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मंडला नगर पालिका सीएमओ गजानन नाफड़े ₹2 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

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मंडला नगर पालिका सीएमओ गजानन नाफड़े ₹2 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

सारांश

मध्य प्रदेश के मंडला में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई — नगर पालिका सीएमओ गजानन नाफड़े ₹2 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार। ठेकेदार ने ₹15 लाख के भुगतान के लिए ₹4 लाख की माँग का आरोप लगाया था।

मुख्य बातें

मंडला नगर पालिका परिषद के सीएमओ गजानन नाफड़े को 25 सितंबर 2026 को ₹2 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।
शिकायतकर्ता ठेकेदार ज्ञानचंद बैन ने आरोप लगाया कि नाफड़े ने ₹15 लाख के भुगतान के लिए ₹4 लाख (12%) की रिश्वत माँगी।
पत्नी मंजू बैन की फर्म को एलईडी लाइट व फिटकरी आपूर्ति ठेके के तहत ₹39 लाख 23 हजार का भुगतान पहले ही हो चुका था।
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जबलपुर में शिकायत दर्ज होने के बाद सत्यापन एवं जाल बिछाकर गिरफ्तारी की गई।
आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) गजानन नाफड़े को लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को ₹2 लाख की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह राशि एक सरकारी पंजीकृत ठेकेदार से ठेका भुगतान जारी करने के एवज में माँगी गई थी।

शिकायत कैसे दर्ज हुई

ठेकेदार ज्ञानचंद बैन और उनकी पत्नी मंजू बैन दोनों शासकीय पंजीकृत ठेकेदार हैं। मंजू बैन के नाम पर पंजीकृत फर्म एम एस पलक बैन को मंडला नगर पालिका द्वारा वर्ष 2024-25 और 2025-26 में एलईडी लाइट तथा फिटकरी की आपूर्ति का ठेका दिया गया था। इसके अलावा ज्ञानचंद को पाइप जॉइंट और वाटर कूलर सप्लाई का कार्यादेश मिला था।

ज्ञानचंद के अनुसार, मंजू बैन के कार्य का ₹39 लाख 23 हजार का भुगतान पहले ही हो चुका था। जब वे अपने ₹15 लाख के भुगतान के लिए सीएमओ गजानन नाफड़े से मिले, तो नाफड़े ने पत्नी के कार्य के भुगतान के एवज में 12 प्रतिशत यानी ₹4 लाख की माँग रखी और यह भी स्पष्ट किया कि यह राशि मिलने के बाद ही उनके ₹15 लाख का भुगतान किया जाएगा।

लोकायुक्त की कार्रवाई

ज्ञानचंद बैन ने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जबलपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई। लोकायुक्त ने शिकायत का सत्यापन किया और पाया कि आरोपी सीएमओ ₹2 लाख की पहली किस्त लेने को तैयार हैं। इसके बाद 25 सितंबर को कार्यालय नगर पालिका परिषद मंडला में नाफड़े को ₹2 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।

कानूनी कार्रवाई

आरोपी गजानन नाफड़े के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन) के तहत मामला दर्ज किया गया है। लोकायुक्त पुलिस आगे की जाँच जारी रखे हुए है।

आम जनता पर असर

यह मामला उजागर करता है कि किस प्रकार सरकारी ठेकेदारों को वैध भुगतान पाने के लिए रिश्वत देने पर मजबूर किया जाता है, जिससे न केवल सार्वजनिक कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होती है बल्कि छोटे ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति भी कमज़ोर होती है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लोकायुक्त द्वारा इस वर्ष सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध रिश्वतखोरी की ऐसी कई कार्रवाइयाँ की जा चुकी हैं।

क्या होगा आगे

लोकायुक्त की जाँच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि क्या रिश्वत की माँग केवल इसी मामले तक सीमित थी या पूर्व में भी ऐसे लेन-देन हुए हैं। न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद आरोपी को निलंबन और विभागीय कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी अगले भुगतान के लिए 12 प्रतिशत 'कमीशन' माँगा गया — यह संकेत देता है कि रिश्वत प्रणालीगत है, अपवाद नहीं। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से नागरिकों का संस्था में भरोसा बढ़ता है, लेकिन असली सुधार तब होगा जब विभागीय निगरानी इतनी मज़बूत हो कि ठेकेदारों को शिकायत तक पहुँचने की ज़रूरत ही न पड़े।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंडला सीएमओ गजानन नाफड़े को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया?
गजानन नाफड़े को लोकायुक्त पुलिस ने 25 सितंबर 2026 को नगर पालिका परिषद मंडला के कार्यालय में ₹2 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह रिश्वत सरकारी ठेकेदार के भुगतान को जारी करने के बदले माँगी गई थी।
रिश्वत की माँग क्यों की गई थी?
ठेकेदार ज्ञानचंद बैन के ₹15 लाख के भुगतान को रोककर सीएमओ नाफड़े ने उनकी पत्नी मंजू बैन के ₹39 लाख 23 हजार के पूर्व-भुगतान के एवज में 12 प्रतिशत यानी ₹4 लाख की माँग की थी। दोनों पति-पत्नी नगर पालिका के पंजीकृत ठेकेदार हैं।
लोकायुक्त ने गिरफ्तारी कैसे की?
ठेकेदार ज्ञानचंद बैन की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जबलपुर ने शिकायत का सत्यापन किया। जब आरोपी सीएमओ ₹2 लाख की पहली किस्त लेने पर राज़ी हुए, तब जाल बिछाकर उन्हें रंगे हाथों पकड़ा गया।
आरोपी के खिलाफ कौन सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
गजानन नाफड़े के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन) के तहत मामला दर्ज किया गया है। लोकायुक्त पुलिस आगे की जाँच जारी रखे हुए है।
इस मामले का मंडला नगर पालिका के ठेकेदारों पर क्या असर पड़ेगा?
इस गिरफ्तारी से अन्य ठेकेदारों को यह संदेश मिलता है कि रिश्वत के मामले में लोकायुक्त में शिकायत कारगर हो सकती है। साथ ही, जाँच के दायरे में यह भी देखा जाएगा कि पूर्व में भी इसी प्रकार के लेन-देन हुए थे या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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