मथुरा: प्रेमानंद आश्रम में कथित मौत और लापता बच्चों पर सीबीआई जांच की मांग, संतों ने CM को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी और जूना अखाड़े के संत राधानंद गिरि ने प्रेमानंद आश्रम से जुड़े कथित मामलों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दोनों ने 3 अक्टूबर 2026 को आश्रम के शिष्य शरण दुलारी महाराज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और नाबालिग बच्चों के आश्रम में होने से जुड़े दावों की सीबीआई जांच की माँग की है। दिनेश फलाहारी ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जाँच की गुज़ारिश की है।
संत की मौत पर उठे सवाल
राधानंद गिरि ने आरोप लगाया कि आश्रम के शिष्य शरण दुलारी महाराज को कथित तौर पर चौथी मंजिल से नीचे फेंका गया। उनका कहना है कि घटना की परिस्थितियाँ एक सामान्य हादसे से अलग सवाल खड़े करती हैं और इसलिए वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष जाँच अनिवार्य है। गिरि ने यह भी आरोप लगाया कि संत को मृत्यु से पूर्व कथित तौर पर भय का सामना करना पड़ा था और उनके साथ प्रताड़ना के आरोप भी सामने आए हैं।
नाबालिग बच्चों को लेकर चिंता
राधानंद गिरि ने एक बच्चे के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस बच्चे के पिता लगभग तीन महीने से आश्रम के बाहर बैठकर अपने बेटे से मिलने की गुहार लगा रहे हैं। बच्चा अपने परिवार का इकलौता पुत्र है और उसकी चार बहनें हैं। गिरि का कहना है कि भले ही कोई बच्चा स्वेच्छा से आश्रम में रह रहा हो, उसके माता-पिता को उसकी स्थिति और ठिकाने की जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने माँग की कि जाँच के बाद बच्चे को उसके परिजनों के समक्ष पेश किया जाए।
दिनेश फलाहारी के आरोप
दिनेश फलाहारी ने आरोप लगाया कि आश्रम से जुड़े क्षेत्र में काफी समय से कथित गड़बड़ियाँ चली आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि साधुओं की मौत, बच्चों के गायब होने और आश्रमों पर कथित कब्ज़े जैसे मामले सामने आए हैं। फलाहारी ने यह भी आरोप लगाया कि बच्चों के परिजनों को दबाव देकर हटाया जा रहा है। उनके अनुसार इन विवादों के चलते संत प्रेमानंद महाराज भी कथित तौर पर क्षेत्र से दूर चले गए हैं — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
सीबीआई और बाल आयोग से जाँच की माँग
दिनेश फलाहारी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जाँच की माँग की है। इसके साथ ही उन्होंने बाल आयोग से भी अनुरोध किया है कि आश्रमों में कथित तौर पर रह रहे नाबालिग बच्चों की स्थिति का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जाए और उन्हें उनके माता-पिता तक पहुँचाया जाए। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक संस्थाओं में बाल संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।
आगे की राह
अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार या पुलिस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सीबीआई जाँच के लिए राज्य सरकार की अनुशंसा या न्यायालय का आदेश आवश्यक होता है। यदि मुख्यमंत्री कार्यालय इस माँग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है तो मामले की जाँच एक नया मोड़ ले सकती है।