भोपाल: ईडी ने विवाह सहायता योजना घोटाले में ₹5.37 करोड़ की संपत्ति जब्त, सीईओ न्यायिक हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश की सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शोभित त्रिपाठी और उनके सहयोगी हेमंत साहू की कुल ₹5.37 करोड़ की संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त कर ली हैं। यह कार्रवाई विवाह सहायता योजना से जुड़ी कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के तहत 30 अक्टूबर 2026 को सामने आई। ईडी के भोपाल जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत यह आदेश जारी किया है।
घोटाले का पूरा घटनाक्रम
आरोप है कि 2019 से नवंबर 2021 तक सीईओ के पद पर रहते हुए त्रिपाठी ने अन्य लोगों के साथ मिलकर 5,923 संदिग्ध विवाह सहायता मामलों में ₹30.18 करोड़ का सरकारी फंड स्वीकृत कर वितरित कर दिया। जाँच में यह भी सामने आया है कि अपात्र लाभार्थियों के फर्जी आवेदन फॉर्म और दस्तावेजों का उपयोग कर योजना का लाभ गलत तरीके से उठाया गया।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सरकार की 'विवाह सहायता योजना' का उद्देश्य पंजीकृत गरीब निर्माण श्रमिकों की महिलाओं को ₹51,000 की आर्थिक सहायता देना था। इस कल्याणकारी योजना के फंड को कथित तौर पर बड़े पैमाने पर डायवर्ट किया गया।
फर्जी बैंक खाते और नकद निकासी
ईडी की जाँच में खुलासा हुआ है कि अपात्र लाभार्थियों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले गए। इन खातों में योजना का सरकारी फंड स्थानांतरित किया गया और बाद में उसे तत्काल कई बार में नकद निकाल लिया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान सार्वजनिक शादियों पर प्रतिबंध था — फिर भी उस अवधि में भी अपात्र लोगों को लाभ दिए जाने के आरोप हैं। इससे घोटाले की गंभीरता और अधिक बढ़ जाती है।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
त्रिपाठी को 2 सितंबर 2026 को पीएमएलए, 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया था और वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी की यह जाँच भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा त्रिपाठी और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
यह एफआईआर आईपीसी, 1860 की धारा 420, 409 और 120-बी तथा प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत दर्ज की गई थी। इससे पहले की गई तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज बरामद हुए थे, जिन्हें अपराध से जुड़े साक्ष्य माना जा रहा है।
आम जनता और श्रमिकों पर असर
यह घोटाला उन गरीब निर्माण श्रमिक परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है, जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी। कथित तौर पर जो ₹30.18 करोड़ फर्जी मामलों में बाँटे गए, वे वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक नहीं पहुँचे। इस प्रकार के घोटाले सरकारी कल्याण योजनाओं की विश्वसनीयता और उनके क्रियान्वयन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
आगे की जाँच
ईडी की जाँच अभी भी जारी है और यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में और कितने लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है। संपत्ति जब्ती के बाद अब अभियोजन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ने की संभावना है। मामले की अगली सुनवाई और जाँच का विस्तार आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगा।