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क्या मकर संक्रांति पर मंदिरों में विशेष शृंगार किया जाता है?

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क्या मकर संक्रांति पर मंदिरों में विशेष शृंगार किया जाता है?

सारांश

मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन मंदिरों में विशेष शृंगार और भोग की तैयारियां चल रही हैं, जो भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। आइए जानते हैं किस प्रकार के अद्भुत शृंगार होते हैं विभिन्न मंदिरों में।

मुख्य बातें

मकर संक्रांति पर मंदिरों में विशेष भोग और शृंगार का आयोजन होता है।
मुख्य मंदिरों में अद्भुत सजावट भक्तों को आकर्षित करती है।
घृत मंडल का उपयोग स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता है।
सभी मंदिरों में भक्ति का अद्वितीय रूप देखने को मिलता है।
यह त्योहार सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का प्रतीक है।

नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूरे देश में मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस खास दिन को देखते हुए मंदिरों में विशेष तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

मकर संक्रांति के अवसर पर मंदिरों में विशेष भोग के साथ-साथ विशेष शृंगार भी किया जाता है, जो श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। आज हम जानेंगे कि मकर संक्रांति के दिन देश के कुछ प्रमुख मंदिरों में देवताओं का शृंगार किस प्रकार किया जाता है।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में मकर संक्रांति पर विशेष स्नान और शृंगार किया जाता है। इस दिन बाबा को तिल के उबटन से स्नान कराया जाता है और उन्हें भांग, तिल, गुड़ और सूखे मेवों से सजाया जाता है। चांदी के मुकुट के साथ पीले और हरे रंग के वस्त्र भी पहनाए जाते हैं।

झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में मकर संक्रांति पर लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इस दिन घृत मंडल का शृंगार किया जाता है, जो देसी घी और कुछ औषधियों से बनाया जाता है। यह घृत मंडल सात दिनों तक शिवलिंग पर रखा जाता है, जिससे यह औषधीय गुणों से परिपूर्ण हो जाता है। भक्तों का मानना है कि इससे सभी प्रकार के चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है।

केरल के सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा का विशेष शृंगार किया जाता है, जिसे 'तिरुवाभरणम' कहा जाता है, अर्थात 'शाही आभूषण'। इस दिन भगवान अयप्पा को हीरे और कीमती मोतियों से सजाया जाता है। विशेष शृंगार पूरा होने के बाद ही अयप्पा भक्तों को दर्शन देते हैं, जो साल में एक बार ही देखने को मिलता है।

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में मकर संक्रांति के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विशेष शृंगार किया जाता है, जिसे 'मकर चौरासी वेश' कहा जाता है। इसमें तीनों प्रमुख देवी-देवताओं के लिए विशेष मुकुट बनाए जाते हैं और वस्त्र जल में निवास करने वाले जंतुओं के रंगों के समान होते हैं।

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी को मकर संक्रांति के अवसर पर हल्के पीले, लाल और हरे रंगों की पोशाक पहनाई जाती है और उन्हें भारी स्वर्ण आभूषण से सजाया जाता है। ठाकुर जी का यह रूप बसंत पंचमी के आगमन का प्रतीक भी होता है, जिसे होली के साथ जोड़ा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

देशभर के मंदिरों में विशेष तैयारियों का होना धार्मिक आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। यह त्योहार न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता का भी संदेश देता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मकर संक्रांति कब मनाई जाती है?
मकर संक्रांति का त्योहार हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है।
मंदिरों में मकर संक्रांति पर क्या विशेष शृंगार होता है?
इस दिन मंदिरों में विशेष भोग और शृंगार किया जाता है, जैसे कि महाकालेश्वर मंदिर में तिल के उबटन से स्नान और बाबा को सजाना।
सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा का शृंगार कैसे किया जाता है?
भगवान अयप्पा का शृंगार 'तिरुवाभरणम' नामक शाही आभूषण से किया जाता है।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व क्या है?
यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है और इसे नए फसल के मौसम के आगमन के रूप में मनाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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