29 अक्टूबर 2026
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एमएलसी चुनाव में कांग्रेस को शून्य सीट: PM मोदी के X पोस्ट पर भड़की सियासत, AIMIM कांग्रेस आमने सामने

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एमएलसी चुनाव में कांग्रेस को शून्य सीट: PM मोदी के X पोस्ट पर भड़की सियासत, AIMIM कांग्रेस आमने सामने

सारांश

एमएलसी चुनाव में कांग्रेस का खाता नहीं खुला और PM मोदी ने X पर टिप्पणी की — बस, इतना काफी था सियासी बवंडर के लिए। AIMIM ने कांग्रेस को आईना दिखाया, कांग्रेस ने वाराणसी और बैलेट पेपर का हथियार उठाया। असली सवाल यह है कि हार के बाद कांग्रेस रणनीति बदलेगी या बहस का रुख मोड़ेगी।

मुख्य बातें

एमएलसी चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली, जिस पर PM नरेंद्र मोदी ने एक्स (X) पर पोस्ट किया।
AIMIM राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने मुंबई में कांग्रेस को हार के वास्तविक कारणों पर आत्ममंथन की सलाह दी।
पठान ने स्पष्ट किया कि AIMIM ने इन चुनावों में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने वाराणसी में बैलेट पेपर चुनाव में भाजपा की हार का संदर्भ दिया।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने माँग की कि उत्तराखंड , उत्तर प्रदेश और पंजाब के आगामी चुनाव भी बैलेट पेपर से हों।
तिवारी ने मोदी को शायद पहला ऐसा प्रधानमंत्री बताया जिसने सीमित दायरे वाले एमएलसी चुनाव पर सार्वजनिक टिप्पणी की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एमएलसी चुनाव परिणामों पर किए गए एक्स (X) पोस्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय राजनीति में नई गर्मी ला दी, जब कांग्रेस को इन चुनावों में एक भी सीट नहीं मिली। ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कांग्रेस को आत्ममंथन की नसीहत दी, जबकि कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने मोदी के पोस्ट को निशाने पर लिया।

AIMIM की कांग्रेस को नसीहत

वारिस पठान ने मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस से कहा कि हार के लिए किसी अन्य को ज़िम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उनके अनुसार, "जब कोई एक उंगली दूसरे की ओर उठाता है, तो चार उंगलियाँ अपनी ओर होती हैं।" पठान ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए आत्मचिंतन अनिवार्य है।

उल्लेखनीय है कि पठान ने यह भी स्पष्ट किया कि AIMIM और उसके अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इन चुनावों में किसी भी सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा था। इस तथ्य का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनकी पार्टी मैदान में ही नहीं थी, तो कांग्रेस अपनी पराजय का दोष किस पर मढ़ेगी।

कांग्रेस की पलटवार — वाराणसी और बैलेट पेपर

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने नई दिल्ली में मोदी के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए वाराणसी का प्रसंग उठाया। उन्होंने याद दिलाया कि वाराणसी में हुए चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए थे, जहाँ भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने मोदी के एक्स पोस्ट को असाधारण बताते हुए कहा कि शायद मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने इतने सीमित दायरे वाले एमएलसी चुनाव पर सार्वजनिक टिप्पणी की है। तिवारी ने प्रधानमंत्री की "चिंता, अधीरता और बेचैनी" का ज़िक्र करते हुए कहा कि वह उनकी प्रतिक्रिया की भावना समझ सकते हैं।

बैलेट पेपर बनाम EVM — नई माँग

प्रमोद तिवारी ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए माँग की कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पंजाब में आगामी चुनाव भी बैलेट पेपर से कराए जाएँ। उनके अनुसार, एमएलसी चुनाव के नतीजे यह साबित करते हैं कि बैलेट पेपर प्रणाली पारदर्शी और विश्वसनीय है।

गौरतलब है कि एमएलसी चुनाव परंपरागत रूप से सीमित मतदाता वर्ग — जैसे विधायक, स्थानीय निकाय प्रतिनिधि या शिक्षक — के बीच होते हैं और राष्ट्रीय नेताओं द्वारा इन पर इस स्तर की टिप्पणी असामान्य मानी जाती है। यही कारण है कि मोदी के पोस्ट को विपक्ष ने बड़े संदर्भ में देखा।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की दिशा

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ चल रही हैं और ईवीएम बनाम बैलेट पेपर बहस एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श में लौट आई है। कांग्रेस द्वारा वाराणसी और बैलेट पेपर का संदर्भ देना यह संकेत देता है कि पार्टी इस हार को तकनीकी राजनीतिक बहस की ओर मोड़ने की कोशिश में है। AIMIM का कांग्रेस को आत्ममंथन की सलाह देना भी उल्लेखनीय है, क्योंकि दोनों दलों के बीच मतदाता आधार को लेकर प्रतिस्पर्धा रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस इस हार के बाद अपनी रणनीति में बदलाव करती है, या फिर बैलेट पेपर की माँग को लेकर संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर दबाव बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह विपक्षी एकजुटता की कमज़ोरी का स्पष्ट संकेत है। कांग्रेस का बैलेट पेपर मुद्दे पर पलटवार रणनीतिक भले हो, लेकिन यह हार के मूल कारणों से ध्यान भटकाने की कोशिश भी मानी जा सकती है। जब तक कांग्रेस हर हार को तकनीकी प्रक्रियागत बहस में बदलती रहेगी, तब तक संगठनात्मक पुनर्निर्माण का सवाल अनुत्तरित रहेगा।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएलसी चुनाव में कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं?
इन एमएलसी चुनावों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। इसी शून्य प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (X) पर पोस्ट किया, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई।
AIMIM के वारिस पठान ने कांग्रेस को क्या कहा?
AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने मुंबई में कहा कि कांग्रेस को हार के वास्तविक कारणों पर गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AIMIM ने इन चुनावों में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था, इसलिए कांग्रेस किसी बाहरी कारण को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकती।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने PM मोदी के पोस्ट पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने वाराणसी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। उनके अनुसार यह तथ्य प्रासंगिक है जब चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बात होती है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने बैलेट पेपर पर क्या माँग रखी?
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने माँग की कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले आगामी चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि PM मोदी शायद पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सीमित दायरे वाले एमएलसी चुनाव पर सार्वजनिक टिप्पणी की है।
एमएलसी चुनाव क्या होते हैं और ये विधानसभा चुनाव से कैसे अलग हैं?
एमएलसी यानी विधान परिषद सदस्य के चुनाव उन राज्यों में होते हैं जहाँ द्विसदनीय विधायिका है। इनमें मतदाता विधायक, स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, शिक्षक या स्नातक जैसे सीमित वर्ग होते हैं — आम जनता नहीं — इसीलिए इन्हें सीमित दायरे का चुनाव माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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