21 अगस्त 2026
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महा वॉकथॉन 2026: मिट्टी-जल संरक्षण पर मंत्री इंद्रनील नाइक और संजय राठौड़ ने युवाओं से माँगा सहयोग

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महा वॉकथॉन 2026: मिट्टी-जल संरक्षण पर मंत्री इंद्रनील नाइक और संजय राठौड़ ने युवाओं से माँगा सहयोग

सारांश

महाराष्ट्र में 'महा वॉकथॉन 2026 – वॉक फॉर वॉटर' सिर्फ एक पैदल मार्च नहीं था — यह मिट्टी और पानी को लेकर सरकार की बढ़ती बेचैनी का सार्वजनिक इज़हार था। मंत्री नाइक और राठौड़ ने युवाओं को इस संरक्षण अभियान का केंद्र बनाने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

महा वॉकथॉन 2026 – वॉक फॉर वॉटर का आयोजन 21 अगस्त 2026 को मुंबई में हुआ।
राज्य मंत्री इंद्रनील नाइक ने बताया कि जल-मृदा संरक्षण विभाग का गठन 1991-92 में और संबंधित कॉर्पोरेशन 1999 में हुआ था।
मंत्री संजय राठौड़ ने मिट्टी-पानी को महाराष्ट्र की सबसे मूल्यवान प्राकृतिक संपत्ति बताते हुए युवाओं की भागीदारी को अनिवार्य बताया।
राठौड़ ने शिवसेना चुनाव चिह्न विवाद पर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार आगे का रास्ता तय होगा।
विधान परिषद उपसभापति सचिन अहीर ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने को सम्मान का अवसर बताया।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों ने 21 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित 'महा वॉकथॉन 2026 – वॉक फॉर वॉटर' कार्यक्रम में मिट्टी और पानी के संरक्षण को राज्य की सबसे बड़ी प्राकृतिक चुनौतियों में से एक बताया। राज्य मंत्री इंद्रनील नाइक और मंत्री संजय राठौड़ ने एकसुर में कहा कि इन संसाधनों की रक्षा केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह समाज के हर वर्ग — विशेषकर युवाओं — की साझा जवाबदेही है।

मुख्य घटनाक्रम

राज्य मंत्री इंद्रनील नाइक ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि महाराष्ट्र में जल और मृदा संरक्षण की परंपरा दशकों पुरानी है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुधाकरराव राजूसिंग नाइक की दूरदर्शिता का उल्लेख करते हुए बताया कि इस दिशा में संस्थागत काम की शुरुआत उन्हीं के कार्यकाल में हुई थी। नाइक के अनुसार, संबंधित विभाग का गठन 1991-92 के आसपास हुआ और 1999 में एक कॉर्पोरेशन भी स्थापित किया गया, जिसके पहले अध्यक्ष सुधाकरराव नाइक स्वयं रहे।

नाइक ने कहा कि खेती के लिए उपजाऊ भूमि अनिवार्य है, किंतु यदि मिट्टी का कटाव निरंतर जारी रहा तो जमीन की उत्पादन क्षमता धीरे-धीरे नष्ट हो जाएगी। उन्होंने ज़ोर दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी और जल संसाधनों को सहेजना आज की सबसे अहम जिम्मेदारी है।

राठौड़ की अपील — युवा बनें संरक्षण के वाहक

मंत्री संजय राठौड़ ने मिट्टी और पानी को देश तथा महाराष्ट्र की सबसे मूल्यवान प्राकृतिक संपत्ति करार दिया। उन्होंने कहा कि जल एवं मृदा संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देना होगा, क्योंकि किसी एक विभाग के प्रयास से यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।

राठौड़ ने विकसित भारत और विकसित महाराष्ट्र की संकल्पना में युवाओं की भूमिका को केंद्रीय बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने आसपास के विकास पर सवाल पूछने और प्रकृति की ऐतिहासिक एवं सामाजिक विरासत को समझने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

शिवसेना चुनाव चिह्न विवाद पर राठौड़ का बयान

कार्यक्रम के इतर मंत्री राठौड़ ने शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे कानूनी विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय जो भी निर्देश देगा, उसके अनुसार आगे का रास्ता तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के अनुरूप पहचान की लड़ाई था और 'सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।'

वंदे मातरम और कानून की समानता पर अहीर का वक्तव्य

विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर ने वंदे मातरम के मुद्दे पर कहा कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान है और हर व्यक्ति को उसका पालन करने का अधिकार एवं दायित्व दोनों हैं। उन्होंने राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर को सम्मान और गर्व का क्षण बताया।

आगे की राह

महा वॉकथॉन जैसे आयोजन यह संकेत देते हैं कि महाराष्ट्र सरकार जल-मृदा संरक्षण को जन-भागीदारी के माध्यम से मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्सों में अनियमित वर्षा और भूजल स्तर में गिरावट की चिंताएँ बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अभियानों की सफलता तब ही सुनिश्चित होगी जब ग्रामीण और शहरी युवा इन मुद्दों को अपनी दैनिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाएँ।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये पैदल मार्च ज़मीनी नीतिगत बदलाव में तब्दील होंगे। महाराष्ट्र के कई जिलों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और मृदा कटाव की समस्या विदर्भ व मराठवाड़ा में गंभीर रूप ले चुकी है — केवल भाषणों से यह संकट नहीं टलेगा। 1999 में बने कॉर्पोरेशन की उपलब्धियों का कोई ठोस सार्वजनिक मूल्यांकन सामने नहीं आया है। बिना मापन-योग्य लक्ष्यों और जवाबदेही के ढाँचे के, यह अभियान भी अच्छे इरादों की लंबी सूची में एक और नाम बनकर रह सकता है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महा वॉकथॉन 2026 – वॉक फॉर वॉटर क्या है?
यह महाराष्ट्र सरकार द्वारा 21 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित एक जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य मिट्टी और पानी के संरक्षण के प्रति आम नागरिकों — विशेषकर युवाओं — को संवेदनशील बनाना है। इसमें राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों ने भाग लिया।
मंत्री इंद्रनील नाइक ने जल-मृदा संरक्षण के इतिहास पर क्या कहा?
नाइक ने बताया कि महाराष्ट्र में जल-मृदा संरक्षण विभाग का गठन 1991-92 के आसपास हुआ था और 1999 में एक कॉर्पोरेशन भी बनाया गया, जिसके पहले अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुधाकरराव राजूसिंग नाइक थे। उन्होंने इसे दूरदर्शी पहल बताया।
मंत्री संजय राठौड़ ने युवाओं की भूमिका पर क्या कहा?
राठौड़ ने कहा कि विकसित भारत और विकसित महाराष्ट्र के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उनके अनुसार युवाओं को देश और राज्य की प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक संपत्तियों को अपनी साझा जिम्मेदारी मानना होगा।
शिवसेना चुनाव चिह्न विवाद पर राठौड़ का क्या रुख है?
राठौड़ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय जो भी निर्देश देगा, उसके अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शुरू हुए आंदोलन को बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के अनुरूप पहचान की लड़ाई बताया।
वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर विधान परिषद उपसभापति ने क्या कहा?
विधान परिषद उपसभापति सचिन अहीर ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह उसका पालन करे। उन्होंने राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने को सम्मान और गर्व का अवसर बताया।
राष्ट्र प्रेस
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