7 अगस्त 2026
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मेघालय की 'ट्रेसिंग द रूट्स' पहल: CM संगमा ने स्वदेशी विरासत दस्तावेज़ीकरण परियोजना की समीक्षा की

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मेघालय की 'ट्रेसिंग द रूट्स' पहल: CM संगमा ने स्वदेशी विरासत दस्तावेज़ीकरण परियोजना की समीक्षा की

सारांश

मेघालय सरकार की 'ट्रेसिंग द रूट्स' पहल महज़ एक शोध परियोजना नहीं — यह राज्य की खासी, गारो और जयंतिया विरासत को विज्ञान की कसौटी पर दर्ज करने का प्रयास है। CM संगमा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बताती है कि फरवरी से शुरू यह काम अब ठोस रूप ले रहा है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री कॉनराड के.
संगमा ने 7 अगस्त 2026 को 'ट्रेसिंग द रूट्स' पहल की प्रगति समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
परियोजना का संचालन कला एवं संस्कृति विभाग कर रहा है; प्रारंभिक कार्य फरवरी 2026 से जारी है।
शोध में भाषाविज्ञान, पुरातत्व, नृवंशविज्ञान, मौखिक परंपराएँ और जहाँ उचित हो आनुवंशिक अध्ययन शामिल होंगे।
स्वदेशी समुदायों की विरासत के लिए स्थायी डिजिटल अभिलेखागार विकसित किए जाएंगे।
सरकार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग की योजना बना रही है।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 7 अगस्त 2026 को राज्य की महत्वाकांक्षी 'ट्रेसिंग द रूट्स' पहल की प्रगति की समीक्षा की — यह एक अंतःविषयक अनुसंधान परियोजना है जिसका लक्ष्य मेघालय के स्वदेशी समुदायों के इतिहास, संस्कृति, भाषा और विरासत को वैज्ञानिक व अकादमिक शोध के माध्यम से दस्तावेज़ीकृत करना है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने परियोजना-मार्गदर्शन समिति के साथ विस्तृत चर्चा की और कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा संचालित इस पहल के कार्यान्वयन रोडमैप का आकलन किया।

परियोजना का उद्देश्य और दायरा

इस परियोजना का मूल उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों के साथ समन्वित कर मेघालय के स्वदेशी समुदायों की उत्पत्ति और ऐतिहासिक विकास की एक व्यापक, साक्ष्य-आधारित समझ तैयार करना है। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना एक बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाएगी जिसमें ऐतिहासिक अनुसंधान, मौखिक परंपराएँ, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ, भाषाविज्ञान, पुरातत्व, नृवंशविज्ञान और जहाँ उपयुक्त हो वहाँ आनुवंशिक अध्ययन भी शामिल होंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य अपनी जनजातीय पहचान और मौखिक इतिहास के संरक्षण को लेकर गंभीर हो रहे हैं। गौरतलब है कि मेघालय में खासी, गारो और जयंतिया जैसे प्रमुख स्वदेशी समुदाय निवास करते हैं, जिनकी सांस्कृतिक परंपराएँ अब तक मुख्यतः मौखिक रूप से ही संरक्षित रही हैं।

डिजिटल अभिलेखागार और दस्तावेज़ीकरण

ऐतिहासिक विकास के अध्ययन के अतिरिक्त, यह परियोजना पारंपरिक संस्थाओं, त्योहारों, भौतिक संस्कृति और स्वदेशी भाषाओं की जीवंतता का भी दस्तावेज़ीकरण करेगी। भावी पीढ़ियों के लिए स्थायी डिजिटल अभिलेखागार निर्मित किए जाएंगे, जो सांस्कृतिक संसाधनों और ऐतिहासिक अभिलेखों को सुरक्षित रखेंगे।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस पहल के लिए प्रारंभिक कार्य फरवरी से ही शुरू हो चुका है। इसमें अनुसंधान टीमों का गठन, परियोजना की रूपरेखा तैयार करना और अनुसंधान की प्रगति दर्ज करने, ज्ञान संसाधनों को संरक्षित करने तथा सार्वजनिक भागीदारी को सुगम बनाने के लिए समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करना शामिल है।

राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की योजना

राज्य सरकार तुलनात्मक ऐतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक अनुसंधान के लिए प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग करने की योजना बना रही है। इस पहल से शोध प्रकाशन, शैक्षिक संसाधन और व्यापक डिजिटल भंडार तैयार होने की उम्मीद है, जो शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और शैक्षणिक संस्थानों के लिए उपयोगी साबित होंगे।

मुख्यमंत्री संगमा का दृष्टिकोण

समीक्षा बैठक में संगमा ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य मेघालय की स्वदेशी विरासत की वैज्ञानिक रूप से विश्वसनीय और साक्ष्य-समर्थित समझ विकसित करना है, साथ ही मौखिक इतिहास और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रथाओं की रक्षा करना है जो राज्य की पहचान का अभिन्न अंग हैं। राज्य सरकार के अनुसार, 'ट्रेसिंग द रूट्स' का दीर्घकालिक लक्ष्य सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करना और भावी पीढ़ियों के लिए ज्ञान का एक स्थायी भंडार बनाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसके क्रियान्वयन की बारीकियों में छिपी है — विशेषकर तब जब आनुवंशिक अध्ययन जैसे संवेदनशील क्षेत्र भी दायरे में हैं। पूर्वोत्तर में जनजातीय पहचान और उत्पत्ति के सवाल राजनीतिक रूप से नाज़ुक रहे हैं, और 'साक्ष्य-आधारित' निष्कर्ष कभी-कभी प्रचलित मौखिक इतिहास से टकरा सकते हैं। यह देखना ज़रूरी होगा कि क्या परियोजना की समिति में स्वदेशी समुदायों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित की गई है, या यह मुख्यतः एक ऊपर से नीचे की ओर चलने वाली अकादमिक कवायद बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय की 'ट्रेसिंग द रूट्स' पहल क्या है?
यह मेघालय सरकार की एक अंतःविषयक अनुसंधान परियोजना है जिसका उद्देश्य राज्य के स्वदेशी समुदायों के इतिहास, संस्कृति, भाषा और विरासत को वैज्ञानिक व अकादमिक शोध के माध्यम से दस्तावेज़ीकृत करना है। इसे कला एवं संस्कृति विभाग संचालित कर रहा है और प्रारंभिक कार्य फरवरी 2026 से शुरू हो चुका है।
इस परियोजना में कौन-कौन से शोध क्षेत्र शामिल हैं?
परियोजना एक बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाएगी जिसमें ऐतिहासिक अनुसंधान, मौखिक परंपराएँ, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ, भाषाविज्ञान, पुरातत्व, नृवंशविज्ञान और जहाँ उपयुक्त हो वहाँ आनुवंशिक अध्ययन शामिल होंगे। इसका लक्ष्य स्वदेशी समुदायों की उत्पत्ति और प्रवास से जुड़े विभिन्न सिद्धांतों की जाँच करना है।
क्या इस पहल के तहत डिजिटल संसाधन भी बनाए जाएंगे?
हाँ, परियोजना के तहत स्थायी डिजिटल अभिलेखागार विकसित किए जाएंगे जो सांस्कृतिक संसाधनों और ऐतिहासिक अभिलेखों को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखेंगे। इसके अलावा शोध प्रकाशन, शैक्षिक संसाधन और व्यापक डिजिटल भंडार भी तैयार होने की उम्मीद है।
इस परियोजना से मेघालय के किन समुदायों को फायदा होगा?
यह परियोजना मुख्यतः मेघालय के स्वदेशी समुदायों — खासी, गारो और जयंतिया — के इतिहास और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए है। शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और शैक्षणिक संस्थानों को भी इससे तैयार होने वाले संसाधनों का लाभ मिलेगा।
क्या मेघालय सरकार इस परियोजना के लिए बाहरी संस्थानों से सहयोग लेगी?
हाँ, राज्य सरकार तुलनात्मक ऐतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक अनुसंधान के लिए प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग करने की योजना बना रही है। इससे परियोजना को वैश्विक अकादमिक दृष्टिकोण और संसाधन मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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