रूसी सेना से 139 भारतीयों की रिहाई, बाकी 24 के लिए विदेश मंत्रालय के प्रयास जारी
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 31 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि अब तक 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना की सेवा से सफलतापूर्वक मुक्त कराया जा चुका है, जबकि शेष लगभग 24 भारतीयों की वापसी सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक प्रयास निरंतर जारी हैं। यह जानकारी MEA की द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में दी गई।
मुख्य घटनाक्रम
MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ब्रीफिंग के दौरान कहा, 'हम रूसी सेना में मौजूद बाकी भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए रूसी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। अब तक हमारे प्रयासों से 139 भारतीय नागरिकों को रिहा कराया जा चुका है। रूसी सेना में बताए जा रहे बाकी करीब 24 भारतीयों की रिहाई के लिए भी हम लगातार कोशिश कर रहे हैं।' यह बयान उस समय आया है जब यूक्रेन में संघर्ष जारी है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।
धोखाधड़ी वाले नौकरी प्रस्तावों को लेकर चेतावनी
जायसवाल ने नागरिकों को संदिग्ध नौकरी के प्रस्तावों के प्रति आगाह करते हुए कहा, 'हम एक बार फिर लोगों को सावधान करना चाहते हैं कि वे ऐसे नौकरी के प्रस्तावों से बचें, जिनमें खतरा हो और जो बेईमान लोगों या संदिग्ध एजेंसियों की ओर से दिए जा रहे हों।' यह चेतावनी उन मामलों की पृष्ठभूमि में जारी की गई है जहाँ भारतीय युवकों को निर्माण क्षेत्र में रोज़गार का झाँसा देकर यूक्रेन युद्ध की अग्रिम पंक्ति में भेज दिया गया।
पृष्ठभूमि: कैसे फँसे भारतीय नागरिक
रिपोर्टों के अनुसार, पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में मौजूद दो भारतीय युवकों ने आरोप लगाया था कि उन्हें कंस्ट्रक्शन जॉब का वादा करके रूस बुलाया गया, लेकिन बाद में उन्हें सीधे युद्धक्षेत्र में तैनात कर दिया गया। नवंबर 2024 में रूस के कब्जे में लिए गए शहर सेलीडोव से फोन पर बात करते हुए उन्होंने दावा किया था कि कम से कम 13 अन्य भारतीय भी इसी तरह की परिस्थितियों में फँसे हुए हैं। दोनों युवक छात्र या विजिटर वीजा पर रूस गए थे और एक एजेंट ने उन्हें गुमराह करके युद्ध के मैदान में भेजा।
सरकार की पूर्व चेतावनियाँ
गौरतलब है कि सितंबर 2025 में MEA ने एक सख्त परामर्श जारी करते हुए भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में शामिल होने से स्पष्ट रूप से मना किया था। यह परामर्श उन खबरों के बाद आया था जिनमें बताया गया था कि मॉस्को गए कई भारतीयों को यूक्रेन युद्ध में लड़ाकू भूमिकाओं में धकेला जा रहा था। यह ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष में विदेशी नागरिकों की भागीदारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
आगे की राह
MEA के अनुसार, रूसी अधिकारियों के साथ राजनयिक संपर्क जारी है और शेष 24 भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ भारत को विदेशों में काम करने जाने वाले नागरिकों के लिए सत्यापन प्रक्रिया को और कड़ा करने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।