एमएलसी चुनाव में कांग्रेस को शून्य सीट: PM मोदी के X पोस्ट पर भड़की सियासत, AIMIM कांग्रेस आमने सामने
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एमएलसी चुनाव परिणामों पर किए गए एक्स (X) पोस्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय राजनीति में नई गर्मी ला दी, जब कांग्रेस को इन चुनावों में एक भी सीट नहीं मिली। ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कांग्रेस को आत्ममंथन की नसीहत दी, जबकि कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने मोदी के पोस्ट को निशाने पर लिया।
AIMIM की कांग्रेस को नसीहत
वारिस पठान ने मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस से कहा कि हार के लिए किसी अन्य को ज़िम्मेदार ठहराना सही नहीं है। उनके अनुसार, "जब कोई एक उंगली दूसरे की ओर उठाता है, तो चार उंगलियाँ अपनी ओर होती हैं।" पठान ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए आत्मचिंतन अनिवार्य है।
उल्लेखनीय है कि पठान ने यह भी स्पष्ट किया कि AIMIM और उसके अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इन चुनावों में किसी भी सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा था। इस तथ्य का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनकी पार्टी मैदान में ही नहीं थी, तो कांग्रेस अपनी पराजय का दोष किस पर मढ़ेगी।
कांग्रेस की पलटवार — वाराणसी और बैलेट पेपर
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने नई दिल्ली में मोदी के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए वाराणसी का प्रसंग उठाया। उन्होंने याद दिलाया कि वाराणसी में हुए चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए थे, जहाँ भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने मोदी के एक्स पोस्ट को असाधारण बताते हुए कहा कि शायद मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने इतने सीमित दायरे वाले एमएलसी चुनाव पर सार्वजनिक टिप्पणी की है। तिवारी ने प्रधानमंत्री की "चिंता, अधीरता और बेचैनी" का ज़िक्र करते हुए कहा कि वह उनकी प्रतिक्रिया की भावना समझ सकते हैं।
बैलेट पेपर बनाम EVM — नई माँग
प्रमोद तिवारी ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए माँग की कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पंजाब में आगामी चुनाव भी बैलेट पेपर से कराए जाएँ। उनके अनुसार, एमएलसी चुनाव के नतीजे यह साबित करते हैं कि बैलेट पेपर प्रणाली पारदर्शी और विश्वसनीय है।
गौरतलब है कि एमएलसी चुनाव परंपरागत रूप से सीमित मतदाता वर्ग — जैसे विधायक, स्थानीय निकाय प्रतिनिधि या शिक्षक — के बीच होते हैं और राष्ट्रीय नेताओं द्वारा इन पर इस स्तर की टिप्पणी असामान्य मानी जाती है। यही कारण है कि मोदी के पोस्ट को विपक्ष ने बड़े संदर्भ में देखा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की दिशा
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ चल रही हैं और ईवीएम बनाम बैलेट पेपर बहस एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श में लौट आई है। कांग्रेस द्वारा वाराणसी और बैलेट पेपर का संदर्भ देना यह संकेत देता है कि पार्टी इस हार को तकनीकी राजनीतिक बहस की ओर मोड़ने की कोशिश में है। AIMIM का कांग्रेस को आत्ममंथन की सलाह देना भी उल्लेखनीय है, क्योंकि दोनों दलों के बीच मतदाता आधार को लेकर प्रतिस्पर्धा रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस इस हार के बाद अपनी रणनीति में बदलाव करती है, या फिर बैलेट पेपर की माँग को लेकर संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर दबाव बनाती है।