2 अगस्त 2026
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झारखंड: NGT की रोक के बावजूद अवैध बालू खनन जारी, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार से माँगा जवाब

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झारखंड: NGT की रोक के बावजूद अवैध बालू खनन जारी, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार से माँगा जवाब

सारांश

NGT की स्पष्ट रोक के बावजूद झारखंड में बिना नंबर प्लेट के बालू के ट्रक सड़कों पर दौड़ रहे हैं। बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर पोस्ट कर हेमंत सोरेन सरकार से पूछा — यह अवैध कारोबार आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है?

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने 2 अगस्त 2026 को एक्स पर पोस्ट कर झारखंड में अवैध बालू खनन पर हेमंत सोरेन सरकार को घेरा।
NGT ने मॉनसून के दौरान नदियों से बालू उठाव पर रोक लगाई हुई है, फिर भी रांची सहित कई जिलों में अवैध परिवहन जारी है।
बिना नंबर प्लेट और बिना वैध चालान के बालू लदे ट्रक खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
मरांडी ने कहा कि अवैध खनन से भूजल स्तर में गिरावट, नदी तटों का कटाव और पर्यावरणीय असंतुलन हो रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप और NGT के निर्देशों के कड़े क्रियान्वयन की माँग की है।

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने 2 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा मॉनसून सीज़न में नदियों से बालू उठाव पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद झारखंड में अवैध बालू खनन और परिवहन का कारोबार किसके संरक्षण में बेरोकटोक चल रहा है।

मरांडी का एक्स पर सीधा हमला

मरांडी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट जारी कर आरोप लगाया कि रांची सहित झारखंड के कई जिलों में बिना नंबर प्लेट और बिना वैध चालान के बालू से लदे ट्रक खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और राजस्व तंत्र पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

पर्यावरण पर दीर्घकालिक खतरा

मरांडी ने पर्यावरण विशेषज्ञों की चेतावनियों का हवाला देते हुए कहा कि अनियंत्रित और अवैध बालू खनन से नदियों की प्राकृतिक जलधारा बाधित होती है, भूजल स्तर में गिरावट आती है और नदी तटों का कटाव तेज़ होता है। उनके अनुसार, इस प्रकार की गतिविधियाँ पर्यावरणीय संतुलन को दीर्घकालिक नुकसान पहुँचाती हैं — फिर भी प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।

ई-चालान पर तीखा सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने एक तीखा सवाल दागा — जब कैमरों के ज़रिये आम नागरिकों की बाइक और कार का ई-चालान काटा जा सकता है, तो बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे बालू तस्करी के ट्रकों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? उन्होंने कहा, 'क्या कानून केवल आम लोगों के लिए है और अवैध कारोबार में संलिप्त लोग उससे परे हैं?' यह टिप्पणी प्रशासनिक चयनात्मकता पर सीधा प्रहार है।

राजस्व क्षति और NGT के निर्देशों की अनदेखी

मरांडी ने कहा कि अवैध बालू परिवहन से राज्य सरकार को कथित तौर पर भारी राजस्व हानि हो रही है। उन्होंने माँग की कि यदि NGT के निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो, तो एक साथ प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और कानून का राज — दोनों सुनिश्चित किए जा सकते हैं।

क्या होगा आगे

मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। गौरतलब है कि झारखंड में खनन से जुड़े विवाद नए नहीं हैं — राज्य में खनिज संसाधनों के अवैध दोहन को लेकर विपक्ष समय-समय पर सरकार को घेरता रहा है। NGT के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी राज्य प्रशासन पर है और इस मामले में सरकार की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सटीक प्रहार है। असली सवाल यह है कि NGT के आदेश कागज़ों पर हैं या ज़मीन पर भी। झारखंड जैसे खनिज-समृद्ध राज्य में अवैध खनन का नेटवर्क अक्सर राजनीतिक संरक्षण के बिना नहीं चलता — यह आरोप नया नहीं, लेकिन सत्यापन की ज़िम्मेदारी अभी भी लंबित है। हेमंत सोरेन सरकार की चुप्पी इस मामले में उतनी ही बड़ी खबर है जितनी मरांडी की पोस्ट।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में अवैध बालू खनन पर NGT की क्या रोक है?
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने मॉनसून सीज़न के दौरान नदियों से बालू उठाव पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, ताकि नदियों की प्राकृतिक धारा और पर्यावरणीय संतुलन की रक्षा हो सके। इसके बावजूद झारखंड के कई जिलों में यह गतिविधि कथित तौर पर जारी है।
बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर क्या आरोप लगाए?
मरांडी ने आरोप लगाया कि रांची सहित कई जिलों में बिना नंबर प्लेट और बिना वैध चालान के बालू से लदे ट्रक खुलेआम चल रहे हैं। उनका कहना है कि यह अवैध कारोबार किसी के राजनीतिक संरक्षण में चल रहा है और प्रशासन जान-बूझकर आँखें मूँद रहा है।
अवैध बालू खनन से पर्यावरण को क्या नुकसान होता है?
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित बालू खनन से नदियों की प्राकृतिक जलधारा बाधित होती है, भूजल स्तर में गिरावट आती है और नदी तटों का कटाव बढ़ता है। दीर्घकाल में यह पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा है।
मरांडी ने ई-चालान को लेकर क्या सवाल उठाया?
नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि जब कैमरों के ज़रिये आम नागरिकों की बाइक और कार का ई-चालान काटा जा सकता है, तो बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे बालू तस्करी के ट्रकों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। यह सवाल प्रशासनिक चयनात्मकता पर सीधा प्रहार है।
इस मामले में हेमंत सोरेन सरकार की प्रतिक्रिया क्या है?
अब तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या उनकी सरकार की ओर से मरांडी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मरांडी ने मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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