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ग्वालियर व्यापमं घोटाला: स्पेशल कोर्ट ने अमितेश और विपिन कुमार को सुनाई 3 साल की कठोर कैद

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ग्वालियर व्यापमं घोटाला: स्पेशल कोर्ट ने अमितेश और विपिन कुमार को सुनाई 3 साल की कठोर कैद

सारांश

ग्वालियर की व्यापमं स्पेशल कोर्ट ने परीक्षा में फर्जीवाड़े के एक दशक पुराने मामले में दो दोषियों को 3 साल की कठोर कैद सुनाई। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर CBI ने जाँच की थी और 2016 में चार्जशीट दाखिल हुई थी।

मुख्य बातें

ग्वालियर व्यापमं स्पेशल कोर्ट ने अमितेश (सॉल्वर) और विपिन कुमार (उम्मीदवार) को दोषी ठहराया।
दोनों को 3 वर्ष की कठोर कैद और प्रत्येक को ₹5,000 जुर्माना लगाया गया।
मूल FIR 9 मार्च 2014 को कैंट पुलिस स्टेशन, गुना में दर्ज हुई थी।
CBI ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर 5 अगस्त 2015 को मामला पुनः पंजीकृत किया।
CBI की चार्जशीट 6 अक्टूबर 2016 को दाखिल की गई थी।
अमितेश गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश और विपिन कुमार मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित व्यापमं स्पेशल कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को परीक्षा में फर्जीवाड़े के एक मामले में दो आरोपियों — अमितेश (सॉल्वर) और विपिन कुमार (मूल उम्मीदवार) — को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष की कठोर कैद और प्रत्येक पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया। यह फैसला मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (व्यापमं) घोटाले की उस श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें दूसरे की जगह परीक्षा देने के मामले अदालतों में वर्षों से चल रहे हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

इस मामले की शुरुआत 9 मार्च 2014 को हुई, जब गुना के सरकारी पीजी कॉलेज के परीक्षा केंद्र अधीक्षक की शिकायत पर कैंट पुलिस स्टेशन, गुना में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई। परीक्षा के दौरान इनविजिलेटर ने एक परीक्षार्थी की तस्वीर और रिकॉर्ड में दर्ज फोटो में अंतर पाया, जिसके बाद उसे परीक्षा कक्ष से ही हिरासत में ले लिया गया।

पकड़े गए व्यक्ति ने अपनी पहचान गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश निवासी अमितेश के रूप में बताई और स्वीकार किया कि वह मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश के मूल उम्मीदवार विपिन कुमार की जगह परीक्षा दे रहा था।

सीबीआई की जाँच और चार्जशीट

सर्वोच्च न्यायालय के वीपी (सिविल) नंबर 372/2015 और 417/2015 में दिए गए आदेशों के आधार पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 5 अगस्त 2015 को इस मामले को पुनः पंजीकृत किया। जाँच पूरी होने के बाद 6 अक्टूबर 2016 को CBI ने अमितेश और विपिन कुमार दोनों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की।

गौरतलब है कि व्यापमं घोटाले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वयं CBI जाँच का आदेश दिया था, जो इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है। यह घोटाला मध्य प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं में व्यापक धांधली का प्रतीक बन चुका है।

अदालत का फैसला

स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने अमितेश को 'सॉल्वर' (दूसरे की जगह परीक्षा देने वाला) और विपिन कुमार को 'उम्मीदवार' के रूप में दोषी माना। दोनों को तीन वर्ष की कठोर कैद के साथ-साथ ₹5,000-₹5,000 का जुर्माना भी भरना होगा।

व्यापमं घोटाले का व्यापक संदर्भ

व्यापमं घोटाला मध्य प्रदेश के सबसे बड़े भर्ती घोटालों में से एक माना जाता है, जिसमें सरकारी नौकरियों और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए थे। सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद CBI को जाँच सौंपी गई और देशभर में दर्जनों मामले अलग-अलग अदालतों में विचाराधीन हैं। यह फैसला उन मामलों में से एक का निपटारा है।

आगे क्या

दोनों दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। व्यापमं से जुड़े अनेक अन्य मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। यह फैसला परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग करने वाले आंदोलनों के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पीड़ितों के लिए न्याय की राह को और लंबा बनाते हैं। असली सवाल यह है कि परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार — बायोमेट्रिक सत्यापन, केंद्रीकृत निगरानी — कितनी तेजी से लागू हो रहे हैं, क्योंकि केवल दंड से घोटालों की जड़ नहीं कटती।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्वालियर व्यापमं मामले में किसे और क्या सजा मिली?
स्पेशल कोर्ट ने अमितेश (सॉल्वर) और विपिन कुमार (मूल उम्मीदवार) दोनों को दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष की कठोर कैद और प्रत्येक पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया। अमितेश ने विपिन कुमार की जगह परीक्षा दी थी।
यह व्यापमं मामला कब और कैसे सामने आया?
9 मार्च 2014 को गुना के सरकारी पीजी कॉलेज में परीक्षा के दौरान इनविजिलेटर ने परीक्षार्थी की तस्वीर और रिकॉर्ड में अंतर पाया और उसे पकड़ लिया। इसके बाद कैंट पुलिस स्टेशन, गुना में FIR दर्ज की गई।
इस मामले की CBI जाँच क्यों हुई?
सर्वोच्च न्यायालय ने व्यापमं घोटाले की व्यापकता को देखते हुए CBI जाँच का आदेश दिया था। इसी आदेश के तहत CBI ने 5 अगस्त 2015 को इस मामले को पुनः पंजीकृत किया और 6 अक्टूबर 2016 को चार्जशीट दाखिल की।
व्यापमं घोटाला क्या है?
व्यापमं (मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल) घोटाला मध्य प्रदेश में सरकारी भर्ती और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई धांधली का मामला है। इसमें सॉल्वर गैंग, रिश्वत और फर्जी उम्मीदवारों के सैकड़ों मामले सामने आए थे।
दोषियों के पास अब क्या विकल्प हैं?
स्पेशल कोर्ट के फैसले के विरुद्ध दोनों दोषी उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। व्यापमं से जुड़े अनेक अन्य मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं।
राष्ट्र प्रेस
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