25 अगस्त 2026
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कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद: मध्य प्रदेश कैबिनेट आज विजय शाह पर मुकदमे की मंजूरी पर करेगी फैसला

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कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद: मध्य प्रदेश कैबिनेट आज विजय शाह पर मुकदमे की मंजूरी पर करेगी फैसला

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय की बार-बार फटकार और एसआईटी की रिपोर्ट के बाद मध्य प्रदेश कैबिनेट आज उस फैसले की दहलीज पर है जिसे महीनों से टाला जाता रहा — कुंवर विजय शाह पर मुकदमे की मंजूरी। 31 अगस्त की सुनवाई से पहले यह निर्णय सरकार की मंशा की असली परीक्षा है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश कैबिनेट 25 अगस्त को मंत्री कुंवर विजय शाह पर मुकदमे की मंजूरी पर फैसला ले सकती है।
एसआईटी ने बीएनएस धारा 196(1)(ए) के तहत अभियोजन की अनुमति मांगी है।
विवाद मई 2025 में महू में दिए गए शाह के उस बयान से शुरू हुआ जिसे कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकियों के समुदाय से जोड़ने वाला माना गया।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शाह की भाषा को 'गटर की भाषा' कहा और एफआईआर का आदेश दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को कई बार फटकारा; 31 अगस्त को अगली सुनवाई निर्धारित है।
मंजूरी मिलने पर प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा जाएगा।

मध्य प्रदेश कैबिनेट 25 अगस्त 2026 को आदिवासी मामलों के मंत्री कुंवर विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति पर निर्णायक फैसला ले सकती है। यह मामला भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में शाह की विवादित सार्वजनिक टिप्पणी से उपजा है, जिसने देशभर में आक्रोश फैलाया था। सूत्रों के अनुसार, यदि कैबिनेट प्रस्ताव को स्वीकृति देती है तो इसे राज्यपाल के पास भेजा जाएगा और 31 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई से पहले सरकार की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

एसआईटी की जांच और कानूनी आधार

इस मामले की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने अपनी जांच पूरी कर ली है। एसआईटी ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196(1)(ए) के तहत शाह के विरुद्ध अभियोजन की मंजूरी मांगी है। चूँकि किसी मंत्री या सरकारी सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है, इसी प्रावधान के कारण एसआईटी की रिपोर्ट आने के बावजूद मामला लंबे समय से अटका हुआ था।

विवाद की जड़: मई 2025 की टिप्पणी

यह पूरा विवाद मई 2025 में तब शुरू हुआ जब कुंवर विजय शाह ने इंदौर के निकट महू में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि 'उनके ही समुदाय की एक बहन को बदला लेने के लिए भेजा गया है।' इस बयान को कर्नल कुरैशी को पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों के समुदाय से जोड़ने के तौर पर व्यापक रूप से देखा गया। उल्लेखनीय है कि कर्नल सोफिया कुरैशी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया ब्रीफिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

न्यायपालिका की कड़ी प्रतिक्रिया

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए शाह की भाषा को 'गटर की भाषा' करार दिया और एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईटी का गठन किया और राज्य सरकार को मंजूरी में विलंब के लिए कई अवसरों पर कड़ी फटकार लगाई। 19 जनवरी को शीर्ष अदालत ने सरकार को दो सप्ताह का समय दिया; कोई कार्रवाई न होने पर मई में चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया। जुलाई में एक कार्यालय रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि सरकार की ओर से कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया गया, जिससे प्रशासनिक निष्क्रियता उजागर हुई।

शाह की माफी और न्यायालय का रुख

कुंवर विजय शाह कई बार सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं और दावा किया है कि उन्होंने 'देशभक्ति के जोश' में यह टिप्पणी की थी तथा उनका इरादा कर्नल कुरैशी या सेना का अपमान करना नहीं था। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इससे पहले उनकी माफी की ईमानदारी पर सवाल उठाए हैं। उनके इस्तीफे की माँग भी विभिन्न पक्षों की ओर से उठती रही है।

आगे क्या होगा

यदि मध्य प्रदेश कैबिनेट आज मंजूरी प्रदान करती है तो प्रस्ताव राज्यपाल के पास जाएगा और 31 अगस्त की सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय के सामने सरकार की औपचारिक स्थिति रखी जा सकेगी। यह मामला सेना के सम्मान, सांप्रदायिक संवेदनशीलता और मंत्रियों की जवाबदेही के व्यापक सवालों से जुड़ा है, जिस पर देशभर की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

एसआईटी की पूर्ण रिपोर्ट और उच्च न्यायालय की 'गटर की भाषा' वाली टिप्पणी के बावजूद मध्य प्रदेश सरकार महीनों तक निर्णय टालती रही — यह संयोग नहीं, रणनीति है। असली सवाल यह नहीं कि कैबिनेट आज मंजूरी देगी या नहीं, बल्कि यह है कि क्या न्यायपालिका के दबाव के बिना कोई राज्य सरकार अपने ही मंत्री के खिलाफ स्वेच्छा से कार्रवाई करती। यह मामला सेना के अपमान से कहीं आगे जाकर उस संरचनात्मक खामी को उजागर करता है जिसमें मंत्रियों पर मुकदमे की अनुमति उसी सरकार से माँगी जाती है जिसका वे हिस्सा हैं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नल सोफिया कुरैशी और विजय शाह विवाद क्या है?
मई 2025 में मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह ने महू में एक कार्यक्रम में कहा था कि 'उनके ही समुदाय की बहन को बदला लेने भेजा गया है।' इस बयान को ऑपरेशन सिंदूर की मीडिया ब्रीफिंग करने वाली सेना अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को पहलगाम हमले के आतंकियों के समुदाय से जोड़ने वाला माना गया, जिससे देशव्यापी आक्रोश फैला।
मध्य प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी क्यों जरूरी है?
भारतीय कानून के तहत किसी मंत्री या सरकारी सेवक पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है। एसआईटी ने बीएनएस धारा 196(1)(ए) के तहत शाह पर अभियोजन की मंजूरी माँगी है, जो कैबिनेट की स्वीकृति के बाद राज्यपाल के पास जाएगी।
सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में क्या कर चुका है?
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईटी का गठन किया और सरकार को 19 जनवरी को दो सप्ताह, फिर मई में चार सप्ताह का समय दिया। जुलाई में न्यायालय की रिपोर्ट में सरकार की ओर से कोई दस्तावेज न होने की बात सामने आई। 31 अगस्त को अगली सुनवाई निर्धारित है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या कहा था?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए शाह की टिप्पणी को 'गटर की भाषा' बताया और एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। न्यायालय ने उनके इस्तीफे की माँग के संदर्भ में भी कड़ी टिप्पणी की थी।
विजय शाह की माफी पर सर्वोच्च न्यायालय का क्या रुख रहा है?
कुंवर विजय शाह ने कई बार माफी माँगते हुए कहा कि यह बयान 'देशभक्ति के जोश' में दिया गया था और उनका इरादा सेना या कर्नल कुरैशी का अपमान करना नहीं था। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी माफी की ईमानदारी पर पहले ही सवाल उठाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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