18 अगस्त 2026
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नीट संकट के लिए अन्नाद्रमुक और भाजपा जिम्मेदार: माणिकम टैगोर का पलानीस्वामी पर पलटवार

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नीट संकट के लिए अन्नाद्रमुक और भाजपा जिम्मेदार: माणिकम टैगोर का पलानीस्वामी पर पलटवार

सारांश

टीएनसीसी अध्यक्ष माणिकम टैगोर ने पलानीस्वामी पर पलटवार करते हुए कहा कि 2017 में उन्हीं के मुख्यमंत्री कार्यकाल में तमिलनाडु में नीट लागू हुई — और इसीलिए हजारों छात्रों के सपने प्रभावित हुए। कांग्रेस पर दोष मढ़ना इस ऐतिहासिक तथ्य को नहीं मिटा सकता।

मुख्य बातें

माणिकम टैगोर ने 18 अगस्त 2026 को एक्स पर पोस्ट कर अन्नाद्रमुक और भाजपा को तमिलनाडु के नीट संकट के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया।
वर्ष 2017 में पलानीस्वामी के मुख्यमंत्री बनने के बाद ही तमिलनाडु में नीट लागू की गई — जयललिता के जीवनकाल में नहीं।
टैगोर ने NTA को शक्तियाँ देने और नीट को 'व्यावसायिक बाज़ार' में बदलने के लिए भाजपा सरकार पर आरोप लगाया।
अनिता समेत अन्य छात्रों की मृत्यु का हवाला देते हुए नीट व्यवस्था पर सवाल उठाए गए।
राहुल गांधी का आश्वासन दोहराया — कांग्रेस सरकार बनने पर नीट विरोधी राज्यों को पूर्ण छूट दी जाएगी।
टैगोर ने पलानीस्वामी को चुनौती दी कि वे भाजपा से तमिलनाडु के लिए समान प्रतिबद्धता दिलाने का साहस दिखाएँ।

तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) के अध्यक्ष माणिकम टैगोर ने 18 अगस्त 2026 को अन्नाद्रमुक (AIADMK) महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि तमिलनाडु में नीट संकट के लिए अन्नाद्रमुक और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। टैगोर ने आरोप लगाया कि पलानीस्वामी कांग्रेस पर दोषारोपण कर अपनी पार्टी के 'ऐतिहासिक विश्वासघात' को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्य आरोप: पलानीस्वामी के कार्यकाल में लागू हुई नीट

टैगोर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के जीवनकाल में तमिलनाडु में नीट लागू नहीं हुई थी। उनके अनुसार, वर्ष 2017 में पलानीस्वामी के मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद ही राज्य में नीट की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि उस दौरान अन्नाद्रमुक सरकार भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर पूरी तरह निर्भर हो गई थी।

टैगोर ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य के मंत्री राजेश कुमार तमिलनाडु विधानसभा में इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष स्पष्ट कर चुके हैं। उनका कहना था कि पलानीस्वामी इस ऐतिहासिक तथ्य से पल्ला नहीं झाड़ सकते।

छात्रों के सपनों पर असर और एनटीए पर आरोप

टैगोर ने आरोप लगाया कि अन्नाद्रमुक सरकार ने नीट लागू करने का रास्ता साफ कर हजारों तमिलनाडु के छात्रों के डॉक्टर बनने के सपनों को प्रभावित किया। उन्होंने भाजपा सरकार पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को असीमित शक्तियाँ देने और नीट को कोचिंग सेंटरों के कथित दबदबे वाले 'व्यावसायिक बाज़ार' में बदलने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने प्रश्नपत्र लीक, भ्रष्टाचार और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि इस पूरी व्यवस्था ने छात्रों पर असहनीय दबाव डाला है। मेडिकल छात्रा एस. अनिता और अन्य छात्रों की दुखद मृत्यु का उल्लेख करते हुए टैगोर ने कहा कि इसके बावजूद नरेंद्र मोदी सरकार वंचित परिवारों पर पड़ने वाले गहरे प्रभाव को नज़रअंदाज़ कर नीट का बचाव करती रही।

कांग्रेस का बचाव और राहुल गांधी का आश्वासन

टीएनसीसी अध्यक्ष ने अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा गरीब और आम छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी है और परिस्थितियों के अनुसार नीतियों में बदलाव करने को तैयार रहती है। उन्होंने एक उपमा देते हुए कहा कि 'जूते पैरों के अनुसार बनने चाहिए, न कि पैरों को जूतों के आकार में काटा जाना चाहिए।'

टैगोर ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का वह आश्वासन भी दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस की सरकार बनने पर जो भी राज्य नीट का विरोध करेगा, उसे परीक्षा से पूर्ण छूट दी जाएगी।

पलानीस्वामी को सीधी चुनौती

टैगोर ने पलानीस्वामी को सीधे चुनौती देते हुए पूछा कि क्या वे अपने सहयोगी भाजपा को तमिलनाडु के लिए इसी तरह की प्रतिबद्धता दिलाने का साहस दिखा सकते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा के प्रभाव से बाहर निकलकर यह स्पष्ट रूप से कहेंगे कि तमिलनाडु नीट नहीं चाहता। यह राजनीतिक टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में नीट विरोधी भावना राजनीतिक दलों के लिए एक अहम चुनावी मुद्दा बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु संवैधानिक और नीतिगत जटिलताओं पर चुप्पी बनाए रखता है। असली सवाल यह है कि तमिलनाडु के छात्रों के हित में कोई भी दल ठोस, कानूनी और तत्काल रास्ता निकालने को तैयार है या नहीं — या यह विवाद महज चुनावी ध्रुवीकरण का औज़ार बना रहेगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माणिकम टैगोर ने नीट संकट के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
टीएनसीसी अध्यक्ष माणिकम टैगोर ने अन्नाद्रमुक और भाजपा को तमिलनाडु के नीट संकट के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि 2017 में पलानीस्वामी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में ही राज्य में नीट लागू हुई, जबकि जयललिता के जीवनकाल में ऐसा नहीं हुआ था।
तमिलनाडु में नीट कब और कैसे लागू हुई?
टैगोर के अनुसार, वर्ष 2017 में एडप्पादी के. पलानीस्वामी के मुख्यमंत्री बनने के बाद तमिलनाडु में नीट की अनुमति दी गई। उस समय अन्नाद्रमुक सरकार भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निर्भर थी।
राहुल गांधी ने नीट को लेकर क्या वादा किया है?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आश्वासन दिया है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर जो भी राज्य नीट का विरोध करेगा, उसे परीक्षा से पूर्ण छूट दी जाएगी। टैगोर ने इसी आश्वासन को दोहराते हुए पलानीस्वामी को भाजपा से समान प्रतिबद्धता दिलाने की चुनौती दी।
टैगोर ने NTA और नीट व्यवस्था पर क्या आरोप लगाए?
टैगोर ने भाजपा सरकार पर NTA को असीमित शक्तियाँ देने और नीट को कोचिंग सेंटरों के कथित दबदबे वाले 'व्यावसायिक बाज़ार' में बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रश्नपत्र लीक, भ्रष्टाचार और परीक्षा में अनियमितताओं का हवाला देते हुए कहा कि इस व्यवस्था ने छात्रों पर भारी दबाव डाला है।
पलानीस्वामी को टैगोर ने क्या चुनौती दी?
टैगोर ने पलानीस्वामी से पूछा कि क्या वे भाजपा के प्रभाव से बाहर निकलकर यह स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि तमिलनाडु नीट नहीं चाहता। उन्होंने सवाल किया कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री अपने सहयोगी भाजपा से तमिलनाडु के छात्रों के हित में वही प्रतिबद्धता दिलाने का साहस दिखाएंगे जो राहुल गांधी ने दी है।
राष्ट्र प्रेस
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