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मध्य प्रदेश STF का फर्जी पासपोर्ट रैकेट पर बड़ा खुलासा: 70 नकली पासपोर्ट बरामद, 6 गिरफ्तार

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मध्य प्रदेश STF का फर्जी पासपोर्ट रैकेट पर बड़ा खुलासा: 70 नकली पासपोर्ट बरामद, 6 गिरफ्तार

सारांश

मध्य प्रदेश STF ने एक संगठित रैकेट का पर्दाफाश किया है जिसमें बौद्ध मठों के पतों का बार-बार इस्तेमाल कर 70 फर्जी पासपोर्ट बनवाए गए। 6 गिरफ्तार, 75 की पहचान, और जाँच अब 6 राज्यों तक फैली — साथ में पासपोर्ट सेवा केंद्र अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश STF ने संगठित फर्जी पासपोर्ट रैकेट में करीब 70 नकली पासपोर्ट बरामद किए।
अब तक 6 संदिग्ध गिरफ्तार ; सबसे ताज़ा गिरफ्तारी 23 सितंबर 2026 को गयाप्रसाद गौतम की हुई।
भोपाल अन्नानगर से 40, डबरा से 17, बैतूल आमला बौद्ध मठ से 11 और छिंदवाड़ा-पाहुर्ना से 2 मामले चिह्नित।
70 में से 50 पासपोर्ट में केवल 3 गवाह — गयाप्रसाद गौतम, गुलाब राय, रियाल चौधरी — बार-बार इस्तेमाल हुए।
पासपोर्ट सेवा केंद्र के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत की जाँच जारी।
जाँच का दायरा 6 राज्यों — मध्य प्रदेश, असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब — तक विस्तारित; 75 आरोपी चिह्नित।

मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 25 सितंबर 2026 को एक संगठित फर्जी पासपोर्ट रैकेट का पर्दाफाश करते हुए करीब 70 नकली पासपोर्ट बरामद किए हैं। ये पासपोर्ट राज्य के भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा, डबरा और पाहुर्ना जैसे विभिन्न स्थानों पर बौद्ध मठों के पतों का इस्तेमाल कर बनवाए गए थे। STF के अनुसार जाँच में अब तक 6 संदिग्धों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 75 आरोपियों की पहचान की जा चुकी है।

मुख्य घटनाक्रम

STF के डीआईजी राहुल लोधा ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला बहुस्तरीय है और जाँच अभी जारी है। उन्होंने कहा, 'यह एक बहुस्तरीय मामला है और जाँच अभी भी चल रही है। अब तक छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें दो दिन पहले की गई ताज़ा गिरफ्तारी भी शामिल है।'

सबसे ताज़ा गिरफ्तारी 23 सितंबर 2026 को गयाप्रसाद गौतम की हुई। इससे पहले 25 अगस्त से 18 सितंबर के बीच रियाल चौधरी उर्फ भंते मेतानंद, विप्लब अधिकारी, प्रियन रॉय, जॉय चौधरी और नसीम अख्तर को गिरफ्तार किया जा चुका था।

मठों के पतों का बार-बार इस्तेमाल

जाँच में सामने आए एक अहम पैटर्न के तहत पासपोर्ट आवेदनों में बौद्ध मठों के पतों का बार-बार उपयोग किया गया था। STF ने भोपाल के अन्नानगर से जुड़े 40 मामले, डबरा से 17, बैतूल के आमला बौद्ध मठ से 11 और छिंदवाड़ा-पाहुर्ना से 2 मामले चिह्नित किए हैं।

गवाहों के उपयोग में भी एक स्पष्ट पैटर्न देखा गया। 70 में से करीब 50 फर्जी पासपोर्ट के मामलों में तीन व्यक्ति — गयाप्रसाद गौतम, गुलाब राय और रियाल चौधरी उर्फ भंते मेतानंद — गवाह के तौर पर पेश हुए। कई आवेदनों में इन्हीं के मोबाइल नंबर भी दर्ज पाए गए। डीआईजी लोधा ने बताया, 'एक ही गवाह और मठ के पते का बार-बार इस्तेमाल ही वह पैटर्न था जिससे रैकेट का खुलासा हुआ।'

अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की जाँच

STF के अनुसार जाँच में यह भी उभरकर आया है कि कुछ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की मदद से ये फर्जी पासपोर्ट तैयार किए गए। पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जाँच की जा रही है। राहुल लोधा ने कहा, 'आरोपियों ने मठों के पतों का इस्तेमाल कर पासपोर्ट बनवाए और कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की मदद से पासपोर्ट तैयार किए गए।'

जाँचकर्ताओं को मुख्य आरोपियों के बीच आपसी संबंध भी मिले हैं। गुलाब राय बैतूल के आमला में एक कैंप के दौरान रियाल चौधरी से मिला था और बाद में झांसी के एक अन्य कैंप में भी दोनों की मुलाकात हुई। 2022 में गुलाब राय अपने साथियों के साथ डबरा के अंबेडकर पार्क में एक कैंप में शामिल हुआ था।

छह राज्यों तक फैला नेटवर्क

STF ने जाँच का दायरा बढ़ाते हुए अब मध्य प्रदेश, असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब — कुल छह राज्यों — तक अपनी टीमें तैनात की हैं। ये टीमें संदिग्ध नेटवर्क सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी में जुटी हैं। अब तक 75 आरोपियों की शिनाख्त की जा चुकी है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि फर्जी पासपोर्ट रैकेट में सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका इस मामले को और गंभीर बनाती है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार पासपोर्ट सेवाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर ज़ोर दे रही है। STF की जाँच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसकी गहन जाँच आवश्यक है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश STF का फर्जी पासपोर्ट रैकेट क्या है?
यह एक संगठित रैकेट है जिसमें मध्य प्रदेश के बौद्ध मठों के पतों का बार-बार इस्तेमाल कर करीब 70 फर्जी पासपोर्ट बनवाए गए। STF ने इस मामले में 6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है और 75 आरोपियों की पहचान की है।
इस मामले में अब तक कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
अब तक 6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। 25 अगस्त से 18 सितंबर 2026 के बीच 5 लोगों को और 23 सितंबर 2026 को गयाप्रसाद गौतम को गिरफ्तार किया गया।
बौद्ध मठों के पतों का इस्तेमाल क्यों किया गया?
STF के अनुसार आरोपियों ने भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा, डबरा और पाहुर्ना के बौद्ध मठों के पते पासपोर्ट आवेदनों में इस्तेमाल किए, संभवतः सत्यापन प्रक्रिया को चकमा देने के लिए। एक ही मठ के पते का बार-बार इस्तेमाल ही वह पैटर्न था जिससे रैकेट पकड़ में आया।
क्या पासपोर्ट सेवा केंद्र के अधिकारी भी जाँच के दायरे में हैं?
हाँ, STF के डीआईजी राहुल लोधा ने पुष्टि की है कि पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जाँच की जा रही है। जाँच में सामने आया है कि कुछ अधिकारियों की मदद से ये पासपोर्ट तैयार किए गए थे।
जाँच अब किन-किन राज्यों में फैल गई है?
STF ने जाँच का दायरा मध्य प्रदेश के अलावा असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब — कुल 6 राज्यों तक बढ़ा दिया है। इन सभी राज्यों में STF की टीमें संदिग्ध नेटवर्क सदस्यों की तलाश में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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