मेसी इवेंट धोखाधड़ी: केरल सरकार की विजिलेंस जांच मंजूरी में देरी पर उठे गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार द्वारा फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के नाम से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में पूर्व मंत्री वी. अब्दुरहिमान के खिलाफ विजिलेंस जांच की मंजूरी देने में हो रही देरी ने तिरुवनंतपुरम में प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 15 अक्टूबर 2026 तक यह मामला अटका हुआ है, क्योंकि संबंधित फाइल अभी तक राज्यपाल की अनुमति के लिए लोक भवन (राजभवन) नहीं भेजी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस महानिदेशक (DGP) ने 5 अक्टूबर 2026 को गृह विभाग को एक औपचारिक सिफारिश भेजी थी, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत वी. अब्दुरहिमान, उनके निजी सचिव सत्यपालन और केरल राज्य खेल परिषद के पूर्व अध्यक्ष यू. शराफ अली के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति माँगी गई थी। इसके बाद 10 दिन बीत जाने के बावजूद फाइल गृह विभाग में ही अटकी हुई है।
गौरतलब है कि विजिलेंस जांच शुरू करने के लिए राज्यपाल की पूर्व मंजूरी कानूनी रूप से अनिवार्य है। इस वजह से विशेष जांच दल (SIT) तीनों आरोपियों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ा पा रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद फुटबॉल से जुड़ी एक सरकारी पहल में लियोनेल मेसी के नाम के कथित अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोप है कि इस आयोजन में वित्तीय अनियमितताएँ हुईं और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया। SIT इन्हीं कथित अनियमितताओं की गहन जांच करना चाहती है, जिसके लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मंजूरी आवश्यक है।
यह ऐसे समय में आया है जब केरल में सत्तारूढ़ दल पहले से ही कई प्रशासनिक विवादों को लेकर विपक्षी दबाव में है।
सरकार की प्रतिक्रिया
गृह विभाग ने देरी का कारण विधानसभा सत्र का भारी बोझ बताया है। विभाग का कहना है कि विधायी कार्यों की अधिकता के कारण अन्य फाइलों की समीक्षा नहीं हो पा रही है। हालाँकि, सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि फाइल कब लोक भवन भेजी जाएगी या प्रस्तावित विजिलेंस मामले पर अंतिम निर्णय कब तक लिया जाएगा।
आलोचकों का कहना है कि विधानसभा सत्र को देरी का औचित्य बताना पर्याप्त नहीं है, खासकर जब DGP की सिफारिश दस दिन से अधिक समय से लंबित है।
SIT की जांच पर असर
मंजूरी के अभाव में SIT की जांच व्यावहारिक रूप से ठप पड़ी है। वी. अब्दुरहिमान, सत्यपालन और यू. शराफ अली — तीनों के खिलाफ प्रस्तावित विजिलेंस केस तब तक दर्ज नहीं हो सकता जब तक राज्यपाल की औपचारिक स्वीकृति नहीं मिलती। यह कानूनी बाधा जांच की गति और विश्वसनीयता दोनों पर असर डाल रही है।
आगे की राह
अब सबकी नज़र इस पर है कि गृह विभाग फाइल कब राजभवन भेजता है और राज्यपाल इस पर क्या रुख अपनाते हैं। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, मेसी इवेंट से जुड़ा कथित धोखाधड़ी मामला कानूनी और प्रशासनिक अनिश्चितता में लटका रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस देरी की हर गुज़रते दिन के साथ आलोचनात्मक व्याख्या होने की संभावना बढ़ती जा रही है।