मेघालय: यूडीपी के 8 विधायकों ने भाजपा की सदस्यता ली, खासी-गारो को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की माँग प्रमुख मुद्दा
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के मंत्री लखमेन रिम्बुई समेत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के आठ विधायकों ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की। रिम्बुई के अनुसार यह निर्णय राज्य के चार प्रमुख मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ चली लंबी चर्चाओं के बाद लिया गया है — कोई अचानक राजनीतिक पलटी नहीं।
कौन-कौन शामिल हुए भाजपा में
दल-बदल करने वाले आठ विधायकों में लखमेन रिम्बुई, पियस मार्विन, किरमेन शिला, मेयरालबोर्न सिएम, मैथ्यू कुरबाह, ओलन सिंह सुइन, बालाजीद कुपर सिनरेम और सिनशर कुपर रॉय शामिल हैं। इन सभी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्वोत्तर राज्यों के पार्टी समन्वयक संबित पात्रा की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ली।
इस मौके पर हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिम्बुई ने कहा, 'यह अचानक नहीं हुआ है। इस पर काफी समय से चर्चा चल रही थी।'
भाजपा में आने के पीछे ये चार मुद्दे
रिम्बुई ने बताया कि भाजपा नेतृत्व से हुई बातचीत मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर केंद्रित रही, जिनके लिए केंद्र के सहयोग की ज़रूरत महसूस की जा रही थी।
पहला — संविधान की आठवीं अनुसूची में खासी और गारो भाषाओं को शामिल करने की दीर्घकालिक माँग। दूसरा — मेघालय निवासी सुरक्षा अधिनियम में संशोधन। तीसरा — राज्य में कोयला खनन से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना। चौथा — थेम इयू मावलोंग से हरिजन कॉलोनी का स्थानांतरण।
रिम्बुई ने स्पष्ट किया कि 'ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर केंद्र सरकार का समर्थन अनिवार्य है और ये विधायकों तथा मेघालय की जनता की आकांक्षाओं से सीधे जुड़े हैं।'
भाजपा नेतृत्व की प्रतिक्रिया
रिम्बुई के अनुसार, भाजपा नेताओं ने चर्चा के दौरान उठाए गए सभी मुद्दों पर 'उत्साहजनक प्रतिक्रिया' दी है। उन्होंने कहा, 'भाजपा नेताओं ने आश्वासन दिया है कि वे आने वाले दिनों में इन मसलों पर कार्रवाई करेंगे — इसीलिए हम यहाँ शामिल होने आए।' हालांकि इन आश्वासनों का कोई लिखित या सार्वजनिक दस्तावेज़ अभी तक सामने नहीं आया है।
मेघालय विधानसभा में बदला समीकरण
इस दल-बदल से पहले 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में भाजपा के पास केवल दो विधायक थे, जबकि यूडीपी के 12 विधायक थे। आठ विधायकों के जाने के बाद यूडीपी की संख्या घटकर चार रह गई है, जबकि भाजपा की सीटें बढ़कर 10 हो गई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर में भाजपा अपना जनाधार और गठबंधन आधार लगातार विस्तृत करती रही है।
गौरतलब है कि मेघालय में कोनराड संगमा के नेतृत्व वाली नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) सरकार में यूडीपी पहले से गठबंधन सहयोगी रही है। इस दल-बदल से राज्य की सत्ता-संरचना में आगे क्या बदलाव आएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
आगे क्या होगा
इन विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत इनकी सदस्यता पर प्रश्न उठ सकते हैं, जिसका फैसला विधानसभा अध्यक्ष को करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम मेघालय में आगामी राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।