गृह मंत्रालय का राज्यों को निर्देश: जंतर मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली पुलिस से करें तालमेल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 10 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि वे नई दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रस्तावित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए राजधानी की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए तत्काल एहतियाती कदम उठाएँ। यह प्रस्तावित प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर बुलाया गया था, जो मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्रालय ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि अधिकारियों ने सीजेपी की ओर से प्रस्तावित सभा पर औपचारिक रूप से रोक लगा दी है और संगठन को इसकी सूचना भी दे दी गई है। इसके बावजूद, मंत्रालय के अनुसार भरोसेमंद खुफिया जानकारी के आधार पर आशंका है कि सीजेपी और उसके सहयोगी समूह बिना अनुमति के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने का प्रयास कर सकते हैं।
पत्र में केंद्रीय गृह सचिव ने इस प्रस्तावित जमावड़े को कानून व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था के लिहाज से गंभीर मामला बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और कानून का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है।
सरकार की प्रतिक्रिया और निर्देश
मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की खुफिया एजेंसियों, सीमा और पारगमन अधिकारियों तथा दिल्ली पुलिस के बीच लगातार और रियल टाइम खुफिया जानकारी साझा करने की माँग की है। निर्देश में यह भी कहा गया कि किसी भी अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए समन्वित ऑपरेशनल उपाय किए जाएँ।
पत्र में कहा गया, "मंत्रालय कानून व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने को एक ज़रूरी संवैधानिक दायित्व मानता है। कानून के शासन को बनाए रखने के लिए इनका सख्ती और बिना किसी समझौते के पालन किया जाना ज़रूरी है।"
पूर्व घटनाओं का हवाला
मंत्रालय ने आरोप लगाया कि सीजेपी और उसके सहयोगी राजनीतिक दलों, संगठनों और व्यक्तियों का पहले के कार्यक्रमों के दौरान कानूनी निर्देशों का पालन न करने का इतिहास रहा है। मंत्रालय के अनुसार, पूर्व में अलग अलग राज्यों से दिल्ली में हुए जमावड़ों के कारण सार्वजनिक व्यवस्था में भारी खलल पड़ा था और सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचा था।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर कई विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष पहले से ही संसद और सड़क दोनों स्तरों पर मुखर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संदर्भ
केंद्रीय गृह सचिव ने अपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें निर्धारित क्षेत्रों में सभाओं के लिए बने नियमों के सख्त पालन पर बल दिया गया था। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है और ऐसे किसी भी प्रयास को कानूनी दायरे में रहते हुए रोका जाएगा।
आगे क्या
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि वे दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करें और अहम बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा के लिए व्यापक ऑपरेशनल नियमों के तहत तत्काल कदम उठाएँ। इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील घटनाक्रम पर देशभर की नज़रें टिकी हैं, विशेष रूप से इसलिए कि यह विरोध प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के मुद्दे से जुड़ा है।