महाराष्ट्र में 46.8°C तापमान का कहर, विदर्भ में लू से जनजीवन ठप और फसलें सूखीं
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 23 मई 2026 को भीषण गर्मी का प्रकोप चरम पर पहुँच गया, जहाँ अमरावती में तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कई जिलों में लू की स्थिति बनी हुई है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और किसानों की फसलें सूखने के कगार पर हैं।
प्रभावित जिले और स्थिति
अमरावती के अलावा वर्धा, चंद्रपुर और अकोला जिलों में भी तापमान लगातार ऊँचे स्तर पर बना हुआ है। दिन के समय बाज़ारों और सड़कों पर भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम देखी जा रही है, क्योंकि लोग घरों से निकलने से परहेज कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने निवासियों को दोपहर के समय बाहर न निकलने की सलाह दी है।
खेती और किसानों पर असर
गर्मी का सबसे गहरा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। खेतों में खड़ी फसलें झुलसने लगी हैं और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता घटती जा रही है। स्थानीय किसानों की चिंता यह है कि यदि तापमान इसी तरह बना रहा, तो आगामी फसल चक्र पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि विदर्भ पहले से ही कृषि संकट के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
पर्यावरण असंतुलन की चेतावनी
अमरावती के एक स्थानीय निवासी ने बताया कि 'बड़ी संख्या में जंगल खत्म किए जा रहे हैं और जंगलों के बीच सीमेंट की सड़कें बनाई जा रही हैं। इंसानी गतिविधियों की वजह से प्रकृति का संतुलन बिगड़ता जा रहा है और इसका असर अब सीधे मौसम पर दिखाई दे रहा है।' उन्होंने कहा कि पहले जैसा मौसम अब नहीं रहा — पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और वनों के सिकुड़ने से तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है।
आम जनता की माँग और सुझाव
स्थानीय निवासियों ने चेताया है कि यदि पर्यावरण को इसी तरह नुकसान पहुँचता रहा, तो भविष्य में गर्मी और जल संकट और भी गहरा सकता है। उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि लोग जागरूक हों और अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ — इससे न केवल वातावरण ठंडा होगा, बल्कि वर्षा का चक्र भी बेहतर होगा और प्राकृतिक संतुलन बना रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे मध्य भारत में प्री-मॉनसून गर्मी के रिकॉर्ड टूट रहे हैं।