10 अक्टूबर 2026
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गृह मंत्रालय का राज्यों को निर्देश: जंतर मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली पुलिस से करें तालमेल

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गृह मंत्रालय का राज्यों को निर्देश: जंतर मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली पुलिस से करें तालमेल

सारांश

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के DGP को पत्र लिखकर जंतर मंतर पर सीजेपी के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन — जो CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर था — को रोकने के निर्देश दिए हैं। प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है और खुफिया जानकारी के आधार पर रियल टाइम समन्वय का आदेश दिया गया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 10 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के DGP को पत्र लिखा।
सीजेपी का जंतर मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर था।
विरोध प्रदर्शन का कारण मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) में कथित अनियमितताएँ हैं।
मंत्रालय ने अधिकारियों, खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस के बीच रियल टाइम खुफिया साझाकरण का आदेश दिया।
पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के आदेश का हवाला देते हुए निर्धारित क्षेत्रों में सभाओं के नियमों के सख्त पालन पर जोर दिया गया।
मंत्रालय ने सीजेपी और उसके सहयोगियों पर पूर्व में कानूनी निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया।

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 10 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि वे नई दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रस्तावित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए राजधानी की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए तत्काल एहतियाती कदम उठाएँ। यह प्रस्तावित प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर बुलाया गया था, जो मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्रालय ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि अधिकारियों ने सीजेपी की ओर से प्रस्तावित सभा पर औपचारिक रूप से रोक लगा दी है और संगठन को इसकी सूचना भी दे दी गई है। इसके बावजूद, मंत्रालय के अनुसार भरोसेमंद खुफिया जानकारी के आधार पर आशंका है कि सीजेपी और उसके सहयोगी समूह बिना अनुमति के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने का प्रयास कर सकते हैं।

पत्र में केंद्रीय गृह सचिव ने इस प्रस्तावित जमावड़े को कानून व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था के लिहाज से गंभीर मामला बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और कानून का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है।

सरकार की प्रतिक्रिया और निर्देश

मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की खुफिया एजेंसियों, सीमा और पारगमन अधिकारियों तथा दिल्ली पुलिस के बीच लगातार और रियल टाइम खुफिया जानकारी साझा करने की माँग की है। निर्देश में यह भी कहा गया कि किसी भी अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए समन्वित ऑपरेशनल उपाय किए जाएँ।

पत्र में कहा गया, "मंत्रालय कानून व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने को एक ज़रूरी संवैधानिक दायित्व मानता है। कानून के शासन को बनाए रखने के लिए इनका सख्ती और बिना किसी समझौते के पालन किया जाना ज़रूरी है।"

पूर्व घटनाओं का हवाला

मंत्रालय ने आरोप लगाया कि सीजेपी और उसके सहयोगी राजनीतिक दलों, संगठनों और व्यक्तियों का पहले के कार्यक्रमों के दौरान कानूनी निर्देशों का पालन न करने का इतिहास रहा है। मंत्रालय के अनुसार, पूर्व में अलग अलग राज्यों से दिल्ली में हुए जमावड़ों के कारण सार्वजनिक व्यवस्था में भारी खलल पड़ा था और सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचा था।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर कई विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष पहले से ही संसद और सड़क दोनों स्तरों पर मुखर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संदर्भ

केंद्रीय गृह सचिव ने अपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें निर्धारित क्षेत्रों में सभाओं के लिए बने नियमों के सख्त पालन पर बल दिया गया था। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है और ऐसे किसी भी प्रयास को कानूनी दायरे में रहते हुए रोका जाएगा।

आगे क्या

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि वे दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करें और अहम बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए व्यापक ऑपरेशनल नियमों के तहत तत्काल कदम उठाएँ। इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील घटनाक्रम पर देशभर की नज़रें टिकी हैं, विशेष रूप से इसलिए कि यह विरोध प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के मुद्दे से जुड़ा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर उठ रहे सवालों को दबाने की कोशिश का आरोप जो विपक्ष लगाएगा। SIR प्रक्रिया को लेकर पहले से ही गंभीर सवाल सार्वजनिक दायरे में हैं और CEC के इस्तीफे की माँग राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। केंद्र ने प्रदर्शन की अनुमति न देकर और राज्यों को एकजुट करके अपनी ताकत तो दिखाई, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह कार्रवाई अदालतों में टिकती है और क्या विपक्ष इसे 'लोकतांत्रिक आवाज़ दबाने' के नैरेटिव में बदलने में सफल होता है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गृह मंत्रालय ने राज्यों को सीजेपी प्रदर्शन रोकने के निर्देश क्यों दिए?
मंत्रालय ने कहा कि सीजेपी को जंतर मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है और खुफिया जानकारी के अनुसार संगठन बिना अनुमति के दिल्ली में प्रवेश करने का प्रयास कर सकता है। इससे सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने और संपत्ति को नुकसान पहुँचने की आशंका जताई गई।
सीजेपी का यह विरोध प्रदर्शन किस मुद्दे पर था?
यह प्रदर्शन मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग के लिए बुलाया गया था। सीजेपी और उससे जुड़े समूहों ने इसे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता का सवाल बताया।
गृह मंत्रालय ने राज्यों को क्या क्या करने के निर्देश दिए?
मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ तालमेल बिठाने, खुफिया एजेंसियों और सीमा अधिकारियों के बीच रियल टाइम जानकारी साझा करने तथा किसी भी अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए तत्काल एहतियाती कदम उठाने को कहा।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनों के बारे में कोई आदेश दिया है?
हाँ, केंद्रीय गृह सचिव ने अपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के आदेश का उल्लेख किया, जिसमें निर्धारित क्षेत्रों में सभाओं के लिए बने नियमों के सख्त पालन पर बल दिया गया था। मंत्रालय ने इसी आधार पर राज्यों को कानूनी दायरे में रहते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया।
मंत्रालय ने सीजेपी के पूर्व आचरण के बारे में क्या कहा?
मंत्रालय ने आरोप लगाया कि सीजेपी और उसके सहयोगी संगठनों का पहले के कार्यक्रमों के दौरान कानूनी निर्देशों की अनदेखी करने का रिकॉर्ड रहा है। पहले के जमावड़ों में सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने और सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचने की घटनाएँ हो चुकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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