26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महिला आरक्षण के नाम पर सत्ता पर नियंत्रण की साजिश, विपक्ष की एकजुटता से विफल: शोभा ओझा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महिला आरक्षण के नाम पर सत्ता पर नियंत्रण की साजिश, विपक्ष की एकजुटता से विफल: शोभा ओझा

सारांश

महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष शोभा ओझा ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण के नाम पर सत्ता पर एकाधिकार जमाने की साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने इस साजिश को विफल कर दिया। जानिए इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनका क्या कहना है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार का आरोप विपक्ष की एकजुटता ने साजिश को विफल किया महिलाओं के अधिकारों के लिए कांग्रेस का समर्थन महिला सशक्तिकरण कांग्रेस की विचारधारा का हिस्सा राजनीतिक भागीदारी में महिलाओं की भूमिका

भोपाल, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण के नाम पर सत्ता पर नियंत्रण करने की एक साज़िश बनाई थी जो अब विफल हो गई है। वास्तव में, लोकसभा में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित नहीं हो सका, जिसके चलते भाजपा कांग्रेस पर हमले कर रही है, वहीं कांग्रेस भी जवाब दे रही है।

शोभा ओझा ने संवाददाताओं के साथ बातचीत करते हुए भोपाल में कहा कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण के बहाने परिसीमन के जरिए सत्ता पर एकाधिकार जमाने की जो साजिश की थी, विपक्ष की एकजुटता ने उसे नाकाम बना दिया है। इसीलिए कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संसद में मिली इस जीत का स्वागत करती है।

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण से संबंधित संशोधन विधेयक पर हुए मतदान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश अब विभाजनकारी राजनीति को नहीं स्वीकार करेगा। कुल 528 मतों में से विधेयक के पक्ष में केवल 298 मत पड़े, जबकि विरोध में 230 मत पड़े, जिसके कारण यह असंवैधानिक संशोधन पारित नहीं हो सका।

उन्होंने विपक्ष की एकता का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस और समूचा विपक्ष महिला आरक्षण के लिए 100 प्रतिशत एकजुट है। सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया गया था और अभी भी हमारी मांग स्पष्ट है कि महिलाओं को उनका हक तुरंत मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के प्रति कांग्रेस का यह दृष्टिकोण नया नहीं है। महिला सशक्तिकरण कांग्रेस की विचारधारा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वर्ष 1989 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने पंचायतों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रस्ताव रखा। इसके बाद 1992-93 में नरसिम्हा राव सरकार ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया।

इसके बाद, वर्ष 2010 में यूपीए सरकार ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया। देश भर में लाखों निर्वाचित महिला प्रतिनिधि स्थानीय शासन का हिस्सा हैं, जो कांग्रेस की नीतियों का परिणाम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अब विफल हो गई है। यह मुद्दा न केवल राजनीतिक है बल्कि समाज में महिलाओं की स्थिति को भी दर्शाता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण क्या है?
महिला आरक्षण का तात्पर्य है कि सरकार में महिलाओं को एक निश्चित प्रतिशत स्थान दिया जाए ताकि उन्हें राजनीतिक भागीदारी में बढ़ावा मिले।
शोभा ओझा ने किस साजिश का आरोप लगाया?
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण के नाम पर सत्ता पर एकाधिकार जमाने की साजिश की थी।
विपक्ष की एकजुटता का क्या महत्व है?
विपक्ष की एकजुटता इस बात का प्रतीक है कि राजनीतिक दल मिलकर महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ाई कर रहे हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है?
यह एक विधेयक है जो महिला आरक्षण के लिए संसद में पेश किया गया था, लेकिन इसे पारित नहीं किया गया।
महिला आरक्षण का इतिहास क्या है?
महिला आरक्षण का प्रस्ताव पहली बार 1989 में राजीव गांधी सरकार द्वारा रखा गया था, और इसके बाद कई संशोधन किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले