मथुरा में IIT पासआउट 'बाबा' गिरफ्तार: युवतियों के कथित ब्रेनवॉश-दुष्कर्म केस में अहम सुराग, फोरेंसिक जाँच जारी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले के गोवर्धन इलाक़े में पुलिस ने ऑनलाइन भजन-कीर्तन और भगवद्गीता पर प्रवचन के नाम पर युवतियों को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर और ब्रेनवॉश कर दुष्कर्म करने के आरोप में एक IIT रुड़की पासआउट मैकेनिकल इंजीनियर को गिरफ़्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान अभिषेक के रूप में हुई है, जो मूल रूप से भुवनेश्वर, ओडिशा का निवासी है और गोवर्धन के 'राधा कुंड' क्षेत्र में रह रहा था।
मुख्य घटनाक्रम
मथुरा के एसपी देहात सुरेश चंद्र रावत ने पत्रकारों को बताया कि जाँच में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी के पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जाँच की जा रही है और पीड़ितों तथा उनके परिवारों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
एसपी देहात के अनुसार, आरोपी अभिषेक ने 2017 से 2021 के बीच IIT रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। बाद में वह गोवर्धन क्षेत्र में आकर रहने लगा और स्वयं को आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता बताते हुए ऑनलाइन भजन-कीर्तन व भगवद्गीता पर प्रवचन देता था।
कैसे हुआ मामले का खुलासा
पुलिस के मुताबिक़, मामले का पर्दाफ़ाश तब हुआ जब एक युवती ने गोवर्धन थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुक़दमा दर्ज कर जाँच शुरू की और तेज़ी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया।
एसपी देहात रावत ने कहा कि आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि उसके संपर्क में और कितने युवक-युवतियाँ आए थे, और कहीं अन्य पीड़ित भी तो नहीं हैं जो अब तक सामने नहीं आए।
'गंधर्व विवाह' का कथित जाल
पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर युवक-युवतियों को अपने समूह में जोड़ता, उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करता और फिर तथाकथित 'गंधर्व विवाह' कराने के बाद युवतियों के साथ शारीरिक संबंध बनाता था। आरोप है कि ऑनलाइन प्रवचनों के ज़रिए श्रद्धा अर्जित कर वह पीड़ितों को धीरे-धीरे अपने प्रभाव में लेता था।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों — मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप और संभावित डिजिटल रिकॉर्ड्स — की फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद जाँच का दायरा और बढ़ सकता है। पीड़ित का विस्तृत बयान दर्ज किया जा रहा है, जिसके आधार पर आगे की क़ानूनी कार्रवाई तय होगी।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में स्वयंभू बाबाओं और आध्यात्मिक प्रवचनकर्ताओं द्वारा शोषण के मामले बार-बार सुर्खियों में आते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ऑनलाइन धार्मिक मंचों की निगरानी का कोई संस्थागत ढाँचा न होने के कारण ऐसे मामले समय रहते पकड़ में नहीं आते।