मध्य प्रदेश माटी कला बोर्ड: 2 साल से अध्यक्ष पद खाली, प्रजापति समाज ने CM को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष का पद दो वर्षों से रिक्त पड़ा है, जिसके चलते मिट्टी शिल्प से जुड़े प्रजापति समाज की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अखिल भारतीय प्रजापति कुंभकार संघ के अतिरिक्त प्रदेश अध्यक्ष सतीश आहेलिया ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर शीघ्र नियुक्ति की माँग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बोर्ड अपने स्थापना उद्देश्यों पर कभी खरा नहीं उतरा।
बोर्ड की स्थापना और उद्देश्य
मध्य प्रदेश में माटी कला बोर्ड की स्थापना वर्ष 2008 में की गई थी। इसका मूल उद्देश्य मिट्टी से मूर्तियाँ, खिलौने, बर्तन और ईंट जैसे उत्पाद बनाने वाले प्रजापति समाज के लोगों के व्यवसाय को बढ़ावा देना और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारना था। बोर्ड के ज़रिये संबंधित उद्योगों को सहायता और अनुदान देने का प्रावधान भी किया गया था।
मुख्य शिकायतें और योजनाओं की विफलता
सतीश आहेलिया के अनुसार, प्रत्येक जिला पंचायत में माटी कला बोर्ड योजना के क्रियान्वयन हेतु जिला अधिकारी नियुक्त हैं, फिर भी समाज को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने बताया कि बोर्ड के माध्यम से प्रजापति समाज को मिट्टी, बर्तन, मूर्तियाँ एवं अन्य सामग्री बेचने के लिए सरकार ने कोई ठोस सुविधा नहीं दी।
उनका कहना है कि समाज को निःशुल्क मिट्टी, ईंट भट्टे के लिए भूमि, पानी, उपयुक्त बाज़ार, बिजली और बैंकों से कम ब्याज दर पर ऋण मिलना चाहिए था — किंतु इनमें से कोई भी सुविधा धरातल पर नहीं उतरी।
दो वर्षों से नेतृत्वविहीन बोर्ड
आहेलिया ने रेखांकित किया कि विगत दो वर्षों से बोर्ड में न तो अध्यक्ष की नियुक्ति हुई है और न ही सदस्यों की। इसके कारण प्रजापति समाज की भूमिका और प्रतिनिधित्व बोर्ड में व्यावहारिक रूप से समाप्त हो गया है। उनके अनुसार, माटी कला बोर्ड अब महज नाम का ही रह गया है।
आम जनता पर असर
लंबे समय से प्रजापति समाज प्रत्येक पंचायत में ईंट और बर्तन बनाने के लिए मिट्टी की माँग करता आ रहा है, लेकिन भूमि आरक्षित न होने के कारण मिट्टी उपलब्ध नहीं हो पा रही। इसके परिणामस्वरूप यह समाज पारंपरिक रोज़गार से धीरे-धीरे कट रहा है और आर्थिक रूप से अत्यंत कमज़ोर वर्ग में शामिल हो गया है।
क्या होगा आगे
प्रजापति समाज की माँग है कि मुख्यमंत्री शीघ्र अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति करें, ताकि बोर्ड सक्रिय हो सके और योजनाओं का लाभ वास्तव में ज़रूरतमंद शिल्पकारों तक पहुँचे। यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस माँग पर कितनी जल्दी कार्रवाई करती है।