महिला आरक्षण के नाम पर सत्ता पर नियंत्रण की साजिश, विपक्ष की एकजुटता से विफल: शोभा ओझा
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भोपाल, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण के नाम पर सत्ता पर नियंत्रण करने की एक साज़िश बनाई थी जो अब विफल हो गई है। वास्तव में, लोकसभा में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित नहीं हो सका, जिसके चलते भाजपा कांग्रेस पर हमले कर रही है, वहीं कांग्रेस भी जवाब दे रही है।
शोभा ओझा ने संवाददाताओं के साथ बातचीत करते हुए भोपाल में कहा कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण के बहाने परिसीमन के जरिए सत्ता पर एकाधिकार जमाने की जो साजिश की थी, विपक्ष की एकजुटता ने उसे नाकाम बना दिया है। इसीलिए कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संसद में मिली इस जीत का स्वागत करती है।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण से संबंधित संशोधन विधेयक पर हुए मतदान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश अब विभाजनकारी राजनीति को नहीं स्वीकार करेगा। कुल 528 मतों में से विधेयक के पक्ष में केवल 298 मत पड़े, जबकि विरोध में 230 मत पड़े, जिसके कारण यह असंवैधानिक संशोधन पारित नहीं हो सका।
उन्होंने विपक्ष की एकता का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस और समूचा विपक्ष महिला आरक्षण के लिए 100 प्रतिशत एकजुट है। सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया गया था और अभी भी हमारी मांग स्पष्ट है कि महिलाओं को उनका हक तुरंत मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के प्रति कांग्रेस का यह दृष्टिकोण नया नहीं है। महिला सशक्तिकरण कांग्रेस की विचारधारा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वर्ष 1989 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने पंचायतों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रस्ताव रखा। इसके बाद 1992-93 में नरसिम्हा राव सरकार ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया।
इसके बाद, वर्ष 2010 में यूपीए सरकार ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया। देश भर में लाखों निर्वाचित महिला प्रतिनिधि स्थानीय शासन का हिस्सा हैं, जो कांग्रेस की नीतियों का परिणाम है।