30 सितंबर 2026
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रूसी सेना में भर्ती पर विदेश मंत्रालय की सख्त चेतावनी, भारतीयों को 'खतरनाक रास्ते' से बचने की सलाह

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रूसी सेना में भर्ती पर विदेश मंत्रालय की सख्त चेतावनी, भारतीयों को 'खतरनाक रास्ते' से बचने की सलाह

सारांश

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत सरकार ने फिर एडवाइजरी जारी की — आर्थिक लालच में रूसी सेना में भर्ती होना 'खतरनाक रास्ता' है। 139 भारतीयों की रिहाई हो चुकी है, लेकिन करीब दो दर्जन अभी भी रूसी बलों में हैं। नागरिकता छोड़कर रूसी पासपोर्ट लेने के मामले भी सामने आए हैं।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 30 सितंबर 2026 को भारतीयों को रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती से सख्ती से बचने की एडवाइजरी जारी की।
पिछले दो वर्षों में बार-बार चेताने के बावजूद भर्ती की खबरें आना जारी है।
कुछ मामलों में व्यक्तियों ने भारतीय नागरिकता स्वेच्छा से छोड़ी , रूसी पासपोर्ट लिया और रूसी सेना में भर्ती हुए।
अब तक 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से रिहा कराया जा चुका है; करीब दो दर्जन अभी भी बताए जा रहे हैं।
सरकार ने केवल विदेश मंत्रालय-पंजीकृत एजेंटों के माध्यम से विदेशी नौकरी के प्रस्ताव स्वीकार करने की सलाह दी।

विदेश मंत्रालय ने 30 सितंबर 2026 को भारतीय नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने के किसी भी प्रयास से सख्ती से बचने की ताज़ा एडवाइजरी जारी की है। रूस-यूक्रेन युद्ध के जारी रहते हुए मंत्रालय ने चेताया कि पिछले दो वर्षों में बार-बार जोखिम रेखांकित किए जाने के बावजूद भारतीय नागरिकों की रूसी सेना में भर्ती की खबरें आना बंद नहीं हुई हैं।

एडवाइजरी में क्या कहा गया

विदेश मंत्रालय के बयान में स्पष्ट किया गया कि कुछ व्यक्ति स्वेच्छा से रूसी सशस्त्र बलों में शामिल होने के प्रस्ताव तलाश रहे हैं — यह सोचकर कि वे आर्थिक लाभ उठा सकेंगे और ज़रूरत पड़ने पर सरकार की मदद से रिहाई पा लेंगे। मंत्रालय ने साफ कहा, 'यह एक खतरनाक रास्ता है और सरकार द्वारा इसे सख्ती से हतोत्साहित किया जाता है।'

बयान में एक और गंभीर प्रवृत्ति का उल्लेख किया गया — ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें व्यक्तियों ने भारतीय नागरिकता स्वेच्छा से छोड़ दी, रूसी पासपोर्ट हासिल किया और फिर रूसी सेना में भर्ती हो गए। कुछ ने यह कदम अस्थायी आर्थिक लाभ के लालच में बिना किसी सरकारी परामर्श के उठाया।

नागरिकता छोड़ने की गंभीरता पर जोर

मंत्रालय ने ऐसे व्यक्तियों को सचेत किया कि वे इन कदमों की गंभीरता पर विचार करें और समझें कि वे स्वयं को जानलेवा खतरे में डाल रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, एक बार नागरिकता त्यागने के बाद भारत सरकार की कूटनीतिक क्षमता सीमित हो जाती है।

यह ऐसे समय में आया है जब गैर-सरकारी संस्थाएँ और स्वयंसेवी समूह विदेशी नागरिकों — जिनमें भारतीय भी शामिल हैं — को रूसी सेना में भर्ती के लिए लक्षित कर रहे हैं। मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को सलाह दी कि वे विदेश मंत्रालय के साथ पंजीकृत एजेंटों के माध्यम से ही रोज़गार प्रस्ताव स्वीकार करें।

अब तक कितने भारतीयों की हुई रिहाई

जुलाई 2026 में विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से रिहा कराया जा चुका है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 31 जुलाई को द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया था कि लगभग दो दर्जन भारतीय नागरिक अभी भी रूसी सशस्त्र बलों में बताए जा रहे हैं और उनकी रिहाई के प्रयास जारी हैं।

जायसवाल ने कहा था, 'हम रूसी पक्ष के साथ रूसी सेना में मौजूद शेष भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए लगातार संपर्क में हैं।' उन्होंने यह भी दोहराया कि जोखिम भरे और बेईमान एजेंटों व एजेंसियों के नौकरी के प्रस्तावों से सावधान रहा जाए।

व्यापक संदर्भ और भविष्य की राह

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भारत सरकार ने ऐसी एडवाइजरी जारी की हो — पिछले दो वर्षों में यह कई बार किया जा चुका है। बावजूद इसके भर्ती की घटनाएँ जारी रहना दर्शाता है कि आर्थिक प्रलोभन और दुष्प्रचार अभी भी प्रभावी हैं।

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह रूसी पक्ष के साथ सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण और जल्द रिहाई सुनिश्चित करने के लिए लगातार संपर्क में है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, यह राजनयिक प्राथमिकता बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह भारत की राजनयिक पहुँच को लगभग शून्य कर देता है। सरकार की 139 रिहाइयाँ सराहनीय हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भर्ती-रोधी तंत्र — खासकर अनपंजीकृत एजेंटों पर कार्रवाई — मजबूत किया जा रहा है। बिना ठोस प्रवर्तन के एडवाइजरी केवल कागज़ी कवायद बनकर रह जाती है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश मंत्रालय ने रूसी सेना में भर्ती को लेकर क्या चेतावनी दी है?
विदेश मंत्रालय ने 30 सितंबर 2026 को एडवाइजरी जारी कर कहा कि रूसी सशस्त्र बलों में शामिल होना एक 'खतरनाक रास्ता' है जिसे सरकार सख्ती से हतोत्साहित करती है। मंत्रालय ने चेताया कि आर्थिक लाभ की उम्मीद में भर्ती होना और बाद में सरकारी मदद से रिहाई की उम्मीद रखना गलत सोच है।
अब तक कितने भारतीय रूसी सेना से रिहा हो चुके हैं?
जुलाई 2026 में विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से रिहा कराया जा चुका है। करीब दो दर्जन भारतीय अभी भी रूसी सशस्त्र बलों में बताए जा रहे हैं और उनकी रिहाई के प्रयास जारी हैं।
क्या भारतीय नागरिकता छोड़कर रूसी सेना में जाना संभव है?
हाँ, कुछ मामलों में व्यक्तियों ने स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता छोड़ी, रूसी पासपोर्ट हासिल किया और फिर रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती हुए। विदेश मंत्रालय ने ऐसे कदमों को अत्यंत गंभीर और जानलेवा बताया है, क्योंकि इसके बाद भारत की राजनयिक सहायता की क्षमता सीमित हो जाती है।
अनपंजीकृत एजेंटों के ज़रिए नौकरी के प्रस्ताव से क्यों बचना चाहिए?
विदेश मंत्रालय ने चेताया है कि गैर-सरकारी संस्थाएँ और स्वयंसेवी समूह विदेशी नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती के लिए लक्षित कर रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल विदेश मंत्रालय-पंजीकृत एजेंटों के माध्यम से आए नौकरी के प्रस्तावों पर ही उचित जाँच-पड़ताल के बाद विचार किया जाए।
भारत सरकार रूस में फँसे नागरिकों की मदद के लिए क्या कर रही है?
भारत सरकार रूसी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में है ताकि रूसी सशस्त्र बलों में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण और जल्द रिहाई सुनिश्चित हो सके। अब तक 139 नागरिकों की रिहाई हो चुकी है और शेष दो दर्जन के लिए राजनयिक प्रयास जारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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