मेघालय: यूडीपी ने संगमा सरकार से समर्थन वापस लिया, 11 विधायकों के दल-बदल के बाद बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) ने 3 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाली सरकार से अपना समर्थन औपचारिक रूप से वापस ले लिया, जिससे सत्तारूढ़ मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (एमडीए-2) गठबंधन के साथ पार्टी का करीब तीन साल का सफर समाप्त हो गया। यह निर्णय उस समय आया जब पार्टी के 11 विधायक दल-बदल कर चुके हैं और पार्टी अध्यक्ष एकमात्र बचे विधायक रह गए हैं।
केंद्रीय कार्यकारी समिति का सर्वसम्मत फैसला
यूडीपी की केंद्रीय कार्यकारी समिति (सीईसी) की बैठक में मंगलवार को सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। बैठक में पार्टी अध्यक्ष और एकमात्र विधायक मेटबाह लिंगदोह ने समिति को बताया कि उन्होंने शनिवार को मुख्यमंत्री संगमा को अपना मंत्री पद का इस्तीफा सौंप दिया था।
यूडीपी महासचिव टिटोस्टारवेल चाईने ने शिलांग में पत्रकारों को बताया कि समिति का मत था कि पार्टी अध्यक्ष के मंत्रिमंडल से हटने के बाद स्वाभाविक रूप से पार्टी को भी सरकार से अलग हो जाना चाहिए। समिति ने सर्वसम्मति से लिंगदोह से यूडीपी का समर्थन औपचारिक रूप से वापस लेने का आग्रह किया।
चाईने ने स्पष्ट किया कि लिंगदोह का इस्तीफा पूरी तरह स्वैच्छिक था और इसके पीछे कोई बाहरी दबाव नहीं था।
11 विधायकों का दल-बदल: यूडीपी का राजनीतिक संकट
2023 के मेघालय विधानसभा चुनावों में यूडीपी के 12 विधायक जीते थे। इसके बाद पार्टी को दोहरे आघात का सामना करना पड़ा।
पहले झटके में सितंबर 2026 में पार्टी के आठ विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय कर लिया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने 16 अक्टूबर 2026 को मान्यता दी। इसके बाद शेष तीन विधायकों — पॉल लिंगदोह, रेनीटन लिंगदोह टोंगखर और नुजोर्की सुंगोह — ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जन पार्टी (एनपीपी) में विलय कर लिया। इन दोनों विलयों के बाद मेटबाह लिंगदोह पार्टी के एकमात्र विधायक बचे।
गौरतलब है कि यह मेघालय की राजनीति में एक असाधारण स्थिति है, जहाँ कोई क्षेत्रीय दल महज कुछ महीनों में 12 में से 11 विधायक खो बैठे।
सरकार की संख्यात्मक स्थिति पर असर नहीं
60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में एनपीपी की संख्या अब बढ़कर 36 हो गई है, जबकि BJP के पास 10 विधायक हैं। ऐसे में यूडीपी के एकमात्र विधायक के समर्थन वापसी से सरकार की बहुमत स्थिति पर कोई व्यावहारिक असर पड़ने की संभावना नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब मेघालय में सत्तारूढ़ गठबंधन पहले से ही संख्या के लिहाज से काफी मजबूत स्थिति में है, और विपक्षी दलों की स्थिति तुलनात्मक रूप से कमजोर बनी हुई है।
यूडीपी की आगे की राह
चाईने ने कहा कि पार्टी अब अपने संगठनात्मक ढाँचे के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेगी, विशेषकर उन निर्वाचन क्षेत्रों में जहाँ अब उसके निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार से बाहर रहने से यूडीपी को स्वतंत्र रूप से जनता की चिंताओं को उठाने और मेघालय के लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह ठहराने का अवसर मिलेगा।
यूडीपी का यह कदम स्पष्ट करता है कि पार्टी विपक्षी भूमिका में रहकर अपनी राजनीतिक पहचान को फिर से स्थापित करने की कोशिश करेगी।