोल इंडिया लिमिटेड ने आलीराजपुर के खट्टाली छोटी ग्रेफाइट ब्लॉक का अधिग्रहण कर व्यावसायिक खनन का मार्ग खोला।
विशेषज्ञों के अनुसार बैतूल क्षेत्र में वेनेडियम जैसे अन्य क्रिटिकल मिनरल मिलने की भी संभावना है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 4 जुलाई को कहा कि खनिज संपदा की प्रचुरता और निवेश-अनुकूल नीतियों के बल पर मध्य प्रदेश देश की औद्योगिक प्रगति में निर्णायक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह औद्योगिक विकास राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

बैतूल से आलीराजपुर तक फैली खनिज बेल्ट

बैतूल से आलीराजपुर तक विस्तृत खनिज बेल्ट में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के विशाल भंडार मिले हैं, जिसके चलते मुख्यमंत्री यादव ने प्रदेश को देश के उभरते 'क्रिटिकल मिनरल हब' के रूप में रेखांकित किया। इस बेल्ट में पाया जाने वाला ग्रेफाइट हाई फिक्स्ड कार्बन और उत्कृष्ट फ्लेकी गुणवत्ता से युक्त है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ग्रेफाइट इलेक्ट्रिक वाहन (EV), ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रदेश के बैतूल, आलीराजपुर और सीधी जिलों में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के विशाल भंडार चिन्हित किए गए हैं। इन क्षेत्रों के ग्रेफाइट में उच्च स्थिर कार्बन की मात्रा होने के कारण यह इलेक्ट्रोड निर्माण, बैटरी उद्योग और अन्य उच्च-तकनीकी औद्योगिक उपयोगों के लिए उपयुक्त माना जाता है।

GSI का अनुमान और प्रमुख ब्लॉक

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने अकेले बैतूल जिले में लगभग 1.1 करोड़ मीट्रिक टन ग्रेफाइट संसाधनों का अनुमान लगाया है। बैतूल के चिखलार, गौठाना और गोलीघाट क्षेत्र प्रमुख ग्रेफाइट ब्लॉकों के रूप में उभरे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती माँग के बीच आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

कोल इंडिया की एंट्री — बड़ा बदलाव

प्रदेश में ग्रेफाइट खनन के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन तब आया जब सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड ने गैर-कोयला खनन में प्रवेश करते हुए आलीराजपुर जिले के खट्टाली छोटी ग्रेफाइट ब्लॉक का अधिग्रहण किया। गौरतलब है कि यह कोल इंडिया का विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो बड़े पैमाने पर व्यावसायिक ग्रेफाइट खनन का मार्ग प्रशस्त करता है।

वेनेडियम की संभावना — बहु-खनिज क्षेत्र बनने की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, बैतूल क्षेत्र के ग्रेफाइट शिस्ट में वेनेडियम जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल मिलने की भी संभावना है। यदि यह संभावना साकार होती है, तो यह क्षेत्र देश के सबसे महत्वपूर्ण बहु-खनिज क्षेत्रों में शामिल हो जाएगा। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि यह खोज मध्य प्रदेश को भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनाने के साथ-साथ भारत को हरित ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी सहायक होगी।

आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदेश की खनिज नीतियाँ और कोल इंडिया जैसी कंपनियों की भागीदारी मिलकर मध्य प्रदेश को वैश्विक ग्रेफाइट आपूर्ति मानचित्र पर किस तरह स्थापित करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'क्रिटिकल मिनरल हब' की घोषणा और ज़मीनी हकीकत के बीच की दूरी को नज़रअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। GSI का अनुमान और कोल इंडिया का प्रवेश सकारात्मक संकेत हैं, पर भारत में खनन परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी, भूमि अधिग्रहण और प्रसंस्करण अवसंरचना की कमी जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। वेनेडियम की 'संभावना' और व्यावसायिक दोहन के बीच वर्षों का अंतर हो सकता है। बिना स्पष्ट समयसीमा और निवेश प्रतिबद्धता के, यह घोषणा राजनीतिक आख्यान से अधिक कुछ और बनने के लिए संघर्ष कर सकती है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश को 'क्रिटिकल मिनरल हब' क्यों कहा जा रहा है?
बैतूल से आलीराजपुर तक फैली खनिज बेल्ट में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के विशाल भंडार मिले हैं, जो EV, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योगों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। GSI ने अकेले बैतूल में 1.1 करोड़ मीट्रिक टन ग्रेफाइट का अनुमान लगाया है, जिससे MP देश के अग्रणी ग्रेफाइट राज्यों में शामिल हो गया है।
बैतूल के ग्रेफाइट भंडार कितने बड़े हैं?
भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार, अकेले बैतूल जिले में लगभग 1.1 करोड़ मीट्रिक टन ग्रेफाइट संसाधन हैं। चिखलार, गौठाना और गोलीघाट इस जिले के प्रमुख ग्रेफाइट ब्लॉक हैं।
कोल इंडिया लिमिटेड का इसमें क्या रोल है?
कोल इंडिया लिमिटेड ने गैर-कोयला खनन क्षेत्र में विविधीकरण करते हुए आलीराजपुर जिले के खट्टाली छोटी ग्रेफाइट ब्लॉक का अधिग्रहण किया है। इससे मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक ग्रेफाइट खनन का रास्ता खुला है।
इस ग्रेफाइट खनन से किन उद्योगों को फायदा होगा?
यहाँ का ग्रेफाइट इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी, ऊर्जा भंडारण प्रणाली, इलेक्ट्रोड निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के लिए उपयुक्त माना जाता है। इससे भारत को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
क्या बैतूल में ग्रेफाइट के अलावा अन्य खनिज भी मिल सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, बैतूल क्षेत्र के ग्रेफाइट शिस्ट में वेनेडियम जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल मिलने की संभावना है। यदि यह संभावना साकार होती है, तो बैतूल देश के सबसे महत्वपूर्ण बहु-खनिज क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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