मरांडी का हेमंत सोरेन पर हमला: 288 बालू घाट बंद, ₹1,410 करोड़ की सड़कें अधर में, 8 सवाल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 17 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधते हुए बालू घाटों के संचालन, होल्डिंग टैक्स वसूली और सड़क निर्माण परियोजनाओं की बदहाल स्थिति पर जवाब माँगा है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए मरांडी ने कहा कि 'अफसरों के भरोसे कुर्सी चल सकती है, जवाबदेही से छुट्टी नहीं मिल सकती।'
बालू घाटों का संकट
मरांडी के अनुसार, राज्य में 302 बालू घाटों की नीलामी के बावजूद उनमें से 288 घाट बंद पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरणीय स्वीकृति, ग्रामसभा की अनुमति और वैधानिक प्रमाणपत्रों की फाइलें जानबूझकर अटकाई जा रही हैं, ताकि बालू की अवैध चोरी का धंधा बेरोकटोक जारी रह सके। उन्होंने माँग की कि प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी के स्तर पर लंबित कार्यों का पूरा ब्यौरा सरकार सार्वजनिक करे। मरांडी ने स्पष्ट किया कि बालू घाटों की नीलामी कर देने से जनता का घर नहीं बनेगा — बालू उपलब्ध कराने से बनेगा।
होल्डिंग टैक्स वसूली ठप
मरांडी ने बताया कि 21 अगस्त 2026 से राज्य में होल्डिंग टैक्स की वसूली पूरी तरह बंद है। उन्होंने कहा कि पुरानी एजेंसी का अनुबंध समाप्त कर दिया गया, लेकिन नई व्यवस्था का अभी तक कोई अता-पता नहीं है। पथ निर्माण और नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी सुनील कुमार से उन्होंने इस राजस्व नुकसान का पूरा हिसाब माँगा। आलोचकों का कहना है कि इस लापरवाही से नगर निकायों के वित्तीय स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
₹1,410 करोड़ की सड़क परियोजनाएँ अधर में
रांची में ₹1,410 करोड़ की सड़क परियोजनाएँ अधर में लटकी हैं और आम नागरिक रोज परेशानी झेल रहे हैं। मरांडी ने कहा कि सरकार में जिम्मेदारियाँ सौंपने की रफ्तार तेज है, लेकिन जिम्मेदारी निभाने की रफ्तार लापता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी विज्ञापन बंद करने की धमकी देकर अपने कारनामों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।
मरांडी की 8 सूत्री माँगें
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री के समक्ष कुल 8 बिंदुओं पर समयबद्ध और सार्वजनिक कार्रवाई की माँग रखी है। इनमें शामिल हैं — 288 बंद बालू घाटों के बंद रहने के कारणों और लंबित स्वीकृतियों की सूची जारी करना; पर्यावरणीय स्वीकृति, ग्रामसभा की अनुमति और वैधानिक प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करना; वैध घाटों से उचित दर पर बालू की पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करना; 21 अगस्त से बंद होल्डिंग टैक्स वसूली को तत्काल बहाल करना; राजस्व नुकसान का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करना; ₹1,410 करोड़ की सड़क परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट जारी करना; मासिक प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराना; और लंबित मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करना।
राजनीतिक संदेश और आगे का रास्ता
मरांडी ने मुख्यमंत्री को सीधे चेताया कि 'अफसर फाइल पर टिप्पणी लिखकर आगे बढ़ जाएगा, जनता आपके कार्यकाल पर फैसला लिखेगी।' उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जनहित के सवालों पर समझौता नहीं करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में अगले विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मियाँ धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं और विपक्ष शासन-व्यवस्था की खामियों को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन पर लगातार दबाव बना रहा है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री सोरेन की सरकार इन माँगों पर किस हद तक और कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देती है।