मेघालय: यूडीपी के 8 पूर्व विधायकों ने स्पीकर से मिलकर भाजपा में शामिल होने का फैसला दोहराया
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने वाले आठ पूर्व विधायकों ने 13 अक्टूबर 2026 को शिलांग में विधानसभा अध्यक्ष थॉमस ए. संगमा से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर अपने दलबदल के फैसले को औपचारिक रूप से दोहराया। इन विधायकों की अगुवाई लाखमेन रिम्बुई ने की और सभी ने एकजुट होकर स्पीकर को अपने निर्णय से अवगत कराया।
स्पीकर से मुलाकात का मकसद
रिम्बुई के अनुसार, पहली बार जब ये विधायक स्पीकर से मिलने पहुँचे थे, तब वे शहर से बाहर थे। इसीलिए 13 अक्टूबर को सभी आठों विधायक स्वयं उपस्थित हुए और पिछले बयान को फिर से दोहराया। रिम्बुई ने कहा, 'आज की बैठक का मकसद यह है कि, जैसा कि आप जानते हैं, जब हम उस दिन आए थे, तो हमारे स्पीकर शहर से बाहर थे। इसलिए आज हम सभी आठ लोग खुद यहाँ आए हैं और उस दिन जो बात कही थी, उसे फिर से दोहरा रहे हैं।'
बैठक के दौरान BJP विधायक सनबोर शुल्लाई भी इन आठ पूर्व यूडीपी विधायकों के साथ मौजूद थे। गौरतलब है कि इन आठ विधायकों ने 23 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में औपचारिक रूप से BJP की सदस्यता ग्रहण की थी।
मेघालय की राजनीति पर असर
यूडीपी मेघालय की प्रमुख क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों में से एक रही है, जहाँ ऐतिहासिक रूप से क्षेत्रीय दलों ने राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई है। आठ विधायकों का एक साथ पार्टी छोड़ना यूडीपी के लिए संगठनात्मक दृष्टि से एक बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी के सामने अब अपने जनाधार को संभालने और नए नेतृत्व को आगे लाने की चुनौती है।
BJP की पूर्वोत्तर रणनीति
यह ऐसे समय में हुआ है जब BJP पूर्वोत्तर भारत में अपनी राजनीतिक उपस्थिति को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मेघालय में अब तक क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है और BJP की वहाँ सीधी ताकत सीमित रही है। इन आठ अनुभवी विधायकों का जुड़ना राज्य में पार्टी की जड़ें गहरी करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
2028 चुनावों से पहले समीकरण बदले
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दलबदल 2028 के मेघालय विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के राजनीतिक गणित को प्रभावित कर सकता है। सभी प्रमुख दल अभी से चुनावी तैयारियों में जुटे हैं और इस घटनाक्रम से संगठनात्मक रणनीतियों और गठबंधन समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना है। विधायकों के दलबदल से जुड़ी औपचारिक प्रक्रिया स्पीकर के स्तर पर आगे बढ़ रही है, और इसके कानूनी व संवैधानिक पहलुओं पर भी नजर रहेगी।