18 अक्टूबर 2026
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मरांडी का हेमंत सोरेन पर हमला: 288 बालू घाट बंद, ₹1,410 करोड़ की सड़कें अधर में, 8 सवाल

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मरांडी का हेमंत सोरेन पर हमला: 288 बालू घाट बंद, ₹1,410 करोड़ की सड़कें अधर में, 8 सवाल

सारांश

झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरा — 302 में से 288 नीलाम बालू घाट अब भी बंद, 21 अगस्त से होल्डिंग टैक्स वसूली ठप और ₹1,410 करोड़ की रांची सड़क परियोजनाएँ अधर में। 8 सूत्री माँगों के साथ BJP ने साफ कहा: जवाब दीजिए, बहाने नहीं।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 17 अक्टूबर 2026 को एक्स पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा हमला बोला।
राज्य में 302 नीलाम बालू घाटों में से 288 घाट अभी भी बंद; लंबित स्वीकृतियों पर जवाब माँगा।
21 अगस्त 2026 से होल्डिंग टैक्स वसूली ठप; नई एजेंसी व्यवस्था का कोई ब्यौरा नहीं।
रांची में ₹1,410 करोड़ की सड़क परियोजनाएँ अधर में; आम जनता परेशान।
मरांडी ने 8 सूत्री माँगें रखीं — समयबद्ध कार्रवाई और सार्वजनिक जवाबदेही की माँग।
BJP ने कहा — जनहित के सवालों पर समझौता नहीं, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 17 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधते हुए बालू घाटों के संचालन, होल्डिंग टैक्स वसूली और सड़क निर्माण परियोजनाओं की बदहाल स्थिति पर जवाब माँगा है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए मरांडी ने कहा कि 'अफसरों के भरोसे कुर्सी चल सकती है, जवाबदेही से छुट्टी नहीं मिल सकती।'

बालू घाटों का संकट

मरांडी के अनुसार, राज्य में 302 बालू घाटों की नीलामी के बावजूद उनमें से 288 घाट बंद पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरणीय स्वीकृति, ग्रामसभा की अनुमति और वैधानिक प्रमाणपत्रों की फाइलें जानबूझकर अटकाई जा रही हैं, ताकि बालू की अवैध चोरी का धंधा बेरोकटोक जारी रह सके। उन्होंने माँग की कि प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी के स्तर पर लंबित कार्यों का पूरा ब्यौरा सरकार सार्वजनिक करे। मरांडी ने स्पष्ट किया कि बालू घाटों की नीलामी कर देने से जनता का घर नहीं बनेगा — बालू उपलब्ध कराने से बनेगा।

होल्डिंग टैक्स वसूली ठप

मरांडी ने बताया कि 21 अगस्त 2026 से राज्य में होल्डिंग टैक्स की वसूली पूरी तरह बंद है। उन्होंने कहा कि पुरानी एजेंसी का अनुबंध समाप्त कर दिया गया, लेकिन नई व्यवस्था का अभी तक कोई अता-पता नहीं है। पथ निर्माण और नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी सुनील कुमार से उन्होंने इस राजस्व नुकसान का पूरा हिसाब माँगा। आलोचकों का कहना है कि इस लापरवाही से नगर निकायों के वित्तीय स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

₹1,410 करोड़ की सड़क परियोजनाएँ अधर में

रांची में ₹1,410 करोड़ की सड़क परियोजनाएँ अधर में लटकी हैं और आम नागरिक रोज परेशानी झेल रहे हैं। मरांडी ने कहा कि सरकार में जिम्मेदारियाँ सौंपने की रफ्तार तेज है, लेकिन जिम्मेदारी निभाने की रफ्तार लापता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी विज्ञापन बंद करने की धमकी देकर अपने कारनामों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।

मरांडी की 8 सूत्री माँगें

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री के समक्ष कुल 8 बिंदुओं पर समयबद्ध और सार्वजनिक कार्रवाई की माँग रखी है। इनमें शामिल हैं — 288 बंद बालू घाटों के बंद रहने के कारणों और लंबित स्वीकृतियों की सूची जारी करना; पर्यावरणीय स्वीकृति, ग्रामसभा की अनुमति और वैधानिक प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करना; वैध घाटों से उचित दर पर बालू की पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करना; 21 अगस्त से बंद होल्डिंग टैक्स वसूली को तत्काल बहाल करना; राजस्व नुकसान का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करना; ₹1,410 करोड़ की सड़क परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट जारी करना; मासिक प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराना; और लंबित मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करना।

राजनीतिक संदेश और आगे का रास्ता

मरांडी ने मुख्यमंत्री को सीधे चेताया कि 'अफसर फाइल पर टिप्पणी लिखकर आगे बढ़ जाएगा, जनता आपके कार्यकाल पर फैसला लिखेगी।' उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जनहित के सवालों पर समझौता नहीं करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में अगले विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मियाँ धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं और विपक्ष शासन-व्यवस्था की खामियों को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन पर लगातार दबाव बना रहा है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री सोरेन की सरकार इन माँगों पर किस हद तक और कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ये प्रशासनिक विफलता के ठोस, सत्यापन योग्य संकेतक हैं। गौरतलब है कि झारखंड में बालू माफिया का मुद्दा वर्षों से अदालतों और सरकारी रिपोर्टों में दर्ज रहा है, फिर भी नीतिगत सुधार के बाद जमीनी बदलाव नाममात्र का रहा है। असली सवाल यह है कि नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी वैधानिक स्वीकृतियाँ महीनों क्यों अटकी रहती हैं — और किसके हित में। ₹1,410 करोड़ की सड़क परियोजनाओं की सुस्त रफ्तार और राजस्व संग्रह में चूक मिलकर एक बड़े शासन-संकट की तस्वीर बनाती हैं, जिसका जवाब विपक्ष नहीं, सरकार को देना है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन से क्या जवाब माँगा है?
मरांडी ने 17 अक्टूबर 2026 को एक्स पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बालू घाटों के संचालन, होल्डिंग टैक्स वसूली और रांची की ₹1,410 करोड़ की सड़क परियोजनाओं पर समयबद्ध जवाब माँगा है। उन्होंने इस पर 8 सूत्री माँगें रखते हुए सार्वजनिक जवाबदेही की अपेक्षा की है।
झारखंड में 288 बालू घाट क्यों बंद हैं?
मरांडी के अनुसार, राज्य में 302 बालू घाटों की नीलामी हो चुकी है, लेकिन 288 घाट अब भी बंद हैं क्योंकि पर्यावरणीय स्वीकृति, ग्रामसभा की अनुमति और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएँ लंबित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन फाइलों को जानबूझकर अटकाया जा रहा है ताकि बालू की अवैध चोरी जारी रह सके।
झारखंड में होल्डिंग टैक्स वसूली कब से बंद है और इसका क्या असर है?
मरांडी के बयान के अनुसार, 21 अगस्त 2026 से झारखंड में होल्डिंग टैक्स वसूली बंद है। पुरानी एजेंसी का अनुबंध समाप्त कर दिया गया है, लेकिन नई व्यवस्था अब तक तैयार नहीं हुई, जिससे नगर निकायों को राजस्व नुकसान हो रहा है।
रांची की ₹1,410 करोड़ की सड़क परियोजनाएँ क्यों अटकी हैं?
नेता प्रतिपक्ष मरांडी के अनुसार, रांची में ₹1,410 करोड़ की सड़क परियोजनाएँ अधर में हैं और आम नागरिक रोज परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने इन परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक पोर्टल पर जारी करने की माँग की है।
BJP ने झारखंड सरकार से क्या कार्रवाई की माँग की है?
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता मरांडी ने 8 सूत्री माँगें रखी हैं, जिनमें बंद बालू घाटों की सूची जारी करना, होल्डिंग टैक्स वसूली बहाल करना, राजस्व नुकसान का ब्यौरा देना और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करना शामिल है। उन्होंने सभी माँगों पर समयबद्ध और सार्वजनिक जवाबदेही की अपेक्षा जताई है।
राष्ट्र प्रेस
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