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मदुरै के दुकानदार नेशनलम मणि को मिला PM कार्यालय से जवाबी पत्र, बोले- 'जीवन का सबसे बड़ा सम्मान'

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मदुरै के दुकानदार नेशनलम मणि को मिला PM कार्यालय से जवाबी पत्र, बोले- 'जीवन का सबसे बड़ा सम्मान'

सारांश

मदुरै की एक छोटी दुकान, छह दशक पुरानी विरासत, और सरकारी ऋण योजना से मिला नया सहारा — नेशनलम मणि की कहानी तब और खास हो गई जब धन्यवाद पत्र के जवाब में खुद PMO ने संपर्क किया। उनके लिए यह पत्र किसी पुरस्कार से कम नहीं।

मुख्य बातें

मदुरै के छोटे कारोबारी नेशनलम मणि को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जवाबी पत्र मिला।
मणि के पिता ने 1962 में दुकान शुरू की थी; वह पीढ़ियों से इसे चला रहे हैं।
उन्होंने ₹10,000 से शुरुआत कर ₹50,000 तक के चार ऋण लिए और तीन पूरी तरह चुका दिए।
चौथा ऋण केनरा बैंक के माध्यम से स्वीकृत, जिसकी किस्तें अभी चल रही हैं।
पत्र भेजने के 10 से 15 दिन के भीतर PMO से जवाब मिला।
मणि ने इसे 'जीवन का सबसे बड़ा सम्मान' बताया।

तमिलनाडु के मदुरै के छोटे कारोबारी नेशनलम मणि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय से व्यक्तिगत जवाबी पत्र प्राप्त हुआ है। 3 अगस्त को सामने आई इस खबर ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। मणि ने केंद्र सरकार की लघु कारोबारी ऋण योजना से लाभान्वित होने के बाद प्रधानमंत्री को धन्यवाद पत्र भेजा था, जिसके जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने उनसे सीधे संपर्क किया और पत्र भेजा।

छह दशक पुरानी दुकान और सरकारी योजना का सहारा

नेशनलम मणि ने बताया कि उनके पिता ने वर्ष 1962 में यह छोटी दुकान शुरू की थी। पीढ़ियों से चली आ रही इस दुकान को परिवार ने मिलकर आगे बढ़ाया। जब प्रधानमंत्री मोदी ने शून्य शेष राशि वाले बैंक खाते खोलने की योजना शुरू की, तब मणि भी बैंक गए और वहाँ उन्हें रेहड़ी-पटरी व छोटे कारोबारियों के लिए उपलब्ध ऋण योजना की जानकारी मिली।

चरणबद्ध तरीके से लिए लोन, हर बार चुकाया समय पर

मणि ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले ₹10,000 का ऋण लिया और उसे समय पर चुकाया। इसके बाद ₹20,000 और फिर ₹50,000 का ऋण लिया — दोनों का भुगतान भी तय समय में कर दिया। चौथी बार ऋण माँगने पर अधिकारियों ने एक माह प्रतीक्षा करने को कहा, और उसी अवधि के भीतर केनरा बैंक के माध्यम से ₹50,000 का चौथा ऋण स्वीकृत हो गया, जिसकी किस्तें वह अभी चुका रहे हैं।

मणि के अनुसार, 'कम ब्याज पर ज़रूरत के वक्त ऋण मिलने से मैं अपना कारोबार सुचारु रूप से चला पाया और परिवार का पालन-पोषण बिना किसी बड़ी कठिनाई के कर सका।'

अखबार में साक्षात्कार पढ़कर जागा धन्यवाद का भाव

मणि ने बताया कि एक दिन उन्होंने अखबार में प्रधानमंत्री मोदी का एक साक्षात्कार पढ़ा, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार ने देशभर के रेहड़ी-पटरी कारोबारियों को लाखों करोड़ रुपये का लाभ पहुँचाया है। यह पढ़कर उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद पत्र लिखने का निर्णय किया। दुकान पर आने वाले एक ग्राहक ने अंग्रेजी में वह पत्र तैयार करने में मदद की, जिसे मणि ने टाइप करके नई दिल्ली भेज दिया।

PMO से फोन और फिर जवाबी पत्र

मणि के अनुसार, दिल्ली में अधिकारियों ने उनका पत्र पढ़ा और सीधे फोन पर बात भी की। इसके लगभग 10 से 15 दिन बाद उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जवाबी पत्र प्राप्त हुआ। जब कूरियर पहुँचा तो आसपास के लोगों ने अनुमान लगाया कि शायद इसमें कोई आर्थिक सहायता होगी, लेकिन मणि के लिए प्रधानमंत्री का पत्र ही सबसे बड़ा उपहार था।

उन्होंने कहा, 'देश के प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रशंसा और जवाबी पत्र मिलना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। मैं इसे जीवनभर नहीं भूलूंगा। यह पत्र मेरे लिए किसी अनमोल धरोहर से कम नहीं है।'

छोटे कारोबारियों से अपील

मणि ने देशभर के लघु व्यवसायियों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं से अपील की कि यदि सभी योजना के नियमों का सही ढंग से पालन करें और सहयोग करें, तो यह योजना और मज़बूत होगी तथा अधिक लोगों को इसका लाभ मिलेगा। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाएँ ज़मीनी स्तर पर किस तरह आम नागरिकों के जीवन में बदलाव ला सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे व्यापक संदर्भ में देखना ज़रूरी है। रेहड़ी-पटरी ऋण योजना से लाखों लोग लाभान्वित हुए हैं, यह सरकारी दावा है — लेकिन स्वतंत्र आँकड़े बताते हैं कि अनौपचारिक क्षेत्र के कारोबारियों की बड़ी संख्या अभी भी बैंकिंग प्रणाली से बाहर है। PMO का व्यक्तिगत पत्र एक सकारात्मक संकेत है, पर असली सवाल यह है कि क्या यह योजना उन करोड़ों तक पहुँच रही है जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। एक पत्र की खबर से परे, नीतिगत पारदर्शिता और लाभार्थियों के सत्यापन-योग्य आँकड़े ही इस योजना की वास्तविक सफलता का पैमाना होंगे।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनलम मणि कौन हैं और उन्हें PMO से पत्र क्यों मिला?
नेशनलम मणि तमिलनाडु के मदुरै के एक छोटे कारोबारी हैं, जिनके पिता ने 1962 में दुकान शुरू की थी। उन्होंने सरकारी ऋण योजना से लाभान्वित होने के बाद प्रधानमंत्री को धन्यवाद पत्र लिखा, जिसके जवाब में PMO ने उनसे फोन पर संपर्क किया और जवाबी पत्र भेजा।
मणि ने किस सरकारी ऋण योजना का लाभ उठाया?
मणि ने रेहड़ी-पटरी और छोटे कारोबारियों के लिए उपलब्ध केंद्र सरकार की ऋण योजना का लाभ उठाया। उन्होंने ₹10,000 से शुरुआत कर ₹50,000 तक के चार ऋण लिए, जिनमें से तीन पूरी तरह चुका दिए और चौथा केनरा बैंक के माध्यम से चल रहा है।
PMO से जवाब मिलने में कितना समय लगा?
मणि के अनुसार, पत्र भेजने के बाद दिल्ली से फोन आया और लगभग 10 से 15 दिन के भीतर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जवाबी पत्र प्राप्त हुआ।
क्या PMO के पत्र में कोई आर्थिक सहायता थी?
नहीं। मणि ने बताया कि आसपास के लोगों को लगा कि कूरियर में आर्थिक सहायता होगी, लेकिन उसमें केवल जवाबी पत्र था। मणि के लिए यह पत्र ही सबसे बड़ा उपहार और सम्मान था।
मणि ने अन्य छोटे कारोबारियों को क्या संदेश दिया?
मणि ने देशभर के लघु व्यवसायियों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं से अपील की कि वे योजना के नियमों का सही ढंग से पालन करें और सहयोग करें, ताकि यह योजना और मज़बूत हो और अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।
राष्ट्र प्रेस
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