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अयोध्या में महंत नृत्य गोपाल दास का जन्मोत्सव और गुरु राम मनोहर दास की पुण्यतिथि पर भव्य धार्मिक आयोजन

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अयोध्या में महंत नृत्य गोपाल दास का जन्मोत्सव और गुरु राम मनोहर दास की पुण्यतिथि पर भव्य धार्मिक आयोजन

सारांश

अयोध्या में महंत नृत्य गोपाल दास का नौ दिवसीय जन्मोत्सव 28 जून को संपन्न हुआ — उसी दिन जब उनके गुरु राम मनोहर दास की पुण्यतिथि थी। श्रीराम महायज्ञ, राम कथा और भंडारे के साथ यह आयोजन अयोध्या की जीवंत आध्यात्मिक परंपरा का प्रमाण बना।

मुख्य बातें

महंत नृत्य गोपाल दास का जन्मोत्सव 19 से 28 जून तक अयोध्या में मनाया गया।
श्रीराम महायज्ञ , अष्टोत्सव रामायण पाठ , वाल्मीकि रामायण पाठ , नौ दिवसीय राम कथा और अन्न क्षेत्र का आयोजन हुआ।
27 जून को धर्माचार्यों का विशेष सम्मेलन संपन्न हुआ।
28 जून को गुरु राम मनोहर दास की पुण्यतिथि पर विशेष अनुष्ठान किए गए।
देश-विदेश से संत और हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में सम्मिलित हुए।

अयोध्या में 28 जून को महंत नृत्य गोपाल दास के जन्मोत्सव और उनके गुरु राम मनोहर दास की पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। श्री मणिराम दास जी की छावनी में देश-विदेश से पधारे संतों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह पावन समारोह संपन्न हुआ।

नौ दिवसीय जन्मोत्सव का भव्य समापन

महंत कमल नयन दास ने बताया कि महंत नृत्य गोपाल दास का जन्मोत्सव 19 जून से 28 जून तक चला। इस दौरान श्रीराम महायज्ञ, अष्टोत्सव रामायण पाठ, वाल्मीकि रामायण पाठ, राम कथा और अन्न क्षेत्र का भव्य आयोजन हुआ। उन्होंने कहा कि देश के कोने-कोने से महापुरुष इस अवसर पर पधारे। 27 जून को धर्माचार्यों का एक विशेष सम्मेलन भी आयोजित हुआ।

संतों और श्रद्धालुओं का विशाल जमावड़ा

गुप्तार घाट स्थित पंचमुखी हनुमान जी मंदिर के महंत विमल कृष्ण दास ने कहा कि गुरुदेव ने न केवल देश भर से, बल्कि दुनिया भर से संतों को इस भव्य सम्मेलन में आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि नौ दिनों तक चलने वाली श्री राम कथा में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

आध्यात्मिक परंपरा और वंशावली का महत्व

महामंडलेश्वर मदन मोहन दास ने इस अवसर पर कहा कि श्री मणिराम दास जी की छावनी इस आध्यात्मिक वंशावली की पीठ है और पूज्य स्वामी श्री 1008 नृत्य गोपाल दास जी महाराज की पवित्र परंपरा इसी पीठ से आगे बढ़ रही है। महंत कमल नयन दास जी की शिष्या लक्ष्मी दास ने बताया कि आज का दिन दोहरे महत्व का है — एक ओर गुरु महाराज की जयंती है, तो दूसरी ओर उन्हीं के गुरु की पुण्यतिथि, जिनके मार्गदर्शन में इस परंपरा की नींव पड़ी।

भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी

भक्त सुनीता साहू ने बताया कि वे बचपन से ही महाराज जी से जुड़ी हैं और उनके माता-पिता ने भी गुरु दीक्षा ली थी। दिल्ली से आई श्रद्धालु सूची साहू ने कहा कि वे पहली बार अयोध्या आई हैं और राम मंदिर के दर्शन कर उन्हें अपार शांति का अनुभव हुआ। आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु भंडारे में सम्मिलित हुए।

आगे की राह

यह आयोजन अयोध्या की आध्यात्मिक विरासत को और सुदृढ़ करता है। धर्माचार्यों के सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श से इस परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की दिशा में नए संकल्प लिए गए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस आध्यात्मिक वंशावली की सार्वजनिक पुनः प्रतिष्ठा है जिसने राम मंदिर आंदोलन में केंद्रीय भूमिका निभाई। गौरतलब है कि देश-विदेश से संतों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि अयोध्या अब केवल तीर्थस्थल नहीं, बल्कि एक सक्रिय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभर रही है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महंत नृत्य गोपाल दास का जन्मोत्सव कब और कहाँ मनाया गया?
महंत नृत्य गोपाल दास का जन्मोत्सव 19 से 28 जून तक अयोध्या में श्री मणिराम दास जी की छावनी में मनाया गया। नौ दिनों तक चले इस आयोजन में श्रीराम महायज्ञ, राम कथा और धर्माचार्यों का सम्मेलन शामिल रहा।
गुरु राम मनोहर दास कौन थे और उनकी पुण्यतिथि का क्या महत्व है?
राम मनोहर दास महंत नृत्य गोपाल दास के गुरु थे, जिनके मार्गदर्शन में अयोध्या की इस आध्यात्मिक परंपरा की नींव पड़ी। उनकी पुण्यतिथि 28 जून को महंत जी की जयंती के साथ ही पड़ती है, जिससे यह दिन दोहरे आध्यात्मिक महत्व का बन जाता है।
इस आयोजन में कौन-कौन से धार्मिक कार्यक्रम हुए?
नौ दिवसीय जन्मोत्सव में श्रीराम महायज्ञ, अष्टोत्सव रामायण पाठ, वाल्मीकि रामायण पाठ, श्री राम कथा और अन्न क्षेत्र का आयोजन हुआ। 27 जून को धर्माचार्यों का विशेष सम्मेलन भी संपन्न हुआ।
श्री मणिराम दास जी की छावनी का क्या महत्व है?
श्री मणिराम दास जी की छावनी अयोध्या में इस आध्यात्मिक वंशावली की मुख्य पीठ है। महामंडलेश्वर मदन मोहन दास के अनुसार, पूज्य स्वामी श्री 1008 नृत्य गोपाल दास जी महाराज की परंपरा इसी पीठ से आगे बढ़ती है।
इस आयोजन में कितने श्रद्धालु शामिल हुए?
आसपास के इलाकों से हजारों श्रद्धालु भंडारे और धार्मिक अनुष्ठानों में सम्मिलित हुए। देश-विदेश से आए संत और भक्त भी इस अवसर पर अयोध्या पहुँचे।
राष्ट्र प्रेस
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