31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रूसी सेना से 139 भारतीयों की रिहाई, बाकी 24 के लिए विदेश मंत्रालय के प्रयास जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रूसी सेना से 139 भारतीयों की रिहाई, बाकी 24 के लिए विदेश मंत्रालय के प्रयास जारी

सारांश

रूसी सेना में फँसे भारतीयों की वापसी की कहानी सिर्फ राजनयिक सफलता नहीं — यह उस खतरनाक तंत्र का पर्दाफाश है जिसमें निर्माण नौकरी का सपना दिखाकर युवाओं को युद्धक्षेत्र में धकेला जा रहा है। 139 की रिहाई के बाद भी 24 भारतीय अब भी फँसे हैं।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 31 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से मुक्त कराया जा चुका है।
शेष लगभग 24 भारतीयों की रिहाई के लिए रूसी अधिकारियों के साथ राजनयिक संपर्क जारी है।
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संदिग्ध एजेंसियों के जोखिम भरे नौकरी प्रस्तावों से सावधान रहने की चेतावनी दी।
सितंबर 2025 में MEA ने भारतीयों को रूसी सेना में शामिल होने से रोकने के लिए सख्त परामर्श जारी किया था।
रिपोर्टों के अनुसार, पीड़ित युवकों को निर्माण क्षेत्र में नौकरी का वादा करके डोनेट्स्क के युद्धक्षेत्र में भेजा गया।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 31 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि अब तक 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना की सेवा से सफलतापूर्वक मुक्त कराया जा चुका है, जबकि शेष लगभग 24 भारतीयों की वापसी सुनिश्चित करने के लिए राजनयिक प्रयास निरंतर जारी हैं। यह जानकारी MEA की द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में दी गई।

मुख्य घटनाक्रम

MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ब्रीफिंग के दौरान कहा, 'हम रूसी सेना में मौजूद बाकी भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए रूसी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। अब तक हमारे प्रयासों से 139 भारतीय नागरिकों को रिहा कराया जा चुका है। रूसी सेना में बताए जा रहे बाकी करीब 24 भारतीयों की रिहाई के लिए भी हम लगातार कोशिश कर रहे हैं।' यह बयान उस समय आया है जब यूक्रेन में संघर्ष जारी है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।

धोखाधड़ी वाले नौकरी प्रस्तावों को लेकर चेतावनी

जायसवाल ने नागरिकों को संदिग्ध नौकरी के प्रस्तावों के प्रति आगाह करते हुए कहा, 'हम एक बार फिर लोगों को सावधान करना चाहते हैं कि वे ऐसे नौकरी के प्रस्तावों से बचें, जिनमें खतरा हो और जो बेईमान लोगों या संदिग्ध एजेंसियों की ओर से दिए जा रहे हों।' यह चेतावनी उन मामलों की पृष्ठभूमि में जारी की गई है जहाँ भारतीय युवकों को निर्माण क्षेत्र में रोज़गार का झाँसा देकर यूक्रेन युद्ध की अग्रिम पंक्ति में भेज दिया गया।

पृष्ठभूमि: कैसे फँसे भारतीय नागरिक

रिपोर्टों के अनुसार, पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में मौजूद दो भारतीय युवकों ने आरोप लगाया था कि उन्हें कंस्ट्रक्शन जॉब का वादा करके रूस बुलाया गया, लेकिन बाद में उन्हें सीधे युद्धक्षेत्र में तैनात कर दिया गया। नवंबर 2024 में रूस के कब्जे में लिए गए शहर सेलीडोव से फोन पर बात करते हुए उन्होंने दावा किया था कि कम से कम 13 अन्य भारतीय भी इसी तरह की परिस्थितियों में फँसे हुए हैं। दोनों युवक छात्र या विजिटर वीजा पर रूस गए थे और एक एजेंट ने उन्हें गुमराह करके युद्ध के मैदान में भेजा।

सरकार की पूर्व चेतावनियाँ

गौरतलब है कि सितंबर 2025 में MEA ने एक सख्त परामर्श जारी करते हुए भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में शामिल होने से स्पष्ट रूप से मना किया था। यह परामर्श उन खबरों के बाद आया था जिनमें बताया गया था कि मॉस्को गए कई भारतीयों को यूक्रेन युद्ध में लड़ाकू भूमिकाओं में धकेला जा रहा था। यह ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष में विदेशी नागरिकों की भागीदारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएँ बढ़ रही हैं।

आगे की राह

MEA के अनुसार, रूसी अधिकारियों के साथ राजनयिक संपर्क जारी है और शेष 24 भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ भारत को विदेशों में काम करने जाने वाले नागरिकों के लिए सत्यापन प्रक्रिया को और कड़ा करने की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इतने नागरिक पहले फँसे कैसे। वीज़ा सत्यापन की खामियाँ और विदेशों में काम दिलाने वाले अनियमित एजेंटों पर नकेल न कसना इस संकट की जड़ है। MEA की चेतावनियाँ तब आती हैं जब नुकसान हो चुका होता है — निवारक तंत्र की अनुपस्थिति एक बड़ी नीतिगत विफलता है। जब तक एजेंट नेटवर्क पर कार्रवाई और प्रवासी श्रमिकों के लिए अनिवार्य पूर्व-प्रस्थान सत्यापन नहीं होगा, ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूसी सेना से कितने भारतीय नागरिकों को मुक्त कराया गया है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 139 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से मुक्त कराया जा चुका है। शेष लगभग 24 भारतीयों की रिहाई के लिए रूसी अधिकारियों के साथ राजनयिक प्रयास जारी हैं।
भारतीय नागरिक रूसी सेना में कैसे फँसे?
रिपोर्टों के अनुसार, इन नागरिकों को छात्र या विजिटर वीज़ा पर रूस बुलाया गया और निर्माण क्षेत्र में नौकरी का झाँसा दिया गया। बाद में उन्हें धोखे से यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में युद्ध की अग्रिम पंक्ति में भेज दिया गया।
विदेश मंत्रालय ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
MEA ने सितंबर 2025 में भारतीयों को रूसी सेना में शामिल होने से रोकने के लिए सख्त परामर्श जारी किया था। इसके अलावा, रूसी अधिकारियों के साथ निरंतर राजनयिक संपर्क के ज़रिए 139 नागरिकों को मुक्त कराया जा चुका है।
क्या अभी भी भारतीय नागरिक रूसी सेना में फँसे हैं?
हाँ, MEA के अनुसार अभी भी लगभग 24 भारतीय नागरिक रूसी सेना में बताए जा रहे हैं। उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास जारी हैं।
भारत सरकार ने संदिग्ध नौकरी प्रस्तावों को लेकर क्या चेतावनी दी है?
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे बेईमान व्यक्तियों या संदिग्ध एजेंसियों की ओर से आने वाले जोखिम भरे नौकरी प्रस्तावों से सावधान रहें। ऐसे प्रस्ताव अक्सर विदेश में निर्माण या सुरक्षा कार्य के नाम पर दिए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले