नीस में मोदी-मैक्रों द्विपक्षीय वार्ता, भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 14 जून 2026 को फ्रांस के शहर नीस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल शामिल रहे।
बैठक का दायरा और एजेंडा
इस वार्ता में दोनों नेताओं ने भारत-फ्रांस द्विपक्षीय संबंधों के समग्र दायरे की समीक्षा की, जिसे इस वर्ष की शुरुआत में विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया था। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेज़ी से विस्तार पा रहा है।
विला केर्लियोस में अनौपचारिक मुलाकात
औपचारिक वार्ता से पूर्व दोनों राष्ट्र प्रमुख नीस स्थित विला केर्लियोस गए, जहाँ वे हल्के-फुल्के माहौल में बातचीत करते नज़र आए। यह अनौपचारिक मेलजोल दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल को रेखांकित करता है, जो पिछले कुछ वर्षों में और प्रगाढ़ हुआ है।
भारत इनोवेट्स 2026 का उद्घाटन
द्विपक्षीय बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भारत इनोवेट्स 2026 कार्यक्रम का उद्घाटन किया, जिसमें राष्ट्रपति मैक्रों भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मोदी ने दुनिया भर के निवेशकों और नवप्रवर्तकों को वैश्विक चुनौतियों के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने में भारत के साथ साझेदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत में सुधारों की गति अनवरत जारी रहेगी और देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम और अधिक विस्तार के लिए तैयार है। मोदी ने भारत के विश्व के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में उभरने पर विशेष बल दिया।
मैक्रों ने मोदी को दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी की ओर मुखातिब होकर कहा, 'मैं आपका यहाँ आने के लिए ही आभार नहीं जताता, बल्कि इस मौके पर मैं आपको एक खास उपलब्धि के लिए बधाई भी देता हूँ। कुछ दिन पहले ही आप स्वतंत्रता के बाद से भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं।' मैक्रों ने आगे कहा कि 'यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो न केवल आपके व्यक्तिगत नेतृत्व और निरंतरता को दर्शाती है, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और स्थिरता का भी प्रतीक है।' मैक्रों के इन शब्दों पर वहाँ उपस्थित लोगों ने तालियों से समर्थन व्यक्त किया।
भारत-फ्रांस सहयोग: आगे की राह
मैक्रों ने भारत-फ्रांस संबंधों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए स्वीकार किया कि भारत नवाचार का देश है। उन्होंने कहा कि फ्रांस रक्षा, तकनीक और अनेक अन्य क्षेत्रों में 'मेक इन इंडिया' का सक्रिय भागीदार रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को दोनों नेताओं ने अपरिहार्य बताया। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे भू-राजनीतिक परिदृश्य में हुई है जब यूरोप और एशिया दोनों में नए गठबंधनों की पुनर्संरचना हो रही है, और भारत-फ्रांस धुरी इस संदर्भ में विशेष महत्व रखती है।